टीचर को बच्चों से बेहद संजीदगी से बात करनी चाहिए। इससे बच्चे अनुशासित रहते हैं और उनमें आज्ञाकारिता बनी रहती है। बच्चों को हमेशा यह अहसास दिलाना जरूरी है कि उनकी शरारतों की जगह स्कूल नहीं है। उन्हें यह भी बताते रहना चाहिए कि उनके हिस्से का काम क्या है और कहां उन्होंने लिमिट क्रॉस की है। लेकिन ऐसा करते हुए बच्चे को मारने या बुरी तरह डांटने से बचना चाहिए। मार या तेज डांट से उसकी सायकॉलजी पर बुरा असर पड़ता है। टीचर को अपने इमोशंस और गुस्से पर कंट्रोल रखना आना चाहिए।

खुद पढने की शुरुवात करें: जितना जल्दी आप किताबें पढना शुरू करेंगी आपके बच्चे के लिए उतनी ही आसानी होगी। आप प्रेगनेंसी पीरियड में ही किताबें पढना शुरू कर सकती हैं या फिर नवजात बच्चे के जन्म के दो तीन महीने बाद भी। जब बच्चा छोटा होता है तो वह किताबें देखकर कुछ समझ तो नहीं पाता लेकिन अपनी माँ को पढ़ता देख वो पढने की कला सीखने लगता है। अच्छा रहेगा अगर आप शुरू से ही बड़े चित्रों वाली रंगीन किताबें बच्चे के सामने पढ़ें ऐसी किताबे छोटे बच्चों को बहुत ज्यादा आकर्षित करती हैं और इनमे मौजूद जानवरों और पक्षियों के चित्र देखकर बच्चे बहुत कुछ सीखने लग जाते हैं।
इस video में मैंने बच्चों को पढ़ाने का सही तरीका बताया है कि आप अपने बच्चों को किस प्रकार से पढ़ा सकते हैं ताकि उनका मन पढ़ाई में लगा रहे।बहुत से पेरेंट्स कहते हैं कि मेरे बच्चे का मन पढ़ने में नहीं लगता होमवर्क नहीं करता ना ही मेरा बच्चा मेरी बात मानता है तो उनके लिए मैंने ऐसे टॉप 10 तरीके निकाले है जिससे बच्चों को पढ़ने और लिखने में मन लग सके।मैं अपने चैंनल में बच्चों को पढ़ाने की विधि के बारे में बहुत सी video बना रखी है आप जरूर देखें।

तमिल में द्वि-अक्षरीय वर्गमाला होने के कारण गणेश को भी कणेश लिखा जाता है. गजेंद्रन, कजेंद्रन लिखे जात हैं. कमला व गमला की लिपि में कोई अंतर नहीं होता. वैसे ही तंगम शब्द जिसका संस्कृत में अर्थ सोना (स्वर्ण) होता है को तमिल भाषी अंग्रेजी मे Thangam लिखते हैं और वहीं हिंदी में थंगम हो जाता है. इसी तरह तंगराज (स्वर्णराज) हिंदी में थंगराज हो जाता है. त थ व ट ठ के लिए प्रयुक्त अंग्रेजी वर्ण तामिल भाषियों के लिए Th, Thh  एवं T, Tth हैं. इसलिए उन्हे वापस अपनी भाषा में अनुवाद करने में कोई तकलीफ नहीं होती. हिंदी भाषी इन दोनों अक्षरयुग्मों के लिए T & Th  ही प्रयोग करते हैं. वर्ण विशेष के लिए विशेष प्रावधान न होने की वजह से लौटकर हिंदी में अनुवाद करने में गलतियाँ हो जाती हैं. इसलिए हिंदी भाषियों को व उसी तरह अन्य भाषा भाषियों को चाहिए कि भाषान्तर के लिए वर्ण विशेष लिपि को अपनाएं. ताकि भाषान्तरण के वक्त गलतियाँ न हो. उदाहरण के लिए प्रस्तुत निम्न शब्दों पर जरा गौर कीजिए-
9. दूसरे बच्चों से मारपीट करे तो... कई पैरंट्स इस बात पर बहुत खुश होते हैं कि उनका बच्चा मार खाकर नहीं आता, बल्कि दूसरे बच्चों को मारकर आता है और वे इसके लिए अपने बच्चे की तारीफ भी करते हैं। दूसरे लोग शिकायत करते हैं तो उलटा पैरंट्स उनसे लड़ने को उतारू हो जाते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता। कुछ मांएं कहती हैं कि तुम दूसरे बच्चों को मारोगे तो इंजेक्शन लगवा दूंगी, टीचर से डांट पड़वा दूंगी या झोलीवाला बाबा ले जाएगा। थोड़े दिन बाद बच्चा जान जाता है ये सारी बातें झूठ हैं। तब वह और ज्यादा पीटने लगता है। 
डाईट पंचकूला से आए विषय विशेषज्ञों ने शिक्षकों को नए-नए गुर सिखाएं। ताकि बच्चों को और अधिक रोचक विधि से पढ़ाया जाए। वर्कशॉप के दौरान सभी स्कूल अध्यापकों ने भी पढ़ाई को रोचक बनाने के अपने-अपने गुर एक दूसरे से सांझा किए। इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी अंजू ग्रोवर ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। शिविर में शिक्षक राजेश भंवरा, बलदेव, ब्रीज किशोर, गोपीचंद, अमरनाथ, रवि दत्त आदि अध्यापकों ने अपने विचार भी सांझा किए।
आजकल तो घर घर में computer है. बच्चे को computer के माध्यम से पढ़ाने, नई चीज़ें सिखाने की कोशिश करें. Computer पर कई तरह games भी आती हैं, जिनमे बच्चों को खेल खेल में पढ़ाया जाता है. उनकी मदद से आप बच्चे को पढ़ा सकते हैं. आजकल ज़्यादातर school के chapters की books में उनकी CD साथ में ही आती है. उस CD को computer के माध्यम से बच्चे को दिखाएँ. देखी गई चीज़ें जल्दी याद होती हैं, और रुचि भी बनी रहती है. आपके बच्चे को इससे निश्चित रूप से फ़ायदा होगा.
गर्मी शुरू होती है, समुद्र के लिए एक रोमांचक यात्रा आगे बढ़ती है, और कई माता-पिता इस सवाल में रुचि रखते हैं कि कब एक बच्चे को तैरना सिखाना है और क्या नहीं। अनुभवी प्रशिक्षकों के अनुसार, बच्चों को 4 से 6 साल की उम्र से पहले तैराकी नहीं सिखाई जा सकती है, और तब भी, यदि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि यह कैसे करना है। छोटे बच्चे बल्कि विभिन्न प्रकार के inflatable समर्थन साधनों का उपयोग करके सरल पानी के खेल। सबसे महत्वपूर्ण बात, पानी ने एक बच्चे में केवल सकारात्मक भावनाओं का कारण बना। तैराकी सिखाने का एक अयोग्य प्रयास इस तथ्य को जन्म दे सकता है कि बच्चा भयभीत हो जाएगा, और बाद में उसे तैराकी सिखाना असंभ

ब्याज के बारे में स्पष्ट रहें। क्रेडिट कार्ड के मामले में यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें क्रेडिट कार्ड बिलों पर ब्याज शुल्क दिखाएं। मैंने अपने कुछ पुराने क्रेडिट कार्ड बिलों को बचाया है - उन दिनों से जब मैं संतुलन लेना चाहता था - मेरे बेटे को बड़ा होने पर दिखाने के लिए। ध्यान दें कि ब्याज कोई वापसी मूल्य प्रदान नहीं करता है। यह सब किसी और को अमीर बना देता है। इंगित करें कि क्रेडिट कार्ड किसी और के पैसे का प्रतिनिधित्व करते हैं, और यही कारण है कि उन्हें हर महीने अपने शेष राशि का भुगतान करना चाहिए। भले ही आपको अपने बच्चे को क्रेडिट कार्ड नहीं मिलता है, फिर भी यह सिखाने के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। कौन जानता है कि वह बाद में क्या करेगा।
गर्मी शुरू होती है, समुद्र के लिए एक रोमांचक यात्रा आगे बढ़ती है, और कई माता-पिता इस सवाल में रुचि रखते हैं कि कब एक बच्चे को तैरना सिखाना है और क्या नहीं। अनुभवी प्रशिक्षकों के अनुसार, बच्चों को 4 से 6 साल की उम्र से पहले तैराकी नहीं सिखाई जा सकती है, और तब भी, यदि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि यह कैसे करना है। छोटे बच्चे बल्कि विभिन्न प्रकार के inflatable समर्थन साधनों का उपयोग करके सरल पानी के खेल। सबसे महत्वपूर्ण बात, पानी ने एक बच्चे में केवल सकारात्मक भावनाओं का कारण बना। तैराकी सिखाने का एक अयोग्य प्रयास इस तथ्य को जन्म दे सकता है कि बच्चा भयभीत हो जाएगा, और बाद में उसे तैराकी सिखाना असंभ
पंजाब में आधा अक्षर की सुविधा नहीं होने की वजह से वे आधे अक्षर का प्रयोग करना सम्मत नहीं पाते इसलिए पूरा अक्षर ही लिखते हैं. धर्मेंद्र को वे धरमिंदर कहना या लिखना पसंद करेंगे. उनके लिहाज से वह सही है किंतु हिंदी भाषी के लिहाज से वह सही तो नहीं ही है. जो लोग कमोबेश हिंदी के अर्धाक्षरों से वाकिफ हैं वे भी क्लब को कल्ब लिखने की गलती कर जाते हैं. शब्दों में अक्षरों का भी हेर फेर होता देखा गया है जैसे मुसाफिर को मुफासिर कह जाते हैं. यह गलती अक्सर चार –पाँच अक्षरों वाले शब्दों में ही पाई जाती है.

परन्तु मेरा अनुभव यह भी कहता है – बच्चे को किसी भी वर्ण या मात्रा से परिचय कराने से पूर्व, उस वर्ण या मात्रा का कम से कम पाँच – पाँच शब्दों को सचित्र दोस्ती करवाया जाय | ऐसा करने से बच्चा सरलता और सहजता से याद तो करेगा ही साथ ही उसका शब्द भंडार भी बढ़ेगा | उदाहरन के लिए – क सिखाने से पहले बच्चों को चित्र के साथ घरेलू वस्तुयों से परिचय करवाएं – कटोरी , कडाही , कलछुल , कद्दू ,कलम , यह सारे शब्द ऐसे हैं जिन्हें बच्चा अपने घर में प्रतिदिन देखता है |
छोटे बच्चों को अक्सर पेट खराब होता है। दस्त के कारण बहुत भिन्न हो सकते हैं, आपको गंभीर बीमारियों से अपेक्षाकृत सुरक्षित, आसानी से ठीक होने वाले पाचन विकारों में भेद करने में सक्षम होने की आवश्यकता होती है, जिन्हें तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। शिशुओं में मल की आवृत्ति काफी एक व्यक्तिगत संकेतक है। कुछ शिशुओं के लिए और प्रति दिन लगभग दस मल त्याग सामान्य माना जाता है। 2-3 दिनों के लिए कुर्सी की देरी भी हमेशा एक गंभीर बीमारी का संकेत नहीं है। शिशुओं में दस्त के मुख्य लक्षण निम्नानुसार हैं: बच्चा अचानक डायपर को अधिक बार मिट्टी देना शुरू कर देता है, मल की स्थिरता एक तरल और पानी वाले में
बच्चों को दिलचस्प तरीके से पढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि आप को यह पता होना चाहिए कि बच्चों की दिलचस्पी किस चीज में है। कुछ बच्चे कार्टून देखते हैं। उसमें भी निंजा हथौड़ी, डोरेमॉन, शिनचैन, छोटा भीम से लेकर बेन टेन, पॉकेमोन और बेब्लेड जैसे विविधताओं से भरे कार्टून होते हैं। कुछ बच्चों को सुपरहीरो वाली फिल्में पसन्द आती है तो कुछ को धूम और रोबोट वाली। कुछ बच्चे क्रिकेट देखना/खेलना पसंद करते हैं तो कुछ फुटबॉल या कोई अन्य खेल। वहीं कुछ बच्चे रचनात्मक होते हैं और कुछ न कुछ बनाते रहते हैं। बच्चों की अलग अलग पसन्द का ज्ञान होना अभिभावक और अध्यापक दोनों के लिए आवश्यक है।
वास्तव में, मूल बातें शुरू करना एक अच्छा विचार है। उस समय, गेविन इस तथ्य को समझ नहीं पाए थे कि चार तिमाहियों में एक डॉलर बराबर है। लेकिन उन्हें पता था कि हमें चीजों को खरीदने के लिए पैसे चाहिए। और हमने पैसे के लिए अन्य उपयोगों के बारे में उसे पढ़कर अपने क्षितिज का विस्तार करने की कोशिश की। ऐसा करने के लिए, हमने लिफाफे को अपने बड़े (हाल ही में खाली) मनी जार में रखा:
 • Decisive: जब हम अपने घर से दूर होते हैं हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े छोटे छोटे फैसले लेने में सहयोगी साबित होता है हमारे घर से हमारा दूर रहना। क्या चीज़ का सही दाम कितना है और पैसों की अहमियत झट से समझ आ जाती है जो कभी घर पर समझ नहीं आयी थी। महँगे कपड़ों की जिद्द करना भूल गयी मैं,हॉस्टल से जाने के बाद। पतिदेव भी decisive हैं,लेकिन केवल कुछ मुद्दों में। बाकी हमारी सासु माँ से एक बार डिसकस किये बिना उन्हें चैन नहीं पड़ता चाहे वो घर में कोई सामान लाने की बात ही क्यों ना हो।

 2 कुछ सर्किट निगरानों ने गौर किया है कि 18 से 22 की उम्र के कई नौजवानों ने अभी तक बपतिस्मा नहीं लिया है, जबकि उनकी परवरिश सच्चाई में हुई है। इनमें से ज़्यादातर नौजवान सभाओं में आते हैं, प्रचार में जाते हैं और खुद को यहोवा का साक्षी मानते हैं। फिर भी, किसी वजह से उन्होंने यहोवा को अपना जीवन समर्पित नहीं किया और बपतिस्मा नहीं लिया। कुछ मामलों में देखा गया है कि माता-पिताओं को लगता है कि उनके बच्चे अभी बपतिस्मा लेने के लिए तैयार नहीं। इस लेख में हम उन चार चिंताओं पर गौर करेंगे जिनकी वजह से कुछ माता-पिता अपने बच्चों को बपतिस्मा लेने का बढ़ावा नहीं देते।
नैतिक विकास में रीति – रिवाजो, प्रथाओं, परम्पराओं एवं कानूनों का अति महत्वपूर्ण स्थान होता है लेकिन जब बच्चा छोटा होता है तो उसे सामाजिक परम्पराओं के अनुसार नैतिक आचरणों की जानकारी नहीं होती है | ऐसे में आप बच्चों को खेलों के माध्यम से नैतिक मूल्यों की शिक्षा दे सकते है | जब बच्चा खेलते समय अपने साथी समूहों के बच्चों की बात नहीं मानता है तो उसपर चीखे – चिल्लाए नहीं बल्कि प्यार से समझाएं |
9. दूसरे बच्चों से मारपीट करे तो... कई पैरंट्स इस बात पर बहुत खुश होते हैं कि उनका बच्चा मार खाकर नहीं आता, बल्कि दूसरे बच्चों को मारकर आता है और वे इसके लिए अपने बच्चे की तारीफ भी करते हैं। दूसरे लोग शिकायत करते हैं तो उलटा पैरंट्स उनसे लड़ने को उतारू हो जाते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता। कुछ मांएं कहती हैं कि तुम दूसरे बच्चों को मारोगे तो इंजेक्शन लगवा दूंगी, टीचर से डांट पड़वा दूंगी या झोलीवाला बाबा ले जाएगा। थोड़े दिन बाद बच्चा जान जाता है ये सारी बातें झूठ हैं। तब वह और ज्यादा पीटने लगता है। 
बच्चे गीली मिट्टी की भांति होते हैं। जिस ढांचे में आप उसे शुरू से ढालेंगे, वो वैसा ही रूप धरेगा। अत: उनको शुरू से ही हर जर्रे के प्यार से रूबरू कराएं। उसे यह सिखाना जरूरी है कि दुनिया में सबसे प्यार करो, तो सब तुम्हें प्यार ही देंगे । बड़ों का आदर करना सिखाइए और आप भी ऐसा करें, ताकि आपको देखकर वे अच्छी बातें सीखें। याद रखिए यदि नींव अच्छी होगी, तो ही भवन मजबूत रह सकेगा।
9. दूसरे बच्चों से मारपीट करे तो... कई पैरंट्स इस बात पर बहुत खुश होते हैं कि उनका बच्चा मार खाकर नहीं आता, बल्कि दूसरे बच्चों को मारकर आता है और वे इसके लिए अपने बच्चे की तारीफ भी करते हैं। दूसरे लोग शिकायत करते हैं तो उलटा पैरंट्स उनसे लड़ने को उतारू हो जाते हैं कि हमारा बच्चा ऐसा नहीं कर सकता। कुछ मांएं कहती हैं कि तुम दूसरे बच्चों को मारोगे तो इंजेक्शन लगवा दूंगी, टीचर से डांट पड़वा दूंगी या झोलीवाला बाबा ले जाएगा। थोड़े दिन बाद बच्चा जान जाता है ये सारी बातें झूठ हैं। तब वह और ज्यादा पीटने लगता है। 

कई पैरेंट्स में पेशंस की बहुत कमी होती है। बच्चे ने अगर एक बार कुछ याद न किया तो उन्हें जबरदस्ती डांट फटकार लगाकर या कभी-कभी तो याद कराने के लिए उन पर जोर देते हैं और जरूरत पड़ने पर उन पर हाथ तक उठा देते हैं। ऐसा करना न केवल आपके लिए नुकसानदायक है बल्कि आपके बच्चे के लिए भी उतना ही कष्टदायक है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मारने-डाटने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रोष पैदा होता है और मार के डर से उसे जितना भी याद है वो भी भूल जाता है। ऐसे में बच्चों को प्यार से ही पढ़ाने की कोशिश करें।


कई टीचर्स मानते हैं कि छोटे बच्चों पर पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर ना डाला जाए। क्योंकि इस समय उनका माइंड डेवलप हो रहा है, ऐसे में वे जितना पढ़ें उन्हें उतना ही पढ़ाना चाहिए। अपने प्यारे छोटे बच्चों को दिनभर में पढ़ाने के लिए सिर्फ एक घंटा ही काफी है। इस दौरान ध्यान रहे कि शोर-शराबा ना हों। इससे ज्यादा देर पढ़ाएंगे, तो हो सकता है कि याद किया हुआ भी सब भूल जाएं। इसलिए एक घंटे के बीच में भी 5 -5 सैकंड का ब्रेक ले लें।
बतौर पाठक अपना खुद का मूल्यांकन करने के लिए आप सोच सकते हैं कि पिछले एक साल में आपने कितनी किताबें पढ़ीं? कितनी किताबों का चुनाव आपने स्वेच्छा से अपनी रूचि के अनुसार किया? कितनी किताबों को आपके मन में पढ़ने की इच्छा हुई, लेकिन आपने उस किताब को खरीदना या किसी दोस्त से लेना आगे के लिए टाल दिया। कई बार ऐसा भी होता है कि पुस्तक मेले या पियर प्रेसर में आप कई किताबें खरीद लाते हैं, लेकिन फिर वे किताबें पड़ी-पड़ी धूल फांकती हैं या फिर आलमारी की शोभा बढ़ाती हैं। उनसे बतौर सक्रिय पाठक आपकी मुलाकात नहीं होती है। पढ़ने के लिए एक प्रेरणा और मोबाइल फोन व अन्य संचार-मनोरंजन के व्यवधान से आजादी चाहिए होती है, क्योंकि ये चीज़ें आपका ध्यान पढ़ने से हटा लेती हैं। फिर पढ़ने का प्रवाह टूट जाता है और दोबारा उस किताब की तरफ बड़ी मुश्किल से लौटना होता है।
सहेजा जा रहा है। हमने अपने बच्चों को एक छोटी उम्र में उन चीज़ों को बचाने के महत्व को समझाया जो वे चाहते थे। हमने गैर-मौद्रिक पाठों का उपयोग करके इसे समझाया। उदाहरण के लिए, हमने थोड़ी देर के लिए टीवी कूपन का इस्तेमाल किया। जब गेविन ने व्यवहार किया, तो उन्होंने टीवी देखने के लिए एक कूपन अर्जित किया। हमने प्रत्येक फिल्म को अपने संग्रह में लंबाई से संबंधित एक संख्या में असाइन किया। शो देखने के लिए उन्हें कई कूपन चाहिए। तो जब वह एक चार कूपन फिल्म द इनक्रेडिबल्स देखना चाहता था, तो उसने उस कूपन पर पकड़ने का फैसला किया जिसे वह पहले से ही उस फिल्म के लिए पर्याप्त कमाई कर रहा था। एक बार यह आदत स्थापित हो जाने के बाद, हमने समझाया कि पैसे बचाने से वैसे ही काम किया जाता है। और हमने उसे अपने पैसे जार में बचाने के लिए एक लिफाफा दिया। आखिरकार, हम उस पैसे को एक बचत खाते में अच्छी ब्याज दर के साथ स्थानांतरित कर देंगे।
जी! मैं एक छोटे कस्बे से तालुक्क रखती हूं तो मुझे स्कूल खत्म करते ही आगे की पढ़ाई के लिए घर छोड़कर बाहर हॉस्टल में रहना पड़ा। बहुत मुश्किल था वो समय मेरे लिए। खास तौर पर माँ के बिना रहना। मेरी उन् आदतों का क्या होगा जो कभी उसने सुधारी ही नहीं,मेरे बाल बनाना,रोज़ की मेरी स्कूल के किस्से सुनना, आते ही निम्बू पानी देना,बालों में तेल डालना और ना जाने क्या क्या। ये सब तो मुझे उससे जोड़े रखता है,वहां हॉस्टल में कौन करेगा ये सब। शुरू में कठिन था लेकिन आज सोचती हूँ तो लगता है, उन 7 सालों में ली कितनी सीख आज मेरे जीवन को कितना सरल और सुलझी हुई बनाती है।
बच्चे का बैग रेग्युलर चेक करें, लेकिन ऐसा उसके सामने न करें। उसमें कोई भी नई चीज नजर आए तो पूछें कि कहां से आई? बच्चा झूठ बोले तो प्यार से पूछें। उसकी बेइज्जती न करें, न ही उसके साथ मारपीट करें। चीज लौटाने को कहें लेकिन पूरी क्लास के सामने माफी न मंगवाएं। बच्चा अगर पांच साल से बड़ा है, तब तो बिल्कुल नहीं। वह क्लास के सामने बोल सकता है कि यह चीज मुझे मिल गई थी। 

टीचर को बच्चों से बेहद संजीदगी से बात करनी चाहिए। इससे बच्चे अनुशासित रहते हैं और उनमें आज्ञाकारिता बनी रहती है। बच्चों को हमेशा यह अहसास दिलाना जरूरी है कि उनकी शरारतों की जगह स्कूल नहीं है। उन्हें यह भी बताते रहना चाहिए कि उनके हिस्से का काम क्या है और कहां उन्होंने लिमिट क्रॉस की है। लेकिन ऐसा करते हुए बच्चे को मारने या बुरी तरह डांटने से बचना चाहिए। मार या तेज डांट से उसकी सायकॉलजी पर बुरा असर पड़ता है। टीचर को अपने इमोशंस और गुस्से पर कंट्रोल रखना आना चाहिए।
रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेना: आपके बच्चों की स्मरण शक्ति को बेहतर करने के लिए उनमें सीखने की क्षमता का विकास होना भी जरूरी है। पहेलियां सुलझाना, याद रखने की क्षमता जांचने वाले खेल खेलना, रचनात्मक कला का निर्माण,  प्रसंग आधारित गतिविधियां इत्यादि से बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का विकास होता है और साथ ही वे अपने मस्तिष्क की शक्ति का इस्तेमाल करना भी सीखते हैं। जितना ज्यादा वे अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करना सीखेंगे उतना ही उनकी स्मरण शक्ति बेहतर होगी।
नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने-आप साइट पर लाइव होते हैं। हमने फिल्टर लगा रखे हैं ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द या कॉमेंट लाइव न होने पाएं। लेकिन अगर ऐसा कोई कॉमेंट लाइव हो जाता है जिसमें अनर्गल व आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, गाली या भद्दी भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है, तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुनें और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते हुए उसे जल्द से जल्द हटा देंगे।
एक टीचर की सबसे बड़ी खासियत स्टूडेंट्स को इंगेज कर पाने की उसकी क्षमता है। जो टीचर पढ़ाते हुए स्टूडेंट्स को इंगेज कर पाते हैं, सब्जेक्ट के प्रति प्रेम पैदा कर पाते हैं, उसमें आगे बढ़ने और एक्सप्लोर करने के लिए बच्चों को उकसा पाते हैं, उनके लिए पढ़ाना आनंददायक काम साबित होता है। खुद स्टूडेंट्स ऐसे टीचर से बहुत दूर तक जोड़े रहते हैं और उनके कहे पर अमल भी करते हैं। अगर टीचर इंगेज नहीं कर पाते तो यह उनकी सबसे बड़ी नाकामी है।
प्राइमरी क्लासेस में टीचर बच्चों पर निगाह रखते हैं। उनकी हर हरकत पर ध्यान रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसी उम्र में वे बहुत-सी अच्छी-बुरी आदतें सीखते हैं। ऐसे में उनसे सीधे बातचीत की दरकार होती है। इस सिलसिले में बच्चों से बहुत सीधा रिश्ता रखना चाहिए। उनकी घरेलू परिस्थितियों का भी पता रखना चाहिए। इससे बच्चों की गलती और उसके कारण को समझने में ही नहीं, बल्कि उन गलतियों से बच्चों को दूर रखने में भी मदद मिलती है।
बच्चे का पूर्ण विकास और स्वास्थ्य कई कारकों को निर्धारित करता है: एक सुव्यवस्थित दैनिक दिनचर्या, एक संतुलित आहार, साथ ही साथ शारीरिक गतिविधि और सकारात्मक भावनाएं। एक नवजात शिशु स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित करने में असमर्थ है। इसलिए, मालिश करना इतना आवश्यक है, जो मांसपेशियों और शरीर की अन्य प्रणालियों को मजबूत करने में मदद करता है। अनुदेश 1 निवारक मालिश लगभग हर स्वस्थ बच्चे के लिए संकेत दिया जाता है। यह शरीर के पूर्ण विकास को बढ़ावा देता है। माता-पिता इस मालिश को अपने दम पर कर सकते हैं या पेशेवर मदद ले सकते हैं। आप एक बाल रोग विशेषज्ञ के परामर्श के बाद डेढ़ से दो महीने की उम्र के पहले से ही स्वस्
बतौर पाठक अपना खुद का मूल्यांकन करने के लिए आप सोच सकते हैं कि पिछले एक साल में आपने कितनी किताबें पढ़ीं? कितनी किताबों का चुनाव आपने स्वेच्छा से अपनी रूचि के अनुसार किया? कितनी किताबों को आपके मन में पढ़ने की इच्छा हुई, लेकिन आपने उस किताब को खरीदना या किसी दोस्त से लेना आगे के लिए टाल दिया। कई बार ऐसा भी होता है कि पुस्तक मेले या पियर प्रेसर में आप कई किताबें खरीद लाते हैं, लेकिन फिर वे किताबें पड़ी-पड़ी धूल फांकती हैं या फिर आलमारी की शोभा बढ़ाती हैं। उनसे बतौर सक्रिय पाठक आपकी मुलाकात नहीं होती है। पढ़ने के लिए एक प्रेरणा और मोबाइल फोन व अन्य संचार-मनोरंजन के व्यवधान से आजादी चाहिए होती है, क्योंकि ये चीज़ें आपका ध्यान पढ़ने से हटा लेती हैं। फिर पढ़ने का प्रवाह टूट जाता है और दोबारा उस किताब की तरफ बड़ी मुश्किल से लौटना होता है।
कॉम्पिटिशन के इस दौर में आजकल हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा सबसे तेज बने। इसके लिए वे बच्चे को 2-3 साल में ही प्ले स्कूल में डाल देते हैं। इसके बाद पैरेंट्स की हसरत होती है कि उनका बच्चा जल्द से जल्द लिखना व पढ़ना सीखे। लिखना पढ़ाई की सबसे पहली कड़ी है और जरूरी नहीं कि हर बच्चा आसानी से लिखना सीख जाए। ऐसी स्थिति में कई बार अभिभावक बच्चे पर दबाव भी डालते हैं, लेकिन इसका परिणाम सकारात्मक नहीं आता। आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप अपने लाडले को लिखना सिखा सकते हैं।
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