प्रिय मित्रों , हिंदीकुंज में रंगराज अयंगर द्वारा विरचित - राजभाषा हिंदी शृंखला की समापन कड़ी के रूप में 13 वीं कड़ी, लेख के रूप में - बोलना, पढ़ना और लिखना - प्रेषित है. इन लेखों के माध्यम से अयंगर जी ने ,हिंदी राज भाषा को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा है और अपने बहुमूल्य सुझाव भी दिए है . यदि इनके माध्यम से हिंदी प्रेमियों , साहित्य विधार्थी ,अध्यापकजन व हिंदी के माध्यम से जीविका चलाने वालों को किसी प्रकार का लाभ पहुँचता है , तो अयंगर जी का श्रम सार्थक सिद्ध होगा . आप साथ ही अपने सुझाव भी प्रकट करें ,जिससे लेखक का उत्साहवर्धन हो .
‘स्पाइसटून्स’ की रोचकता और अनोखापन देखते हुए विश्वप्रसिद्ध कंपनी ब्रिटेनिया में इसमें रुचि दिखाई और उनके ब्रिटेनिया जिमजैम के समर्थन से इसी वर्ष फरवरी में इसे लाँच किया गया। जल्द ही इस गेम न प्रसिद्धी के शिखर को छुआ और वर्तमान में रोजाना 500 से अधिक खिलाड़ी इस आॅनलाइन खेल का लुत्फ उठा रहे हैं। पहले पांच हफ्तों के दौरान ही 25 हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं ने इनमें रुचि दिखाई और आने वाले 15 महीनों में वे इसे 6 गुना से अधिक करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। वर्तमान में इसे केवल कंप्यूटर के माध्यम से ही खेला जा सकता है लेकिन जल्द ही इसका मोबाइल संस्करण भी प्रशंसकों के लिये उपलब्ध होगा।
आपके बच्चे में अच्छी आदतों का होना बहुत जरुरी है, क्योंकि ये आपके बच्चे को एक बेहतर इंसान बनने में मदद करता है। हमारे बड़े-बुजुर्ग हमें बचपन में कई अच्छी आदतें सिखाते हैं और हमारी जिम्मेदारी बनती हैं की हम अपनी उन अच्छी आदतों को अपने बच्चों को भी दें। कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिनको आपको अपने बच्चे को बचपन में ही सिखा देनी चाहिए, ये वैसी आदतें होती हैं जो हमेशा और हर उम्र में आपके बच्चे के साथ रहती हैं। कुछ आदतें बच्चों के अंदर बचपन में ही पनपने लगते हैं और इसीलिए माता-पिता की यह जिम्मेदारी बनती है की वह अपने बच्चे को छोटी-छोटी बातें सिखाना शुरू कर दें। जानें वह कौन सी आदतें हैं जो आपको अपने बच्चे को जरूर सिखानी चाहिए।

एक उदाहरण के माध्यम से बात करते हैं। किसी स्कूल में  पहली कक्षा के बच्चों ने ‘ई’ की मात्रा सीखी। अगर इसी दिन ‘ऐ’ और’औ’ की मात्राओं के बारे में भी बच्चों को बताया जाये तो क्या होगा? इस बात की ज्यादा संभावना है कि बच्चों ने जो नई मात्रा सीखी है उसके अभ्यास का कम मौका मिलेगा। नई लर्निंग को समझ का हिस्सा बनने के लिए अभ्यास का जो अवसर बच्चों को मिलना चाहिए, वह शायद नहीं मिल पाएगा।

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शबनम के बेटे को बुलंदशहर के रहने वाले पत्रकार उस्मान सैफी और उनकी पत्नी वंदना ने गोद ले लिया था। अमरोहा की बाल कल्याण समिति वहां जाकर उनके बच्चे का हाल-चाल लेती है। उस्मान ने कहा कि एक बार उसने शबनम और सलीम की तस्वीर देखी तो पूछा कि मां के साथ कौन है। उन्होंने उससे कहा कि वह उसके अंकल है। उन्होंने बताया कि वे लोग बच्चे के कुछ नहीं बताते हैं लेकिन पता नहीं कब तक सच छिपा पाएंगे।
आजकल तो घर घर में computer है. बच्चे को computer के माध्यम से पढ़ाने, नई चीज़ें सिखाने की कोशिश करें. Computer पर कई तरह games भी आती हैं, जिनमे बच्चों को खेल खेल में पढ़ाया जाता है. उनकी मदद से आप बच्चे को पढ़ा सकते हैं. आजकल ज़्यादातर school के chapters की books में उनकी CD साथ में ही आती है. उस CD को computer के माध्यम से बच्चे को दिखाएँ. देखी गई चीज़ें जल्दी याद होती हैं, और रुचि भी बनी रहती है. आपके बच्चे को इससे निश्चित रूप से फ़ायदा होगा.
ऐसे में पहली कक्षा के जो बच्चे अभी अपनी समझ पुख्ता करने की कोशिश में हैं उनको कम प्रयास करने का मौका मिलता है। साथ ही साथ शिक्षक पहली कक्षा के हर बच्चे तक नहीं पहुंच पाते, जो इस स्तर के बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। इसी मसले पर मैंने बात की पहली-दूसरी कक्षा के बच्चों को हिंदी भाषा में पढ़ना-लिखना कैसे सिखाया जाए इस मुद्दे पर अच्छी पकड़ रखने वाले जितेंद्र कुमार शर्मा से।
जैसे-जैसे बच्चा बड़े हो जाता है, उसे यह अनुमान लगाने के लिए कहें कि अब इस  कहानी में क्या होगा। उन्हें यह भी अनुमान लगाने के लिए कहें कि कहानी में एक विशेष कैरेक्टर एक विशेष तरीके से व्यवहार क्यों करती है। अगर ये प्रश्न कहानी के प्रवाह को तोड़ने लगते हैं तो चिंता मत करो। क्योंकि बच्चो को कहानी में दिलचस्पी लाने के लिए उन्हें अनुमान पूछना इंटरेस्टेड होता है।
धर्मेंद्र ऐसे में कहते हैं कि वह गांव वालों की जिंदगी बसरकर रहे हैं। धर्मेंद्र के हाथों में थाली है जिसमें सूखी मेथी दिखाई देती है। धर्मेंद्र बताते हैं कि ये सूखी मेथी तोड़ कर सुखाई है। फिर इसके पराठे बनेंगे और दही के साथ खाएंगे। इस वीडियो को देख कर धर्मेंद्र के फैन्स कहते नजर आ रहे हैं कि इस उम्र में भी इतने फिट धर्मेंद्र की सेहत का राज है कि वह प्योर चीजें खातें हैं।
• Self Dependence : अपने कपड़े खुद धोना,बालों में तेल लगाना,अपनी फीस का काम बैंक में जाकर खुद करना,अपनी खाने पीने की व्यवस्थाओं का ध्यान रखना,साफ सफाई यहां तक कि नए नए दौर में जब आपके ज़्यादा दोस्त नहीं बने होते तब अपनी तबियत का ख्याल भी खुद ही रखना होता था। अपना काम खुद करने की एक बुरी सी आदत डाल दी थी होस्टल नें जो आज भी कमबख्त पीछा नहीं छोड़ती। सही सोचा अपने...पतिदेव बिल्कुल विपरीत... अपने हर छोटे मोटे काम के लिए हम पर निर्भर। पहले माँ और अब मैं। अगर मैं रात को बाथरूम में उनके कपड़े रखना भूल जाऊँ तो आफिस के लिए लेट होने का इल्ज़ाम मुझ पर। मेरे बहुत कोशिश करने पर अब उनमे थोड़े बहुत बदलाव आए हैं पर फिर भी हर छोटी ज़रूरत के लिए किसी को पूछना पड़ता है... कारण...आदत। जी बचपन से बिना कहे ही जब काम हो जाये तो बात ही क्या और इसका पूरा श्रेय मेरी सासु माँ को जाता है।
दोस्तों बच्चो को किताबो से ज्यादा कम्प्यूटर या tv के माध्यम से पढ़ना पसंद आता है।  इसलिए आप अपने बच्चो के लिए एजुकेशनल डीवीडी खरीदे ओर से एजुकेशनल tv शो दिखाएं। आप किसी मैगजीन से पिक्चर्स को कट कर सकते है और उन शब्दों के साथ एडजस्ट कर सकते है तो कंप्यूटर भी सीखने के लिए अच्छा हैं।  लेकिन आपको वेबसाइटों को समझदारी से चुनना होगा। या आप अपने आसपास की लाइब्रेरी से सहायता ले सकते है।
कई पैरंट्स सीधे टीवी या कंप्यूटर ऑफ कर देते हैं। कई रिमोट छीनकर अपना सीरियल या न्यूज देखने लगते हैं। इसी तरह कुछ मोबाइल छीनने लगते हैं। कुछ इतने बेपरवाह होते हैं कि ध्यान ही नहीं देते कि बच्चा कितनी देर से टीवी देख रहा है या गेम्स खेल रहा है। कई बार मां अपनी बातचीत या काम में दखलंदाजी से बचने से लिए बच्चों से खुद ही बेवक्त टीवी देखने को कह देती हैं।

इन सभी कार्यो के साथ बच्‍चों को उनकी कक्षा की दिनचर्या से परिचित कराएं। यहां सबसे आवश्‍यक बात यह है कि अभिभावक व शिक्षक स्कूल के शुरूआती दिनों में ही बच्चों को “अ” से “ज्ञ” तक पढ़ाने का प्रयास न करें बल्कि उन्‍हें इसके लिए समय दें ताकि वे इसे समझ सकें और फिर सीख सकें कहानी सुनाने के लिए चित्रों वाली किताब का उपयोग करें और बच्चों की जिज्ञासा का जवाब देने की कोशिश करें।
अगर आपके पास भी कंप्यूटर या इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स या कोई टेक्निकल ज्ञान या नोट्स है तो आप इस साईट पर पब्लिश करवा सकते है | अगर आप कोई ब्लॉग या वेबसाइट या कोई YouTube चैनल इत्यादि चलाते है तो उसका लिंक इस साईट में add करवा कर उसे Promote करवा सकते है | नोट: यह सीखने और सिखाने के लिए मुफ्त संस्था है, सीखने और सिखाने के लिए इस शिक्षा अभियान से आप भी जुड़ सकते है और अपने मित्रों को भी जोड़ सकते है |जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये | संपर्क करें : learninsggvsti@gmail.com; 08800362407
ध्यान दें जरा दुनिया में कोई भी पैरंट्स परफेक्ट नहीं होते। कभी यह न सोचें कि हम परफेक्टली बच्चों को हैंडल करेंगे तो वे गलती नहीं करेंगे। बच्चे ही नहीं, बड़े लोग भी गलती करते हैं। अगर बच्चे को कुछ सिखा नहीं पा रहे हैं या कुछ दे नहीं पा रहे हैं तो यह न सोचें कि एक टीचर या प्रवाइडर के रूप में हम फेल हो गए हैं। बच्चों के फ्रेंड्स बनने की कोशिश न करें क्योंकि वे उनके पास काफी होते हैं। उन्हें आपकी जरूरत पैरंट्स के तौर पर है। 
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वर्ष के समय को देखते हुए, आउटरवियर चुनें। एक ठंड की अवधि के लिए, गर्म ऊन कंबल पर या फर के साथ एक लिफाफे पर रोकें, गर्म टोपी को मत भूलना। एक कंबल के लिए, एक सुंदर duvet कवर या एक कोने खरीदें, वे निर्वहन के लिए एक सेट में लालित्य जोड़ देंगे। गुलाबी या नीली रिबन या एक विशेष पिन लें। शरद ऋतु और वसंत के लिए, एक गद्दी पॉलिएस्टर, चौग़ा और एक कंबल पर एक लिफाफे के बीच चुनें।
पीएम- सफलता की कोई रेसिपी नहीं होती, बस ठान लो कि विफल नहीं होना है, लेकिन कोई एक बार विफल हो जाए तो वो इस विफलता को अपने सपनों का कब्रिस्तान बना लेता है। मेरे जीवन में एक किताब आई, पोलीएना, पॉजिटिव थिंकिंग के लिए एक मार्गदर्शक है, उसे पढ़ो। कोई एक व्यक्ति ड्राइविंग सीखता है, एक बार गाड़ी ठुक गई तो दोबारा हाथ नहीं लगाता, ये गलत है, झोंक दीजिए खुद को, चीज़ों को करना सीखो।
हिंदी में साधारणतः शब्दों मे आ की मात्रा को ई की मात्रा में बदल देने से पुर्लिंग शब्द स्त्रीलिंग हो जाता है जैसे साला – साली, नाला – नाली. लेकिन जहाँ अपवाद हैं वहाँ मजा किरकिरा हो जाता है. मजाक की एक और बात सुनिए -  जब कोई बनिया पूछे कि मेरी बनियाइन कहाँ है तो जवाब क्या होगा – अलमारी में या पड़ोस में. सोचिए ....कहीं जवाब हुआ कि बिस्तर पर है तो ... भगवान बचाए.
बड़ी क्लासेस में यह काम स्टूडेंट्स के टेंपरामेंट (मिजाज) को समझकर आसानी से किया जा सकता है। स्टूडेंट्स के मिजाज को भांपने और उसके मुताबिक बदलने में टीचर को गुरेज नहीं करना चाहिए। दिक्कत तब पैदा होती है जब टीचर अपने सामने पढ़ने आए स्टूडेंट्स पर कोई राय कायम किए बिना कोर्स को सिर्फ पढ़ाने की गरज से पढ़ा कर क्लास का समय बिता देते हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स इंगेज नहीं हो पाते और क्लास में शोर करने के अलावा वैसी अनुशासनहीनता भी करते हैं जो उनकी फाउंडेशन को कमजोर करता है। यूनिवर्सिटी में जाकर यही स्टूडेंट्स पढ़ने की बजाय क्लास को कैसे बाधित किया जाए, इसमें एक्सपर्ट हो जाते हैं।

दोस्तों आपको पता तो है ही कि जमाना इतना आगे बढ़ चूका है और आजकल बच्चे ढाई साल की उम्र से ही school जाना शुरू कर देते है. ऐसे में उनपर burden बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और parents की expectation बच्चो से और बह ज्यादा बढ़ जाती है. लेकिन क्या आपको बच्चो को पढ़ाने का तरीका मालूम है ? बहुत सारे parents अपने बच्चों को पढ़ाने के बारे में सोचते होंगे कि कैसे पढ़ाया जाये ?
गेमिफिकेशन के माध्यम से ‘स्पाइसटून्स’ युवा उपयोगकर्ताओं को विभिन्न गतिविधियों में लगाकर उनके शैक्षणिक ज्ञान और सामाजिक कौशल को तराशने का काम करता है वह भी पहले ही दिन के खेल से। ‘स्पाइसटून्स’ पर सीखने की प्रक्रिया हमारे देश में सदियों से प्रचलित रटने की विधी से एकदम से उलट है। ‘स्पाइसटून्स’ बच्चों को पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ अनुभवात्मक अभ्यास का भी मौका उपलब्ध करवाती है।
कॉलेज के बारे में बात करो। अपने पुराने बच्चों के साथ आगे बढ़ें कि आप कॉलेज के संबंध में क्या कर सकते हैं और नहीं कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, आप उस राशि तक का भुगतान करने की पेशकश कर सकते हैं, जिसकी कीमत उन्हें इन-स्टेट, पब्लिक स्कूल में ले जायेगी। लेकिन वे बाकी के लिए जिम्मेदार होंगे। छात्र ऋण का उपयोग करने के पेशेवरों और विपक्ष के माध्यम से बात करें, एक प्रमुख कैसे चुनें जिससे अच्छी नौकरी हो सके, और और भी बहुत कुछ। इन बातचीत को जल्दी और अक्सर करें ताकि आपके बच्चे जूनियर और हाई स्कूल के वरिष्ठ वर्ष द्वारा तैयार किए जाएं।
इससे पहले कि माता-पिता अपने एक साल के बच्चे को विकसित करना शुरू करने का फैसला करें, उन्हें बस यह जानने की जरूरत है कि उनका बच्चा इस उम्र तक क्या कर सकता है, जानना और करना चाहिए। सबसे पहले, आपको इसके शारीरिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जो शिशु के निम्नलिखित कौशल में व्यक्त किया गया है: सहायता के बिना, पैरों पर खड़े रहना, दौड़ना (तीसरे पक्ष की मदद का उपयोग करना), स्वतंत्र रूप से चलना, वयस्कों की नकल करना, उनके कुछ कार्यों की नकल करना, एक कप से पीना वयस्कों की मदद के बिना।
यह वह पुस्तक है जिसने इसे मेरे लिए शुरू किया। एक बच्चे के रूप में, मैंने अपनी माँ से इस पुस्तक को इतनी बार पढ़ने के लिए आग्रह किया कि वह शायद अब भी दिल से याद रखे। यह छोटे शब्दों और छोटे वाक्यों के साथ एक साधारण कहानी है, जो बच्चे को पढ़ने के लिए सही सिखाती है। कहानी मूल रूप से विभिन्न कुत्तों के बारे में है जो सभी अंत में एक पेड़ में एक कुत्ते पार्टी में जाते हैं। बच्चों के लिए अच्छा और आसान और एक मजेदार सोने की किताब। यदि आप कुत्ते के प्रेमियों का परिवार शुरू कर रहे हैं, तो यह एक महान परिचय है।
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क्योंकि रूटीन की इस आदत के कारण हमारा काफी सारा समय यहां सप्लाई होने वाले ऐसे मैसेज को पढ़ने और अनुपयोगी तस्वीरों व वीडियो को डिलीट करने में चला जाता है। इस समय का अच्छा इस्तेमाल जरूरी है। दिनभर स्क्रीन पर होने का हमारे ऊपर असर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि हम कुछ समय स्क्रीन से इतर किसी किताब को पढ़ने। किसी किताब के ऊपर अपने मन में आने वाले विचारों को पेन-पेपर की मदद से लिखने की कोशिश करें, यह हमारे मन को एक सकारात्मक ऊर्जा से भरेगी और विचारों के बाधित प्रवाह को फिर से आगे बढ़ने का रास्ता देगी।
अब आप ने सीख लिया है कि अंग्रेजी सीखने के लिए पहला स्टेप में क्या क्या करना है अब आप इन 26 अक्षर को अपने कॉपी पर लिख कर अभ्यास कीजिये, क्योंकि रोमन लिपि में बड़ी स्टाइलिश भाषा है, इसकी लिखाई के कुछ नियम हैं, इसके लिखने की चोराई कम-ज्यादा होती है आप इसे लिख कर अभ्यास कर लें, कि कौन-सा अक्षर 2,3 या 4 पंक्तियों में लिखा जाता है| पहले आप चार लाइन वाले इंग्लिश कॉपी पर अभ्यास कीजिये| 
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