10 कुछ माता-पिता सोचते हैं कि पहले उनके बच्चे को और भी पढ़ाई कर लेनी चाहिए और अच्छा करियर बनाना चाहिए, इसके बाद ही वह बपतिस्मा ले सकता है। शायद वे नेक इरादे से ऐसा सोचें, लेकिन उन्हें खुद से पूछना चाहिए, ‘क्या इन बातों से वाकई मेरे बच्चे को सच्ची कामयाबी मिलेगी? क्या यह सोच बाइबल की सोच से मेल खाती है? यहोवा क्या चाहता है कि हम अपनी ज़िंदगी कैसे जीएँ?’​—सभोपदेशक 12:1 पढ़िए।
कुछ पैरेंट्स बच्चों को घर के किसी भी हिस्से में बैठकर पढ़ा लेते हैं। कभी गार्डन में, कभी ड्राइंग रूम में, कभी छत पर तो कभी किचन में ही बैठा लिया। आपके लिए भले ही बच्चों को पढ़ाने की ये जगह सही हों, लेकिन बच्चा इन जगहों पर पढऩे से कंफर्टेबल फील नहीं करता। उसके पढ़ने के लिए माहौल बनाएं। स्टडी रूम या फिर बेडरूम में शांत वातावरण में बैठकर बच्चों को पढ़ाना बेस्ट तरीका है। अगर आप बच्चे को रोज इन्हीं जगहों पर पढ़ाएंगे, तो वे हमेशा इसी जगह पर पढ़ना पसंद करेंगे और उनका कंसन्ट्रेशन भी इन्हीं जगहों पर बनेगा। इसलिए बच्चों के पढ़ाने के लिए हर घर में एक स्पेशल स्पेस होना जरूरी है।
अब आपका काम यहां से शुरू होगा कि विषय को रोचक कैसे बनाया जाए। आप बच्चे को सिद्धान्त तो किताबों से पढ़ाएं पर उसका उदाहरण रोजमर्रा के जीवन से दें। ज्यामिति के उदाहरण कमरे की वस्तुओं से दें। कोण के उदाहरण भी आसपास की वस्तुओं से दिए जा सकते हैं। इसी प्रकार विज्ञान के उदाहरण कार्टून या फिल्मों से या उन चीजों से दें जो बच्चा अपने दैनिक जीवन में देखता है। ऐसा करने से आप बच्चे में एक सकारात्मक बदलाव देखेंगे कि वह प्रत्येक सिद्धान्त को कैसे अपने आसपास से जोड़कर आत्मसात करने लगता है। फिर उसकी यही प्रवृत्ति समय के साथ बढ़ती जाती है और उसे पढ़ाई खेल लगने लगता है।
एक अभिभावक के तौर पर आपको हमेशा यह चिंता सताती है कि आपके बच्चों की सीखने की क्षमता में विकास कैसे हो। आपकी उनसे बड़ी उम्मीदें होती हैं और आप चाहते हैं कि वे अपने जीवन में सफलता की महान ऊंचाईयों को छूएं, लेकिन यदि आपके बच्चे की स्मरण शक्ति अच्छी ना हो तो आप परेशान हो जाते हैं। ऐसे में घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस प्रकार आप अपने बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ा सकते हैं।
नीचे चार ऑप्शन दिए गए है। हिंदी टाइपिंग (इन्स्क्रिप्ट) जाननेवाले पहला ऑप्शन चुनें। हिंदी टाइपिंग नहीं जानते तो दूसरा ऑप्शन चुनें जिससे आप अंग्रेज़ी अक्षरों में लिखकर हिंदी में टाइप कर सकते हैं – meri raay hai... अपने-आप मेरी राय है...में बदल जाएगा। आप चाहें तो चौथा ऑप्शन चुनकर वर्चुअल कीबोर्ड की मदद भी ले सकते हैं। अगर इंग्लिश में ही लिखना है तो तीसरा ऑप्शन चुनें।
कई पैरंट्स सीधे टीवी या कंप्यूटर ऑफ कर देते हैं। कई रिमोट छीनकर अपना सीरियल या न्यूज देखने लगते हैं। इसी तरह कुछ मोबाइल छीनने लगते हैं। कुछ इतने बेपरवाह होते हैं कि ध्यान ही नहीं देते कि बच्चा कितनी देर से टीवी देख रहा है या गेम्स खेल रहा है। कई बार मां अपनी बातचीत या काम में दखलंदाजी से बचने से लिए बच्चों से खुद ही बेवक्त टीवी देखने को कह देती हैं।
लौह युक्त खाद्य पदार्थ: आहार में लोहे की कमी से रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। लोहे की कमी की वजह से कई अन्य समस्याएं जैसे एकाग्रता खराब हो जाना, ऊर्जा में कमी एवं थकान इत्यादि समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसलिए इसको खुराक मिलना जरूरी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपको अपने बच्चों को प्रचूरता से लौह युक्त खाद्य पदार्थ खिलाना चाहिए।
 2 कुछ सर्किट निगरानों ने गौर किया है कि 18 से 22 की उम्र के कई नौजवानों ने अभी तक बपतिस्मा नहीं लिया है, जबकि उनकी परवरिश सच्चाई में हुई है। इनमें से ज़्यादातर नौजवान सभाओं में आते हैं, प्रचार में जाते हैं और खुद को यहोवा का साक्षी मानते हैं। फिर भी, किसी वजह से उन्होंने यहोवा को अपना जीवन समर्पित नहीं किया और बपतिस्मा नहीं लिया। कुछ मामलों में देखा गया है कि माता-पिताओं को लगता है कि उनके बच्चे अभी बपतिस्मा लेने के लिए तैयार नहीं। इस लेख में हम उन चार चिंताओं पर गौर करेंगे जिनकी वजह से कुछ माता-पिता अपने बच्चों को बपतिस्मा लेने का बढ़ावा नहीं देते।
गर्मी शुरू होती है, समुद्र के लिए एक रोमांचक यात्रा आगे बढ़ती है, और कई माता-पिता इस सवाल में रुचि रखते हैं कि कब एक बच्चे को तैरना सिखाना है और क्या नहीं। अनुभवी प्रशिक्षकों के अनुसार, बच्चों को 4 से 6 साल की उम्र से पहले तैराकी नहीं सिखाई जा सकती है, और तब भी, यदि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि यह कैसे करना है। छोटे बच्चे बल्कि विभिन्न प्रकार के inflatable समर्थन साधनों का उपयोग करके सरल पानी के खेल। सबसे महत्वपूर्ण बात, पानी ने एक बच्चे में केवल सकारात्मक भावनाओं का कारण बना। तैराकी सिखाने का एक अयोग्य प्रयास इस तथ्य को जन्म दे सकता है कि बच्चा भयभीत हो जाएगा, और बाद में उसे तैराकी सिखाना असंभ

तमिल में द्वि-अक्षरीय वर्गमाला होने के कारण गणेश को भी कणेश लिखा जाता है. गजेंद्रन, कजेंद्रन लिखे जात हैं. कमला व गमला की लिपि में कोई अंतर नहीं होता. वैसे ही तंगम शब्द जिसका संस्कृत में अर्थ सोना (स्वर्ण) होता है को तमिल भाषी अंग्रेजी मे Thangam लिखते हैं और वहीं हिंदी में थंगम हो जाता है. इसी तरह तंगराज (स्वर्णराज) हिंदी में थंगराज हो जाता है. त थ व ट ठ के लिए प्रयुक्त अंग्रेजी वर्ण तामिल भाषियों के लिए Th, Thh  एवं T, Tth हैं. इसलिए उन्हे वापस अपनी भाषा में अनुवाद करने में कोई तकलीफ नहीं होती. हिंदी भाषी इन दोनों अक्षरयुग्मों के लिए T & Th  ही प्रयोग करते हैं. वर्ण विशेष के लिए विशेष प्रावधान न होने की वजह से लौटकर हिंदी में अनुवाद करने में गलतियाँ हो जाती हैं. इसलिए हिंदी भाषियों को व उसी तरह अन्य भाषा भाषियों को चाहिए कि भाषान्तर के लिए वर्ण विशेष लिपि को अपनाएं. ताकि भाषान्तरण के वक्त गलतियाँ न हो. उदाहरण के लिए प्रस्तुत निम्न शब्दों पर जरा गौर कीजिए-
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8 आइए प्राचीन समय के एक परिवार के अनुभव पर गौर करें जिससे आज माता-पिताओं को मदद मिल सकती है। (प्रेषि. 16:25-33) ईसवी सन्‌ 50 के आस-पास पौलुस अपने दूसरे मिशनरी दौरे में फिलिप्पी शहर गया। वहाँ उस पर और सीलास पर झूठा इलज़ाम लगाया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया। रात के वक्‍त एक ज़बरदस्त भूकंप आया जिससे जेल के सभी दरवाज़े खुल गए। जेलर ने सोचा कि सारे कैदी भाग गए। वह अपनी जान लेने ही वाला था कि तभी पौलुस ने उसे ऐसा करने से रोका। इसके बाद पौलुस और सीलास ने जेलर और उसके परिवार को यीशु के बारे में सच्चाई सिखायी। उन्होंने उन बातों पर यकीन किया और यह जाना कि यीशु की आज्ञा मानना कितना ज़रूरी है। फिर उन्होंने बिना देर किए बपतिस्मा लिया। इस अनुभव से हम क्या सीखते हैं?
एक अभिभावक के तौर पर आपको हमेशा यह चिंता सताती है कि आपके बच्चों की सीखने की क्षमता में विकास कैसे हो। आपकी उनसे बड़ी उम्मीदें होती हैं और आप चाहते हैं कि वे अपने जीवन में सफलता की महान ऊंचाईयों को छूएं, लेकिन यदि आपके बच्चे की स्मरण शक्ति अच्छी ना हो तो आप परेशान हो जाते हैं। ऐसे में घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस प्रकार आप अपने बच्चों की स्मरण शक्ति को बढ़ा सकते हैं।
बहुत से सरकारी स्कूलों में पहली-दूसरी कक्षा को एक साथ बैठाया जाता है। हालांकि विशेषज्ञ और शिक्षाविद कहते हैं कि इन दोनों कक्षाओं के बच्चों को अलग-अलग बैठाना चाहिए। एक साथ बैठाने से पहली कक्षा के बच्चों का सीखना प्रभावित होता है। इसका असर उनके आत्मविश्वास पर भी पड़ता है क्योंकि दूसरी कक्षा के बच्चे पहली कक्षा के बच्चों की तुलना में पहले जवाब दे देते हैं। 
इस बात पर निर्भर करता है कि आपका बच्चा उपरोक्त सभी कार्य करता है या नहीं, इसके विकास पर आपका आगे का काम भी आकार लेगा। इस मामले पर विचार करें जब एक बच्चा यह नहीं जानता कि इस सूची से कुछ कैसे करना है, उदाहरण के लिए, एक बर्तन के लिए नहीं पूछता है। ऐसा करने के लिए उसे सिखाने के लिए, सबसे पहले, आरामदायक और पूरी तरह से अवशोषित डायपर से छुटकारा पाना आवश्यक है। पंपर्स में, बच्चे को यह महसूस नहीं होता है कि वह गीला है। वह विज्ञापन में ऐसा महसूस करता है: "सूखा और आरामदायक।" यही कारण है कि जब वह सब कुछ बहुत अच्छा होता है, तो वह बर्तन पर "अपना व्यवसाय" करने की आवश्यकता नहीं समझता है। दूसरा चरण बच्चे को हर आधे घंटे में बर्तन पर "रोपण" करना होगा। इस स्तर पर, मुख्य बात - आलसी मत बनो। दो या तीन दिन, और बच्चे को पहले से ही बर्तन मांगने की आदत पड़ जाती है।
किसी वर्ण के साथ मात्रा लगने पर उसकी आवाज़ में बदलाव होता है, अगर इस बात को समझने का मौका बच्चों को मिले तो वे बहुत आसानी से मात्राओं के कांसेप्ट को समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए इसके लिए जिन वर्णों को बच्चे पहले से जान रहे थे, उसमें ‘ई’ की मात्रा लगाने के बाद बच्चों को पढ़कर बताया कि उसकी आवाज़ कैसे बदल रही है। (जैसे क+ी=की, र+ ी= री)। इसके बाद वर्णों और मात्रा लगे वर्णों को लिखना शुरु किया, इसके जरिए बच्चों को यह बताना था कि कौन सा वर्ण लिखा जा रहा है। या मात्रा लगे वर्णों को पढ़कर बताने का मौका बच्चों को मिले।
छोटे बच्चों को अक्सर पेट खराब होता है। दस्त के कारण बहुत भिन्न हो सकते हैं, आपको गंभीर बीमारियों से अपेक्षाकृत सुरक्षित, आसानी से ठीक होने वाले पाचन विकारों में भेद करने में सक्षम होने की आवश्यकता होती है, जिन्हें तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। शिशुओं में मल की आवृत्ति काफी एक व्यक्तिगत संकेतक है। कुछ शिशुओं के लिए और प्रति दिन लगभग दस मल त्याग सामान्य माना जाता है। 2-3 दिनों के लिए कुर्सी की देरी भी हमेशा एक गंभीर बीमारी का संकेत नहीं है। शिशुओं में दस्त के मुख्य लक्षण निम्नानुसार हैं: बच्चा अचानक डायपर को अधिक बार मिट्टी देना शुरू कर देता है, मल की स्थिरता एक तरल और पानी वाले में

क्या करते हैं पैरंट्स अक्सर मांएं बच्चों से कहती हैं कि मेरे होते हुए तुम्हें काम करने की क्या जरूरत? बाद में जब बच्चा काम से जी चुराने लगता है तो उसे कामचोर कहने लगती हैं। कई मांएं लड़के-लड़की में भेद करते हुए कहती हैं कि यह काम लड़के नहीं करते, लड़कियां करती हैं। कई बार मांएं सजा के तौर पर काम कराती हैं, मसलन पढ़ नहीं रहे हो तो चलो सफाई करो, किचन में हेल्प करो आदि। बच्चे को लगातार सलाह भी देती रहती हैं, संभलकर गिर जाएगा, टूट जाएगा। 
पैरंट्स बच्चे पर गुस्सा करते हैं। मां कहती हैं कि तुमसे बात नहीं करूंगी। पापा कहते हैं कि बाहर खाने खिलाने नहीं ले जाऊंगा, खिलौना खरीदकर नहीं दूंगा। थोड़ा बड़ा बच्चा है तो पैरंट्स उससे कहते हैं कि कंप्यूटर वापस कर, मोबाइल वापस कर। तुम बेकार हो, तुम बेवकूफ हो। अपने भाई/बहन को देखो, वह पढ़ने में कितना अच्छा है और तुम बुद्धू। कभी-कभार थप्पड़ भी मार देते हैं।
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शिक्षकों को तीनों विषयों की पढ़ाई में कमजोर बच्चों को आसान तरीकों से बच्चों का ज्ञान बढ़ाने के लिए कहा गया है। इस दौरान बच्चों को पढ़ाने के लिए विभाग की ओर से अलग स्टडी मैटीरियल भी तैयार किया गया है, जिसे सभी स्कूलों में भेज दिया गया है। इसमें गणित, विज्ञान और अंग्रेजी को रोचक बनाया गया है। एक्स्ट्रा लर्निंग मैटीरियल चित्रों पर आधारित है ताकि बच्चे खेल-खेल में तीनों विषयों के बारे में पूरा ज्ञान प्राप्त कर सकें। जिस विषय में अधिक बच्चे पिछड़ रहे हैं वहा विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद भी ली जाएगी। सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों से भी इस योजना के तहत सहयोग लिया जाएगा। एक्स्ट्रा क्लास समाप्त होने के बाद इन बच्चों का मूल्याकन भी करवाया जाएगा और बौद्धिक क्षमता यदि कक्षा के अनुरूप न हुआ तो फिर से यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी।

वैसे तो बच्चों को पढ़ाने का कोई समय सही या गलत नहीं होता। ये आपके बच्चे पर निर्भर करता है कि कब उसका दिमाग एक्टिव है। बावजूद इसके शाम का समय बच्चों को सही तरीके से पढ़ाने के लिए बेहतर माना जाता है। इसके कई फायदे भी हैं। पहले तो इस समय तक बच्चे का माइंड रिलेक्स हो चुका होता है और वह आसानी से पढ़ाई में मन लगा सकता है। शाम के समय अगर वह नेचुरल लाइट में पढ़ेगा, तो उसकी आंखों पर ज्यादा जोर नहीं पड़ेगा।
तमिल में द्वि-अक्षरीय वर्गमाला होने के कारण गणेश को भी कणेश लिखा जाता है. गजेंद्रन, कजेंद्रन लिखे जात हैं. कमला व गमला की लिपि में कोई अंतर नहीं होता. वैसे ही तंगम शब्द जिसका संस्कृत में अर्थ सोना (स्वर्ण) होता है को तमिल भाषी अंग्रेजी मे Thangam लिखते हैं और वहीं हिंदी में थंगम हो जाता है. इसी तरह तंगराज (स्वर्णराज) हिंदी में थंगराज हो जाता है. त थ व ट ठ के लिए प्रयुक्त अंग्रेजी वर्ण तामिल भाषियों के लिए Th, Thh  एवं T, Tth हैं. इसलिए उन्हे वापस अपनी भाषा में अनुवाद करने में कोई तकलीफ नहीं होती. हिंदी भाषी इन दोनों अक्षरयुग्मों के लिए T & Th  ही प्रयोग करते हैं. वर्ण विशेष के लिए विशेष प्रावधान न होने की वजह से लौटकर हिंदी में अनुवाद करने में गलतियाँ हो जाती हैं. इसलिए हिंदी भाषियों को व उसी तरह अन्य भाषा भाषियों को चाहिए कि भाषान्तर के लिए वर्ण विशेष लिपि को अपनाएं. ताकि भाषान्तरण के वक्त गलतियाँ न हो. उदाहरण के लिए प्रस्तुत निम्न शब्दों पर जरा गौर कीजिए-
इसका मतलब यह नहीं है कि, बच्चों को वर्णमाला और कुछ शब्दों को याद रखने की आवश्यकता होनी चाहिए। जबकि स्मृति सीखने में एक भूमिका निभाती है, इसे पढ़ने में संक्षेप में याद रखना और अल्पकालिक और कामकाजी स्मृति के बारे में अधिक जानकारी है। एक पाठक को यह याद रखने में सक्षम होना चाहिए कि वह वाक्य के अंत तक पहुंचने से पहले वाक्य की शुरुआत में क्या पढ़ता है, अंत में पहुंचने से पहले अनुच्छेद की शुरुआत में वह क्या पढ़ता है, और इसी तरह।
12 एक माँ समझाती है कि वह क्यों नहीं चाहती थी कि उसकी बेटी बपतिस्मा ले। वह बताती है, “मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है, लेकिन मैं डरती थी कि कहीं उसका बहिष्कार न हो जाए।” इस बहन की तरह कुछ माता-पिताओं को लगता है कि उनका बच्चा कोई नादानी कर बैठेगा, इसलिए जब तक वह समझदार नहीं हो जाता उसे बपतिस्मा नहीं लेना चाहिए। (उत्प. 8:21; नीति. 22:15) उन्हें शायद लगे कि अगर उनका बच्चा बपतिस्मा नहीं लेगा, तो उसका बहिष्कार भी नहीं होगा। ऐसी सोच क्यों गलत है?​—याकू. 1:22.
यह वह पुस्तक है जिसने इसे मेरे लिए शुरू किया। एक बच्चे के रूप में, मैंने अपनी माँ से इस पुस्तक को इतनी बार पढ़ने के लिए आग्रह किया कि वह शायद अब भी दिल से याद रखे। यह छोटे शब्दों और छोटे वाक्यों के साथ एक साधारण कहानी है, जो बच्चे को पढ़ने के लिए सही सिखाती है। कहानी मूल रूप से विभिन्न कुत्तों के बारे में है जो सभी अंत में एक पेड़ में एक कुत्ते पार्टी में जाते हैं। बच्चों के लिए अच्छा और आसान और एक मजेदार सोने की किताब। यदि आप कुत्ते के प्रेमियों का परिवार शुरू कर रहे हैं, तो यह एक महान परिचय है।

खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय मोरनी में 50 प्राथमिक शिक्षकों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। एससीईआरटी गुड़गांंव के निर्देश से डाईट की प्रिंसिपल सुजाता राणा के मार्गदर्शन में यह वर्कशॉप हुई। इसमें अध्यापकों को लर्निंग आउटकमज पर पांच दिन तक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बताया गया कि विद्यार्थियों को कैसे कक्षा में रखा जाए, उन्हें किस प्रकार एक्टिविटी बेस लर्निंग कराई जाए। ताकि वह पूरे उत्साह व रोमांच से कक्षा के शिक्षण कार्यों में भाग ले सके।


भाषा कालांश के अपने अनुभवों में भी मैंने इस बात को देखा है कि जो बच्चे बारहखड़ी के माध्यम से किसी लिखित सामग्री को पढ़ने की कोशिश करते हैं, उनकी रफ्तार बाकी बच्चों से कम होती है जो मात्रा को समझकर पढ़ते हैं। एक बच्चे को प्रवाह के साथ किताब पढ़ने वाली स्थिति तक पहुंचने के लिए कई महीनों जूझना पड़ा। इसके लिए पुस्तकालय की किताबों से काफी मदद मिली। अगर इस तरह का सपोर्ट नहीं होता तो बच्चे के लिए अटक-अटक कर पढ़ने वाली स्थिति से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो जाता।
लेकिन हर माता – पिता की यही इच्छा होती है की उनका बच्चा समाज में प्रतिष्ठा, प्रंशसा एवं लोकप्रियता हासिल करें | इसके लिए वह अपने बच्चे का अपने हैसियत से बढ़कर अच्छे से अच्छे स्कूल में एडमिशन कराते है ताकि वह नैतिक शिक्षा को ग्रहण कर नैतिक मूल्यों का विकास कर सके | लेकिन स्कूली शिक्षा के साथ – साथ बच्चों में नैतिक गुणों का विकास करने में माता – पिता एवं परिवार के अन्य सदस्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है |
निश्चित रूप से, बॉक्स में, ज्यादातर महिलाओं के पास प्राकृतिक पत्थरों के साथ गहने हैं, और कई इन उत्पादों की जादुई शक्ति के बारे में नहीं सोचते हैं। यह बहुत जल्दबाज है। यद्यपि, पहली नज़र में, पत्थर ठंडे और चुप लगते हैं, वे व्यक्ति पर एक निश्चित प्रभाव डालते हैं। पैतृक अनुभव कई सदियों पहले, लोगों ने प्राकृतिक पत्थरों के असाधारण गुणों पर ध्यान दिया। उनका मानना ​​था कि हर पत्थर में एक जीवंत ऊर्जा होती है जो इच्छाओं की पूर्ति, संकट और बुरी शक्तियों से सुरक्षा, ईर्ष्या और अन्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा, वे मानते थे कि पत्थर मनुष्य के भाग्य पर बहुत प्रभाव डाल सकता है। यह माना जाता
उचित खुराक: उचित आहार आपके बच्चों को उपयुक्त मानसिक फिटनेस का स्तर बनाए रखने में मदद करता है, जबकि अनुचित आहार ठीक इसके विपरीत कार्य करता है। आपको यह पता होना चाहिए कि मानव मस्तिष्क को काफी ऊर्जा की जरूरत होती है। शरीर के वजन का मात्र 2% होने के बावजूद, मस्तिष्क प्रतिदिन शरीर की कुल ऊर्जा खपत के 20 प्रतिशत का उपभोग करता है। इस वजह से स्वस्थ आहार, बच्चों में स्मरण शक्ति बढ़ाने का एक एक महत्वपूर्ण तरीका है।

कुछ पैरेंट्स बच्चों को घर के किसी भी हिस्से में बैठकर पढ़ा लेते हैं। कभी गार्डन में, कभी ड्राइंग रूम में, कभी छत पर तो कभी किचन में ही बैठा लिया। आपके लिए भले ही बच्चों को पढ़ाने की ये जगह सही हों, लेकिन बच्चा इन जगहों पर पढऩे से कंफर्टेबल फील नहीं करता। उसके पढ़ने के लिए माहौल बनाएं। स्टडी रूम या फिर बेडरूम में शांत वातावरण में बैठकर बच्चों को पढ़ाना बेस्ट तरीका है। अगर आप बच्चे को रोज इन्हीं जगहों पर पढ़ाएंगे, तो वे हमेशा इसी जगह पर पढ़ना पसंद करेंगे और उनका कंसन्ट्रेशन भी इन्हीं जगहों पर बनेगा। इसलिए बच्चों के पढ़ाने के लिए हर घर में एक स्पेशल स्पेस होना जरूरी है।
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नीचे चार ऑप्शन दिए गए है। हिंदी टाइपिंग (इन्स्क्रिप्ट) जाननेवाले पहला ऑप्शन चुनें। हिंदी टाइपिंग नहीं जानते तो दूसरा ऑप्शन चुनें जिससे आप अंग्रेज़ी अक्षरों में लिखकर हिंदी में टाइप कर सकते हैं – meri raay hai... अपने-आप मेरी राय है...में बदल जाएगा। आप चाहें तो चौथा ऑप्शन चुनकर वर्चुअल कीबोर्ड की मदद भी ले सकते हैं। अगर इंग्लिश में ही लिखना है तो तीसरा ऑप्शन चुनें।
एक अच्छी किताब के साथ कर्लिंग की तरह कुछ भी नहीं है, और यह तब भी बेहतर होता है जब आप कुत्तों के बारे में पढ़ते समय गले लगाने के लिए एक अच्छे पिल्ला के साथ घुमा सकते हैं। कुत्तों के मालिकों के लिए बहुत सारी अच्छी किताबें हैं जो ऐसी कहानियों से भरी हुई हैं जो वास्तव में किसी भी व्यक्ति के लिए घर पर आती हैं, जिसने कभी गहरे भावनात्मक संबंध को महसूस किया है जिसे आप केवल कुत्ते से प्यार करते हैं। कुत्तों के बारे में मेरी कुछ पसंदीदा किताबें यहां दी गई हैं कि प्रत्येक कुत्ते के मालिक को पढ़ना और आनंद लेना चाहिए।

8 आइए प्राचीन समय के एक परिवार के अनुभव पर गौर करें जिससे आज माता-पिताओं को मदद मिल सकती है। (प्रेषि. 16:25-33) ईसवी सन्‌ 50 के आस-पास पौलुस अपने दूसरे मिशनरी दौरे में फिलिप्पी शहर गया। वहाँ उस पर और सीलास पर झूठा इलज़ाम लगाया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया। रात के वक्‍त एक ज़बरदस्त भूकंप आया जिससे जेल के सभी दरवाज़े खुल गए। जेलर ने सोचा कि सारे कैदी भाग गए। वह अपनी जान लेने ही वाला था कि तभी पौलुस ने उसे ऐसा करने से रोका। इसके बाद पौलुस और सीलास ने जेलर और उसके परिवार को यीशु के बारे में सच्चाई सिखायी। उन्होंने उन बातों पर यकीन किया और यह जाना कि यीशु की आज्ञा मानना कितना ज़रूरी है। फिर उन्होंने बिना देर किए बपतिस्मा लिया। इस अनुभव से हम क्या सीखते हैं?


बता दें, धर्मेंद्र इन दिनों खेती बाड़ी में ज्यादा इंट्रस्ट लेने लगे हैं। आए दिन धर्मेंद्र अपने खेतों में खेती करते, पानी डालते और नेचर का खयाल रखते देते हैं। ऐसे में धर्मेंद्र का ये वीडियो सामने आया है जिसे शेयर करते हुए एक्टर एक कैप्शन भी लिखते हैं- ‘वह मेरे दरवाजे पर नॉक कर रहा है, लेकिन मैं उस बूढ़े के लिए दरवाजा नहीं खोलूंगा। अभी तो मैं जवान हूं। जिन्हें जवाब नहीं दे सका, उनके लिए जवाब में मेरा प्यार भरा पैगाम।’

वास्तव में, मूल बातें शुरू करना एक अच्छा विचार है। उस समय, गेविन इस तथ्य को समझ नहीं पाए थे कि चार तिमाहियों में एक डॉलर बराबर है। लेकिन उन्हें पता था कि हमें चीजों को खरीदने के लिए पैसे चाहिए। और हमने पैसे के लिए अन्य उपयोगों के बारे में उसे पढ़कर अपने क्षितिज का विस्तार करने की कोशिश की। ऐसा करने के लिए, हमने लिफाफे को अपने बड़े (हाल ही में खाली) मनी जार में रखा:

एक उदाहरण के माध्यम से बात करते हैं। किसी स्कूल में  पहली कक्षा के बच्चों ने ‘ई’ की मात्रा सीखी। अगर इसी दिन ‘ऐ’ और’औ’ की मात्राओं के बारे में भी बच्चों को बताया जाये तो क्या होगा? इस बात की ज्यादा संभावना है कि बच्चों ने जो नई मात्रा सीखी है उसके अभ्यास का कम मौका मिलेगा। नई लर्निंग को समझ का हिस्सा बनने के लिए अभ्यास का जो अवसर बच्चों को मिलना चाहिए, वह शायद नहीं मिल पाएगा।
कई टीचर्स मानते हैं कि छोटे बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर ना डाला जाए। क्योंकि इस समय उनका माइंड डेवलप हो रहा है, ऐसे में वे जितना पढ़ें उन्हें उतना ही पढ़ाना चाहिए। अपने प्यारे छोटे बच्चों को दिनभर में पढ़ाने के लिए सिर्फ एक घंटा ही काफी है। इस दौरान ध्यान रहे कि शोर-शराबा ना हों। इससे ज्यादा देर पढ़ाएंगे, तो हो सकता है कि याद किया हुआ भी सब भूल जाएं। इसलिए एक घंटे के बीच में भी 5 -5 सैकंड का ब्रेक ले लें।
कई साल पहले, मैंने अपने बेटे गेविन को सिक्कास्टार मशीन में ले लिया ताकि वे यादृच्छिक सिक्के बदल सकें जो वह नकदी में एकत्र कर रहे थे। जन्मदिन के पैसे के पिछले दो वर्षों में जोड़ा गया, उनका कुल $ 150 के आसपास था। जैसे ही उसने उस पैसे पर देखा (और इस तथ्य को शोक किया कि अब वह सिक्कों के विशाल जार की जगह पेपर था), मुझे एहसास हुआ कि गैविन को पैसे के बारे में पढ़ाना शुरू करने का समय था।
लौह युक्त खाद्य पदार्थ: आहार में लोहे की कमी से रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। लोहे की कमी की वजह से कई अन्य समस्याएं जैसे एकाग्रता खराब हो जाना, ऊर्जा में कमी एवं थकान इत्यादि समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसलिए इसको खुराक मिलना जरूरी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपको अपने बच्चों को प्रचूरता से लौह युक्त खाद्य पदार्थ खिलाना चाहिए।
छोटी क्लासेस में भी स्टूडेंट्स को ज्यादातर वे टीचर पसंद आते हैं जो बोझिल से बोझिल सब्जेक्ट को भी दिलचस्प अंदाज में पढ़ाते हैं। ऐसा करते वक्त आम जिंदगी में उस सब्जेक्ट से जुड़े ऐप्लिकेशन बच्चों के सामने रखना चाहिए जिससे बच्चे आसानी से रिलेट कर सकें। किताबी पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल चीजों की जानकारी देना जरूरी है। इसलिए उसे असल जिंदगी के अनुभवों के साथ जोड़कर बताएं। उदाहरण के लिए अगर बच्चे को बारिश पर कोई कविता याद करा रहे हों तो उनकी उम्र के हिसाब से किसी फिल्मी गाने को जोड़कर समझा सकते हैं। स्पोर्ट्स की जानकारी देनी हो तो बड़े खिलाडि़यों का जिक्र करके बता सकते हैं। सब्जेक्ट्स को सवाल-जवाब के जरिए पढ़ाएं। इसके लिए खुद भी तैयारी करें। ग्राफिक टेक्नीक का इस्तेमाल करें क्योंकि बच्चों को शब्दों से ज्यादा तस्वीरें अपने करीब खींचती हैं। टीचिंग टूल्स का यूज करें।
वे आगे कहते हैं, “रही बात दूसरी कक्षा और पहली कक्षा के सीखने के स्तर में बहुत ज्यादा अंतर न होने वाली स्थिति में क्या किया जा सकता है। तो इसका जवाब है कि पहली कक्षा के बच्चों को मात्राए सिखाते समय दूसरी कक्षा के बच्चों को भी शामिल किया जा सकता है। क्योंकि बड़े बच्चे तो वर्ण आसानी से सीख जाते हैं। उनको मात्राओं को पहचानने और वर्णों के साथ मात्रा लगाकर पढ़ने में विशेष दिक्कत होती है। इस तरीके से पहली-दूसरी कक्षाओं को एक साथ मैनेज किया जा सकता है।”

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