छोटे बच्चों को पढ़ाने का तरीका हिंदी में छोटे बच्चों को पढ़ाना क्या वाकई इतना आसान है। शायद नहीं। ये छोटे जरूर होते हैं, लेकिन इन्हें एक जगह बैठाकर पढ़ाना टीचर और पैरेंट्स दोनों के लिए ही एक बड़ा टास्क है। बच्चों की लर्निंग हैबिट्स को लेकर पैरेंट्स और टीचर्स के मन में एक ही सवाल होता है कि आखिर इन्हें पढ़ाया कैसे जाए। आपको बता दें कि बच्चों को कुछ देर भी चुपचाप बैठाकर पढ़ाना काफी टफ है, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने पढ़ाने का तरीका बदल दें। बच्चों को ऐसे अनोखे तरीकों से पढ़ाएं कि उन्हें ये अहसास ही ना हो, कि वो पढ़ाई करने जैसा भारी काम कर रहे हैं।
बच्चे का पूर्ण विकास और स्वास्थ्य कई कारकों को निर्धारित करता है: एक सुव्यवस्थित दैनिक दिनचर्या, एक संतुलित आहार, साथ ही साथ शारीरिक गतिविधि और सकारात्मक भावनाएं। एक नवजात शिशु स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित करने में असमर्थ है। इसलिए, मालिश करना इतना आवश्यक है, जो मांसपेशियों और शरीर की अन्य प्रणालियों को मजबूत करने में मदद करता है। अनुदेश 1 निवारक मालिश लगभग हर स्वस्थ बच्चे के लिए संकेत दिया जाता है। यह शरीर के पूर्ण विकास को बढ़ावा देता है। माता-पिता इस मालिश को अपने दम पर कर सकते हैं या पेशेवर मदद ले सकते हैं। आप एक बाल रोग विशेषज्ञ के परामर्श के बाद डेढ़ से दो महीने की उम्र के पहले से ही स्वस्
रॉबर्ट कभी भी इन सब चीजों को चेक करने नहीं जाता है। इसलिए मुझे पता था कि मुझे अपनी किसी भी दोस्त को ये सब बताने की जरूरत नहीं है। जब भी मुझे रॉबर्ट स्माइल कर देखता था या बाहों में लेता था ,मैं खुद को अपराधी समझने लगती थी और तुरंत उसके साथ बेड पर चली जाती थी। हम दोनों तब किसी जंगली जानवर से कम नहीं होते थे। मैं अपराधबोध में तो रॉबर्ट अपनी पत्नी के साथ आनंदित होता था ।
इन सभी कार्यो के साथ बच्‍चों को उनकी कक्षा की दिनचर्या से परिचित कराएं। यहां सबसे आवश्‍यक बात यह है कि अभिभावक व शिक्षक स्कूल के शुरूआती दिनों में ही बच्चों को “अ” से “ज्ञ” तक पढ़ाने का प्रयास न करें बल्कि उन्‍हें इसके लिए समय दें ताकि वे इसे समझ सकें और फिर सीख सकें कहानी सुनाने के लिए चित्रों वाली किताब का उपयोग करें और बच्चों की जिज्ञासा का जवाब देने की कोशिश करें।
6 हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चे जल्दी समझदार बन जाते हैं और कम उम्र में ही सच्चाई समझ लेते हैं, बुद्धि-भरे फैसले करते और बपतिस्मे का कदम उठाते हैं। वहीं दूसरी तरफ, कुछ बच्चों को वक्‍त लगता है। समझदार माता-पिता अपने बच्चों पर बपतिस्मा लेने का दबाव नहीं डालते। इसके बजाय, वे हर बच्चे की सीमाओं को समझते हुए तरक्की करने में उसकी मदद करते हैं। माता-पिताओं को खुशी होती है जब उनका बच्चा नीतिवचन 27:11 में दी बात को दिल से मानता है। (पढ़िए।) तो फिर माता-पिताओं को इसी लक्ष्य के साथ अपने बच्चों को सिखाना चाहिए कि वे आगे चलकर यीशु का चेला बनें। उन्हें खुद से पूछना चाहिए, ‘क्या मेरे बच्चे ने इस हद तक सच्चाई सीख ली है कि वह अच्छी तरह समझता है कि समर्पण और बपतिस्मे का क्या मतलब है?’
एक पुरानी चाइनीज कहावत है : You tell me, I will forget, you show me, I may remember, you involve me, I will understand. टीचर को सबसे ज्यादा इस कहावत के आखिरी हिस्से पर अमल करना चाहिए। उसे हर तरह से स्टूडेंट को इंवॉल्व करने का हुनर आना चाहिए। खासकर एक ऐसे वक्त में जब स्टूडेंट्स के पास सूचना और जानकारी पाने के स्त्रोत बढ़ गए हैं, टीचर को इसे अपने लिए एक चुनौती की तरह लेना चाहिए। वह यह देखें कि कैसे टेक्नीकल एंडवांसमेंट के साथ अपने टीचिंग मेथड का तालमेल बिठा सकते हैं।
रोलर स्केटिंग एक आकर्षक मनोरंजन है और न केवल वयस्कों के लिए, बल्कि बच्चों के लिए भी सकारात्मक भावनाओं का एक स्रोत है। सवारी आरामदायक और सुरक्षित हो, इसके लिए आपको यह सीखने की जरूरत है कि अपने बच्चे के लिए सही वीडियो कैसे चुनें। अनुदेश 1 रोलर स्केटिंग कई बच्चों का पसंदीदा ग्रीष्मकालीन शगल है, और इसे सुरक्षित रखने के लिए, स्केट्स का चयन करते समय आपको कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। एक युवा रोलर के लिए आराम और सुरक्षा की प्रतिज्ञा एक विश्वसनीय निर्माता से खेल उपकरण है। यह एक बच्चे के लिए रोलर स्केट्स को बचाने के लायक नहीं है: बहुत सस्ते स्केट्स असुविधाजनक हो सकते हैं, जबकि एक बच्चे की सवारी करने से
अनुरोधित पृष्ठ "/hi/article/%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%259D%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BE-%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2596%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%258F%25E0%25A4%2581-%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%2580-%25E0%25A4%25AD%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%259C" पाया नहीं गया.
कई पैरेंट्स में पेशंस की बहुत कमी होती है। बच्चे ने अगर एक बार कुछ याद न किया तो उन्हें जबरदस्ती डांट फटकार लगाकर या कभी-कभी तो याद कराने के लिए उन पर जोर देते हैं और जरूरत पड़ने पर उन पर हाथ तक उठा देते हैं। ऐसा करना न केवल आपके लिए नुकसानदायक है बल्कि आपके बच्चे के लिए भी उतना ही कष्टदायक है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मारने-डाटने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रोष पैदा होता है और मार के डर से उसे जितना भी याद है वो भी भूल जाता है। ऐसे में बच्चों को प्यार से ही पढ़ाने की कोशिश करें।
13 बेशक, जब तक एक बच्चा समर्पण और बपतिस्मे के लिए तैयार न हो, माता-पिता नहीं चाहेंगे कि वह यह कदम उठाए। लेकिन यह सोचना एक भूल होगी कि बपतिस्मा लेने के बाद ही उनका बच्चा यहोवा के सामने जवाबदेह ठहरेगा। दरअसल जब एक बच्चा सही-गलत के बारे में यहोवा के स्तर जान जाता है, तभी से वह उसके सामने जवाबदेह ठहरता है। (याकूब 4:17 पढ़िए।) समझदार माता-पिता अपने बच्चे को बपतिस्मा लेने से नहीं रोकते, फिर चाहे उनका बच्चा उम्र में छोटा क्यों न हो। इसके बजाय, वे उसे उन बातों से प्यार करना सिखाते हैं जिनसे यहोवा प्यार करता है और उन बातों से नफरत करना सिखाते हैं जिनसे यहोवा को नफरत है। इस मामले में वे उसके लिए अच्छी मिसाल भी रखेंगे। (लूका 6:40) यहोवा के लिए प्यार आपके बच्चे को उभारेगा कि वह हमेशा वही काम करे जो यहोवा की नज़र में सही है। इस तरह वह गंभीर पाप करने से बचेगा।​—यशा. 35:8.
विभिन्न सर्वे रिपोर्ट में प्रदेश के पहली से आठवीं तक की कक्षाओं के अधिकतर बच्चे गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों कमजोर पाए गए हैं। इसे लेकर शिक्षा विभाग जिला बार स्कूलों का सर्वे कर रहा है। इस दौरान स्कूलों में इन तीनों विषयों में कमजोर बच्चों की सूची तैयार कर रहा है। इस दौरान सर्वे करने वाली शिक्षा विभाग की टीम शिक्षक की जिम्मेदारी भी तय करती है कि एक या दो माह के दौरान कमजोर बच्चों का ज्ञान बढ़ा कर उन्हें अन्य बच्चों के साथ कक्षा में बैठाया जाए।
♥♥♥MomCom India is a channel created to share personal experiences with it’s audiences, none of the recommendations of this channel are sponsored by any company or product. We also are not medical professionals so please consult your doctor before taking any medication or trying any remedy suggested in our videos. As each baby is different recommendations on this channel may not work for you, and should not be considered as an excuse to not visit your doctor or consult a medical practitioner. You can contact us by sending us an email to momcomindia@gmail.com♥♥♥

अब आप सोच रहे होंगे,ये मुद्दा क्या है,कहना क्या चाहती हो,ये क्या हॉस्टल और घर से पढ़ने वालों के बीच कोई comparison है? ....नहीं !! उदाहरण में चाहे मैंने अपने बेचारे भोले भाले पतिदेव को खींच लिया हो और केवल हॉस्टल और घर से पढ़ाई का ही तुलनात्मक विश्लेषण किया हो लेकिन सीधे सीधे शब्दों में बात है स्वावलंबन की। हाँ!! वो गुण जो हमारे बच्चों में हमें सबसे पहले डालना चाहये चाहे वो हमारे पास रहते हो या नहीं। खुद पर भरोसा करने का काम जिस दिन उन्हें आ जायेगा,उनके पंखों को फैलने से कोई नहीं रोक पायेगा। Self Dependence,Decision making power,Compromise ,Adjustments वो छोटे छोटे बीज है जो बच्चों के मूल्यों की जड़ों को मजबूत बनाती है।
जी! मैं एक छोटे कस्बे से तालुक्क रखती हूं तो मुझे स्कूल खत्म करते ही आगे की पढ़ाई के लिए घर छोड़कर बाहर हॉस्टल में रहना पड़ा। बहुत मुश्किल था वो समय मेरे लिए। खास तौर पर माँ के बिना रहना। मेरी उन् आदतों का क्या होगा जो कभी उसने सुधारी ही नहीं,मेरे बाल बनाना,रोज़ की मेरी स्कूल के किस्से सुनना, आते ही निम्बू पानी देना,बालों में तेल डालना और ना जाने क्या क्या। ये सब तो मुझे उससे जोड़े रखता है,वहां हॉस्टल में कौन करेगा ये सब। शुरू में कठिन था लेकिन आज सोचती हूँ तो लगता है, उन 7 सालों में ली कितनी सीख आज मेरे जीवन को कितना सरल और सुलझी हुई बनाती है।
कई टीचर्स मानते हैं कि छोटे बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर ना डाला जाए। क्योंकि इस समय उनका माइंड डेवलप हो रहा है, ऐसे में वे जितना पढ़ें उन्हें उतना ही पढ़ाना चाहिए। अपने प्यारे छोटे बच्चों को दिनभर में पढ़ाने के लिए सिर्फ एक घंटा ही काफी है। इस दौरान ध्यान रहे कि शोर-शराबा ना हों। इससे ज्यादा देर पढ़ाएंगे, तो हो सकता है कि याद किया हुआ भी सब भूल जाएं। इसलिए एक घंटे के बीच में भी 5 -5 सैकंड का ब्रेक ले लें।
नई दिल्ली। शिक्षक दिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्कूली बच्चों के साथ बात की। दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में दिल्ली के अलग-अलग स्कूलों के 60 शिक्षकों और 800 छात्रों ने पीएम मोदी के साथ बातचीत में हिस्सा लिया। इसके अलावा देश के दूसरे हिस्सों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों ने मोदी से सवाल पूछे। क्या था सवाल और पीएम ने क्या दिए जवाब, पढ़ें-
हर माँ बाप के दिल की ये ख़्वाहिश होती है कि उनका बच्चा पढ़ लिख कर एक बड़ा आदमी बने। इसके लिए वो बच्चों का अच्छे से अच्छे स्कूल में दाख़िला करवाते हैं। स्कूल में अध्यापक भी बच्चों पर जी जान से मेहनत करते हैं, आख़िर उनकी परफ़ोरमेंस भी बच्चों की परफ़ोरमेंस से ही आँकी जाती है। बच्चे स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ मिलकर काफी कुछ सीख-पढ़ लेते हैं पर  वो स्कूल में मुश्किल से चार या पाँच घंटे ही रहते हैं। ऐसे में बच्चे को सिखाने-पढ़ाने की अध्यापक से ज़्यादा ज़िम्मेदारी माँ-बाप की हो जाती है।
नैतिक विकास में रीति – रिवाजो, प्रथाओं, परम्पराओं एवं कानूनों का अति महत्वपूर्ण स्थान होता है लेकिन जब बच्चा छोटा होता है तो उसे सामाजिक परम्पराओं के अनुसार नैतिक आचरणों की जानकारी नहीं होती है | ऐसे में आप बच्चों को खेलों के माध्यम से नैतिक मूल्यों की शिक्षा दे सकते है | जब बच्चा खेलते समय अपने साथी समूहों के बच्चों की बात नहीं मानता है तो उसपर चीखे – चिल्लाए नहीं बल्कि प्यार से समझाएं |
‘स्पाइसटून्स’ की रोचकता और अनोखापन देखते हुए विश्वप्रसिद्ध कंपनी ब्रिटेनिया में इसमें रुचि दिखाई और उनके ब्रिटेनिया जिमजैम के समर्थन से इसी वर्ष फरवरी में इसे लाँच किया गया। जल्द ही इस गेम न प्रसिद्धी के शिखर को छुआ और वर्तमान में रोजाना 500 से अधिक खिलाड़ी इस आॅनलाइन खेल का लुत्फ उठा रहे हैं। पहले पांच हफ्तों के दौरान ही 25 हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं ने इनमें रुचि दिखाई और आने वाले 15 महीनों में वे इसे 6 गुना से अधिक करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। वर्तमान में इसे केवल कंप्यूटर के माध्यम से ही खेला जा सकता है लेकिन जल्द ही इसका मोबाइल संस्करण भी प्रशंसकों के लिये उपलब्ध होगा।
10 कुछ माता-पिता सोचते हैं कि पहले उनके बच्चे को और भी पढ़ाई कर लेनी चाहिए और अच्छा करियर बनाना चाहिए, इसके बाद ही वह बपतिस्मा ले सकता है। शायद वे नेक इरादे से ऐसा सोचें, लेकिन उन्हें खुद से पूछना चाहिए, ‘क्या इन बातों से वाकई मेरे बच्चे को सच्ची कामयाबी मिलेगी? क्या यह सोच बाइबल की सोच से मेल खाती है? यहोवा क्या चाहता है कि हम अपनी ज़िंदगी कैसे जीएँ?’​—सभोपदेशक 12:1 पढ़िए।
अब आप सोच रहे होंगे,ये मुद्दा क्या है,कहना क्या चाहती हो,ये क्या हॉस्टल और घर से पढ़ने वालों के बीच कोई comparison है? ....नहीं !! उदाहरण में चाहे मैंने अपने बेचारे भोले भाले पतिदेव को खींच लिया हो और केवल हॉस्टल और घर से पढ़ाई का ही तुलनात्मक विश्लेषण किया हो लेकिन सीधे सीधे शब्दों में बात है स्वावलंबन की। हाँ!! वो गुण जो हमारे बच्चों में हमें सबसे पहले डालना चाहये चाहे वो हमारे पास रहते हो या नहीं। खुद पर भरोसा करने का काम जिस दिन उन्हें आ जायेगा,उनके पंखों को फैलने से कोई नहीं रोक पायेगा। Self Dependence,Decision making power,Compromise ,Adjustments वो छोटे छोटे बीज है जो बच्चों के मूल्यों की जड़ों को मजबूत बनाती है।
वर्ष के समय को देखते हुए, आउटरवियर चुनें। एक ठंड की अवधि के लिए, गर्म ऊन कंबल पर या फर के साथ एक लिफाफे पर रोकें, गर्म टोपी को मत भूलना। एक कंबल के लिए, एक सुंदर duvet कवर या एक कोने खरीदें, वे निर्वहन के लिए एक सेट में लालित्य जोड़ देंगे। गुलाबी या नीली रिबन या एक विशेष पिन लें। शरद ऋतु और वसंत के लिए, एक गद्दी पॉलिएस्टर, चौग़ा और एक कंबल पर एक लिफाफे के बीच चुनें।
 2 कुछ सर्किट निगरानों ने गौर किया है कि 18 से 22 की उम्र के कई नौजवानों ने अभी तक बपतिस्मा नहीं लिया है, जबकि उनकी परवरिश सच्चाई में हुई है। इनमें से ज़्यादातर नौजवान सभाओं में आते हैं, प्रचार में जाते हैं और खुद को यहोवा का साक्षी मानते हैं। फिर भी, किसी वजह से उन्होंने यहोवा को अपना जीवन समर्पित नहीं किया और बपतिस्मा नहीं लिया। कुछ मामलों में देखा गया है कि माता-पिताओं को लगता है कि उनके बच्चे अभी बपतिस्मा लेने के लिए तैयार नहीं। इस लेख में हम उन चार चिंताओं पर गौर करेंगे जिनकी वजह से कुछ माता-पिता अपने बच्चों को बपतिस्मा लेने का बढ़ावा नहीं देते।
दूसरी बात कि कुछ स्कूलों में मात्रा सिखाने का तरीका भी समस्याओं से ग्रस्त है, जिससे निजात पाने की जरूरत है। ताकि बच्चों को एक बोझिल कवायद से बचाया जा सके। जैसे किताब पढ़ने के लिए क, क पर बड़ी ई की मात्रा की, त, त पर आ की मात्रा ता, ब किताब। इस तरीके से किसी पाठ को पूरे प्रवाह और सहजता के साथ पढ़ने में बच्चों को दिक्कत होती है। लंबे-लंबे वाक्यों को पढ़ना तो बहुत परेशान करने वाला होता है।
बता दें, धर्मेंद्र इन दिनों खेती बाड़ी में ज्यादा इंट्रस्ट लेने लगे हैं। आए दिन धर्मेंद्र अपने खेतों में खेती करते, पानी डालते और नेचर का खयाल रखते देते हैं। ऐसे में धर्मेंद्र का ये वीडियो सामने आया है जिसे शेयर करते हुए एक्टर एक कैप्शन भी लिखते हैं- ‘वह मेरे दरवाजे पर नॉक कर रहा है, लेकिन मैं उस बूढ़े के लिए दरवाजा नहीं खोलूंगा। अभी तो मैं जवान हूं। जिन्हें जवाब नहीं दे सका, उनके लिए जवाब में मेरा प्यार भरा पैगाम।’
बड़ी क्लासेस में यह काम स्टूडेंट्स के टेंपरामेंट (मिजाज) को समझकर आसानी से किया जा सकता है। स्टूडेंट्स के मिजाज को भांपने और उसके मुताबिक बदलने में टीचर को गुरेज नहीं करना चाहिए। दिक्कत तब पैदा होती है जब टीचर अपने सामने पढ़ने आए स्टूडेंट्स पर कोई राय कायम किए बिना कोर्स को सिर्फ पढ़ाने की गरज से पढ़ा कर क्लास का समय बिता देते हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स इंगेज नहीं हो पाते और क्लास में शोर करने के अलावा वैसी अनुशासनहीनता भी करते हैं जो उनकी फाउंडेशन को कमजोर करता है। यूनिवर्सिटी में जाकर यही स्टूडेंट्स पढ़ने की बजाय क्लास को कैसे बाधित किया जाए, इसमें एक्सपर्ट हो जाते हैं।
• Compromise : हां!! ये शब्द के मायने भी मैंने सीख लिए थे हॉस्टल में। जब हम कुल 150 लड़कियों के साथ रहते हैं जो कहीं ना कहीं हर तरीके से हमारे जैसी ही हैं, तो उनके साथ संबंध बनाने के लिए कभी झुकना पड़ता है तो कभी प्यार से समझना पड़ता है,कभी रूठे को मनाना पड़ता है तो कभी सच और सही के लिए विद्रोह करना पड़ता है लेकिन हां Compromise हर जगह अपनी एक अहम भूमिका निभाता है चीजों को सरल और सौहार्दपूर्ण बनाने में। पतिदेव ने ये शब्द थोड़ा थोड़ा शायद शादी के बाद ही सीखना शुरू किया😅 क्योंकि उनकी परम पूज्य माताजी ने इसकी परिभाषा सीखने का मौका ही नहीं दिया।
Liver disease can kill this baby girl without urgent help AdMIlaapInstant Term Life Insurance Quotes from over 30 companiesAdPKA InsuranceBollywood celebrities who belong to royal families!AdCRITICSUNIONHillary's Entire "Hit List" Just Went Public. You'll Never Guess Who's #1AdHSI OnlineCelebrities who belong to royal families!AdCRITICSUNIONTop 10 richest business families in the world 2018AdWIRAL GYANजब 164 स्काई डाइवर्स ने आसमां में रचा इतिहासNAVBHARATTIMESदेखें, फेक बोले कौवा काटे का 32वां ऐपिसोडNAVBHARATTIMESस्तन के नौ प्रकारNAVBHARATTIMESInstant Term Life Insurance Quotes from over 30 companiesAdPKA InsuranceRichest Cricketers in the world.AdCricUnion10 Richest Cricketers in the World right now.AdCricUnionDownload India’s leading free Portfolio Management SoftwareAdMPROFIT SOFTWARE PRIVATE LIMITED5 Unforgettable Underwater HotelsAdBooking.com9 Top Romantic Hotels In The World To ProposeAdBooking.com15 लाख बीयर की बोतलों से बना है यह अद्भुत मंदिरNAVBHARATTIMESइन 3 चीजों से वास्ता रखनेवालों का विनाश है निश्चितNAVBHARATTIMESविंडोज मोबाइल यूज करते हैं तो बदल लें, यह है वजहNAVBHARATTIMES
पीएम- देश में राजनैतिक जीवन की इतनी बदनामी हो गई कि डर लगता है कि इस लाइन में जाना ही नहीं चाहिए। देश के लिए आवश्यक है राजनीति में अच्छे विद्वान लोग आएं, तभी राजनैतिक जीवन समृद्ध होगा। महात्मा गांधी के आंदोलन में देश के हर इलाके से लोग आए उतनी ताकत ज़्यादा होगी। अगर आप राजनीति में आना चाहती हो तो आप में लीडरशिप क्वालिटी होनी चाहिए। आपके गांव में घटना होती है तो आप जाते हो न। जब तक अंदर से सहज भाव नहीं होगा, तब तक नहीं हो सकता। अगर अंदर से जिज्ञासा होगी तो देश खुद ब खुद तुम्हें लीडर बना देगा।
उन्हें ज़िम्मेदारी दो। अगर बच्चे अपने पैसे का उपयोग केवल वही चाहते हैं जो वे चाहते हैं, तो उन्हें शायद कठिन विकल्प नहीं लेना पड़ेगा। आप उनकी सभी जरूरतों के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। इसलिए उन्हें बस यह तय करना होगा कि कौन सा खिलौना, वीडियो गेम, या डिज़ाइनर जो भी वे चाहते हैं। लेकिन यदि आप उनमें से कुछ ऑनस डालते हैं तो आप उन्हें अधिक वित्तीय रूप से जिम्मेदार बनने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें साल के लिए बजट खर्च करने के अपने कपड़ों का हिस्सा दें, लेकिन उन्हें स्कूल की खरीदारी में अपनी पीठ के लिए ज़िम्मेदार बनाएं। अगर वे कुछ गलतियां करते हैं, तो उन्हें दो। वे इसे समझ लेंगे। और यह बेहतर है कि वे अब ऐसा करते हैं जब वे अपने बीसवीं सदी में डिजाइनर जींस की तुलना में बहुत अधिक हैं।

ध्यान दें जरा दुनिया में कोई भी पैरंट्स परफेक्ट नहीं होते। कभी यह न सोचें कि हम परफेक्टली बच्चों को हैंडल करेंगे तो वे गलती नहीं करेंगे। बच्चे ही नहीं, बड़े लोग भी गलती करते हैं। अगर बच्चे को कुछ सिखा नहीं पा रहे हैं या कुछ दे नहीं पा रहे हैं तो यह न सोचें कि एक टीचर या प्रवाइडर के रूप में हम फेल हो गए हैं। बच्चों के फ्रेंड्स बनने की कोशिश न करें क्योंकि वे उनके पास काफी होते हैं। उन्हें आपकी जरूरत पैरंट्स के तौर पर है। 
जब किसी किताब को पढ़ने बैठें तो उसे सरसरी निगाह से देखें। पुस्तक के लेखक-चित्रकार, प्रकाशन, मूल्य और किताब के प्रमुख चैप्टर और उसके शीर्षक को देखें फिर उसे विस्तार से पढ़ें। अपने काम से जुड़ी सामग्री को पढ़ना और वहाँ से मिलने वाले विचारों को जमीनी स्तर पर लागू करने की आदत आपको एक बेहतर क्रियान्वयन वाले लीडर के रूप में स्थापित कर सकती है। तो फिर लगातार पढ़ते रहिए, जीवन में नये विचारों को इस खिड़की से ताजी हवा के झोंकों की तरह आने दीजिए।

ओल्ड येलर या शिलाह के विकल्प के रूप में स्कूल में पढ़ी गई एक और कहानी यहां दी गई है। यह एक युवा लड़के की कहानी है जो अपने पैसे को बचाने और दो कोनहाउंड पिल्ले खरीदने के लिए कड़ी मेहनत करती है। वह उन्हें रेकूनों की तलाश करने के लिए प्रशिक्षित करता है, और कुत्तों के मानार्थ गुणों के साथ, वे ओज़ार्क में सबसे अच्छी शिकार टीम बन जाते हैं। यह एक लड़के और उसके कुत्तों, बढ़ने के बारे में और वफादारी के बारे में एक महान कहानी है। मैं इसे खत्म करने में खराब नहीं होगा, लेकिन अगर आपको अच्छी रोना चाहिए तो यह एक अच्छी किताब है।
दूसरी बात कि कुछ स्कूलों में मात्रा सिखाने का तरीका भी समस्याओं से ग्रस्त है, जिससे निजात पाने की जरूरत है। ताकि बच्चों को एक बोझिल कवायद से बचाया जा सके। जैसे किताब पढ़ने के लिए क, क पर बड़ी ई की मात्रा की, त, त पर आ की मात्रा ता, ब किताब। इस तरीके से किसी पाठ को पूरे प्रवाह और सहजता के साथ पढ़ने में बच्चों को दिक्कत होती है। लंबे-लंबे वाक्यों को पढ़ना तो बहुत परेशान करने वाला होता है।

सारे पैरंट्स की चाहत होती है कि वे अपने बच्चों को बेहतरीन परवरिश दें। वे कोशिश भी करते हैं, फिर भी ज्यादातर पैरंट्स बच्चों के बिहेवियर और परफॉर्मेंस से खुश नहीं होते। उन्हें अक्सर शिकायत करते सुना जा सकता है कि बच्चे ने ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया... इसके लिए काफी हद तक पैरंट्स ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि अक्सर किस हालात में क्या कदम उठाना है, यह वे तय ही नहीं कर पाते। किस स्थिति में पैरंट्स को क्या करना चाहिए और क्यों  : 
गर्मी शुरू होती है, समुद्र के लिए एक रोमांचक यात्रा आगे बढ़ती है, और कई माता-पिता इस सवाल में रुचि रखते हैं कि कब एक बच्चे को तैरना सिखाना है और क्या नहीं। अनुभवी प्रशिक्षकों के अनुसार, बच्चों को 4 से 6 साल की उम्र से पहले तैराकी नहीं सिखाई जा सकती है, और तब भी, यदि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि यह कैसे करना है। छोटे बच्चे बल्कि विभिन्न प्रकार के inflatable समर्थन साधनों का उपयोग करके सरल पानी के खेल। सबसे महत्वपूर्ण बात, पानी ने एक बच्चे में केवल सकारात्मक भावनाओं का कारण बना। तैराकी सिखाने का एक अयोग्य प्रयास इस तथ्य को जन्म दे सकता है कि बच्चा भयभीत हो जाएगा, और बाद में उसे तैराकी सिखाना असंभ

हायर एजुकेशन में यह बर्ताव बदलता है। वहां ज्यादा से ज्यादा दोस्ताना बर्ताव करना चाहिए। स्टूडेंट्स को जब लगेगा कि आप उनकी उम्र और भावनाओं को समझने वालों में से एक हैं तो न सिर्फ वे आपके कहने में रहेंगे, बल्कि जो सब्जेक्ट्स आप उन्हें पढ़ाएंगे उसमें उनकी दिलचस्पी भी बढ़ेगी। हालांकि कई बार टीचर्स का दोस्ताना बर्ताव किसी स्टूडेंट में आपको लेकर एक खास किस्म की निजी दिलचस्पी भी पैदा कर सकता है। महिला टीचर को लड़कों से और पुरुष टीचर को लड़कियों से ऐसे अनएक्सपेक्टेट अट्रैक्शन से दो-चार होना पड़ता है। स्टूडेंट्स के मन में ग्रोइंग एज में ऐसा लगाव पैदा होना बहुत स्वाभाविक है। इसलिए आप कोशिश करें कि पूरी क्लास से आपका बर्ताव एक जैसा हो। आमतौर पर इस तरह के आकर्षण जल्दी खत्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं।


5 तीमुथियुस, मसीह का ऐसा चेला था जिसने कम उम्र में ही यहोवा की सेवा करने का फैसला किया था। प्रेषित पौलुस ने उसके बारे में कहा कि ‘जब वह एक शिशु ही था’ तभी से परमेश्‍वर के वचन में दी सच्चाइयाँ सीखने लगा था। तीमुथियुस का पिता यहोवा का उपासक नहीं था, इसलिए उसकी माँ और नानी ने उसके दिल में परमेश्‍वर के वचन के लिए प्यार बढ़ाया। नतीजा, उसका विश्‍वास मज़बूत होता गया। (2 तीमु. 1:5; 3:14, 15) फिर जब वह करीब 20-22 साल का था, तब वह मंडली में खास ज़िम्मेदारियाँ लेने के योग्य बना।​—प्रेषि. 16:1-3.
पीएम- देश में राजनैतिक जीवन की इतनी बदनामी हो गई कि डर लगता है कि इस लाइन में जाना ही नहीं चाहिए। देश के लिए आवश्यक है राजनीति में अच्छे विद्वान लोग आएं, तभी राजनैतिक जीवन समृद्ध होगा। महात्मा गांधी के आंदोलन में देश के हर इलाके से लोग आए उतनी ताकत ज़्यादा होगी। अगर आप राजनीति में आना चाहती हो तो आप में लीडरशिप क्वालिटी होनी चाहिए। आपके गांव में घटना होती है तो आप जाते हो न। जब तक अंदर से सहज भाव नहीं होगा, तब तक नहीं हो सकता। अगर अंदर से जिज्ञासा होगी तो देश खुद ब खुद तुम्हें लीडर बना देगा।
- बच्चे का बैग रेग्युलर चेक करें, लेकिन ऐसा उसके सामने न करें। उसमें कोई भी नई चीज नजर आए तो पूछें कि कहां से आई? बच्चा झूठ बोले तो प्यार से पूछें। उसकी बेइज्जती न करें, न ही उसके साथ मारपीट करें। चीज लौटाने को कहें लेकिन पूरी क्लास के सामने माफी न मंगवाएं। बच्चा अगर पांच साल से बड़ा है, तब तो बिल्कुल नहीं। वह क्लास के सामने बोल सकता है कि यह चीज मुझे मिल गई थी।
अब आप ने सीख लिया है कि अंग्रेजी सीखने के लिए पहला स्टेप में क्या क्या करना है अब आप इन 26 अक्षर को अपने कॉपी पर लिख कर अभ्यास कीजिये, क्योंकि रोमन लिपि में बड़ी स्टाइलिश भाषा है, इसकी लिखाई के कुछ नियम हैं, इसके लिखने की चोराई कम-ज्यादा होती है आप इसे लिख कर अभ्यास कर लें, कि कौन-सा अक्षर 2,3 या 4 पंक्तियों में लिखा जाता है| पहले आप चार लाइन वाले इंग्लिश कॉपी पर अभ्यास कीजिये| 
×