घटना उत्तर प्रदेश के अमरोहा से महज 20 किलोमीटर दूर बावनखेड़ी गांव की है। शबनम और सलीम के बीच प्रेम संबंध थे। शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में एमए किया था। वह सूफी परिवार की थी। उनके परिवार के पास काफी जमीन थी। वहीं सलीम पांचवीं फेल था और पेशे से एक मजदूर था। इसलिए दोनों के संबंधों को लेकर परिजन विरोध कर रहे थे। 14-15 अप्रैल 2008 की रात शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी। तब वह सात महीने की गर्भवती थी।
याद रखें कि ये धैर्य से करने वाला काम है। एक दिन में आपको लक्ष्य प्राप्ति नहीं होगी। बच्चे का  दिमाग़ धीरे धीरे विकास करता है, आप सही तरीके से उसे सिखाते जाइए, पढ़ाते जाइए, आप ज़रूर सफ़ल होंगे। बस एक बात ज़रूर ध्यान में रखें कि आपको संयम से काम लेना है, बच्चे को डराना, धमकाना या मारना नहीं है। इन सब बातों का बच्चों के कोमल मन पर बुरा असर पड़ता है। हो सकता है आपका बच्चा पढ़ने की बजाय, पढ़ाई से पूरी तरह विमुख हो जाए। धैर्य से काम लें, आपको सफलता ज़रूर मिलेगी।
Mujhe iss bat se bilkul hi koi problem nahi na hi kisi aur sikshak ko hoga. Jo prakria iss dhang men bataya gaya hai wah bilkul satik aur productive hai. Main iska istemal bakhoobi karata hun. Khed hai Ki shikshak jinhen rashtra dharohar ko sawarane ka jimma shaupa gaya hai aisi baton men ruchi kyon nahi lete. Aisi negativity samaj ke liye hitkar nahi hai.Sadhanyabad.
यह वह पुस्तक है जिसने इसे मेरे लिए शुरू किया। एक बच्चे के रूप में, मैंने अपनी माँ से इस पुस्तक को इतनी बार पढ़ने के लिए आग्रह किया कि वह शायद अब भी दिल से याद रखे। यह छोटे शब्दों और छोटे वाक्यों के साथ एक साधारण कहानी है, जो बच्चे को पढ़ने के लिए सही सिखाती है। कहानी मूल रूप से विभिन्न कुत्तों के बारे में है जो सभी अंत में एक पेड़ में एक कुत्ते पार्टी में जाते हैं। बच्चों के लिए अच्छा और आसान और एक मजेदार सोने की किताब। यदि आप कुत्ते के प्रेमियों का परिवार शुरू कर रहे हैं, तो यह एक महान परिचय है।
अपने पढ़ाने के तरीके में जरा ट्विस्ट लाएं। उन्हें बातों-बातों में, खेल-खेल में और मस्ती के साथ पढ़ाना सिखाएं। उनमें एक्साइटमेंट पैदा करें। इससे पढ़ाई उन्हें बोझ नहीं लगेगी और वे जल्दी सबकुछ आसानी से सीख जाएंगे। अगर आपको भी अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर कुछ ऐसी ही शिकायत है तो हमारा ये आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा। इसमें हम आपको बताएंगे बच्चों को पढ़ाने के अनोखे तरीकों के बारे में।
वास्तव में, मूल बातें शुरू करना एक अच्छा विचार है। उस समय, गेविन इस तथ्य को समझ नहीं पाए थे कि चार तिमाहियों में एक डॉलर बराबर है। लेकिन उन्हें पता था कि हमें चीजों को खरीदने के लिए पैसे चाहिए। और हमने पैसे के लिए अन्य उपयोगों के बारे में उसे पढ़कर अपने क्षितिज का विस्तार करने की कोशिश की। ऐसा करने के लिए, हमने लिफाफे को अपने बड़े (हाल ही में खाली) मनी जार में रखा:
डाईट पंचकूला से आए विषय विशेषज्ञों ने शिक्षकों को नए-नए गुर सिखाएं। ताकि बच्चों को और अधिक रोचक विधि से पढ़ाया जाए। वर्कशॉप के दौरान सभी स्कूल अध्यापकों ने भी पढ़ाई को रोचक बनाने के अपने-अपने गुर एक दूसरे से सांझा किए। इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी अंजू ग्रोवर ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। शिविर में शिक्षक राजेश भंवरा, बलदेव, ब्रीज किशोर, गोपीचंद, अमरनाथ, रवि दत्त आदि अध्यापकों ने अपने विचार भी सांझा किए।
• Compromise : हां!! ये शब्द के मायने भी मैंने सीख लिए थे हॉस्टल में। जब हम कुल 150 लड़कियों के साथ रहते हैं जो कहीं ना कहीं हर तरीके से हमारे जैसी ही हैं, तो उनके साथ संबंध बनाने के लिए कभी झुकना पड़ता है तो कभी प्यार से समझना पड़ता है,कभी रूठे को मनाना पड़ता है तो कभी सच और सही के लिए विद्रोह करना पड़ता है लेकिन हां Compromise हर जगह अपनी एक अहम भूमिका निभाता है चीजों को सरल और सौहार्दपूर्ण बनाने में। पतिदेव ने ये शब्द थोड़ा थोड़ा शायद शादी के बाद ही सीखना शुरू किया😅 क्योंकि उनकी परम पूज्य माताजी ने इसकी परिभाषा सीखने का मौका ही नहीं दिया।
अब आप ने सीख लिया है कि अंग्रेजी सीखने के लिए पहला स्टेप में क्या क्या करना है अब आप इन 26 अक्षर को अपने कॉपी पर लिख कर अभ्यास कीजिये, क्योंकि रोमन लिपि में बड़ी स्टाइलिश भाषा है, इसकी लिखाई के कुछ नियम हैं, इसके लिखने की चोराई कम-ज्यादा होती है आप इसे लिख कर अभ्यास कर लें, कि कौन-सा अक्षर 2,3 या 4 पंक्तियों में लिखा जाता है| पहले आप चार लाइन वाले इंग्लिश कॉपी पर अभ्यास कीजिये| 
स्टर एजुकेशन संस्था की अगुवाई में  युगांडा से आई टीम ने एजुकेशन लीडर डॉ.रश्मि तिवारी के विद्यालय उच्च प्राथमिक स्कूल मूलंजानगर पहुंची और उनके द्वारा कक्षा में लागू किये गये नवाचारों और छात्रों के सीखने पर उनके प्रभावों को समझने की कोशिश की। इसके बाद यह टीम एजुकेशन लीडर श्रुति सिंह एवं सविता सैनी द्वारा आयोजित की गई बैठक में क्वालिटीपरक शिक्षा बच्चों को कैसे मिले, पर चर्चा की गई। इसके बाद टीम ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कौस्तुभ कुमार सिंह एवं समस्त ब्लॉक के खण्ड शिक्षा अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत की। स्टर एजुकेशन की यूगांडा टीम से रेन (एम. एंड ई. लीड) एवं ब्रेंडा(एम. एंड ई. अधिकारी)  एवं भारतीय टीम से परविंदर सिंह एवं तनुश्री (एम. एंड ई.), आशीष शर्मा, श्वेता त्रिपाठी एवं विशाल कश्यप (एससीईआरटी एवं स्टर एजुकेशन) उपस्थित रहे |
इस बात पर निर्भर करता है कि आपका बच्चा उपरोक्त सभी कार्य करता है या नहीं, इसके विकास पर आपका आगे का काम भी आकार लेगा। इस मामले पर विचार करें जब एक बच्चा यह नहीं जानता कि इस सूची से कुछ कैसे करना है, उदाहरण के लिए, एक बर्तन के लिए नहीं पूछता है। ऐसा करने के लिए उसे सिखाने के लिए, सबसे पहले, आरामदायक और पूरी तरह से अवशोषित डायपर से छुटकारा पाना आवश्यक है। पंपर्स में, बच्चे को यह महसूस नहीं होता है कि वह गीला है। वह विज्ञापन में ऐसा महसूस करता है: "सूखा और आरामदायक।" यही कारण है कि जब वह सब कुछ बहुत अच्छा होता है, तो वह बर्तन पर "अपना व्यवसाय" करने की आवश्यकता नहीं समझता है। दूसरा चरण बच्चे को हर आधे घंटे में बर्तन पर "रोपण" करना होगा। इस स्तर पर, मुख्य बात - आलसी मत बनो। दो या तीन दिन, और बच्चे को पहले से ही बर्तन मांगने की आदत पड़ जाती है।
सहेजा जा रहा है। हमने अपने बच्चों को एक छोटी उम्र में उन चीज़ों को बचाने के महत्व को समझाया जो वे चाहते थे। हमने गैर-मौद्रिक पाठों का उपयोग करके इसे समझाया। उदाहरण के लिए, हमने थोड़ी देर के लिए टीवी कूपन का इस्तेमाल किया। जब गेविन ने व्यवहार किया, तो उन्होंने टीवी देखने के लिए एक कूपन अर्जित किया। हमने प्रत्येक फिल्म को अपने संग्रह में लंबाई से संबंधित एक संख्या में असाइन किया। शो देखने के लिए उन्हें कई कूपन चाहिए। तो जब वह एक चार कूपन फिल्म द इनक्रेडिबल्स देखना चाहता था, तो उसने उस कूपन पर पकड़ने का फैसला किया जिसे वह पहले से ही उस फिल्म के लिए पर्याप्त कमाई कर रहा था। एक बार यह आदत स्थापित हो जाने के बाद, हमने समझाया कि पैसे बचाने से वैसे ही काम किया जाता है। और हमने उसे अपने पैसे जार में बचाने के लिए एक लिफाफा दिया। आखिरकार, हम उस पैसे को एक बचत खाते में अच्छी ब्याज दर के साथ स्थानांतरित कर देंगे।
धर्मेंद्र ऐसे में कहते हैं कि वह गांव वालों की जिंदगी बसरकर रहे हैं। धर्मेंद्र के हाथों में थाली है जिसमें सूखी मेथी दिखाई देती है। धर्मेंद्र बताते हैं कि ये सूखी मेथी तोड़ कर सुखाई है। फिर इसके पराठे बनेंगे और दही के साथ खाएंगे। इस वीडियो को देख कर धर्मेंद्र के फैन्स कहते नजर आ रहे हैं कि इस उम्र में भी इतने फिट धर्मेंद्र की सेहत का राज है कि वह प्योर चीजें खातें हैं।
कुछ जगह मैंने चुटकुले कहते सुना है ... “शादी मुबारक हो, जोड़ी साला मत रहे”.  पहले तो चकराया कि यह कैसा मजाक है. फिर कुछ देर से समझ आया कि किसी ने शब्द ज्ञान के आभाव में सलामत शब्द को तोड़ कर    “साला मत” कर दिया है जिससे खेल खराब ही हो गया. सब कुछ किरकिरा हो गया. किसी के हकलाने के कारण हुआ हो, तो समझें भी, लेकिन कोई तोड़कर बोले तो... कभी कभी खतरनाक भी साबित हो सकता है.
वे आगे कहते हैं, “रही बात दूसरी कक्षा और पहली कक्षा के सीखने के स्तर में बहुत ज्यादा अंतर न होने वाली स्थिति में क्या किया जा सकता है। तो इसका जवाब है कि पहली कक्षा के बच्चों को मात्राए सिखाते समय दूसरी कक्षा के बच्चों को भी शामिल किया जा सकता है। क्योंकि बड़े बच्चे तो वर्ण आसानी से सीख जाते हैं। उनको मात्राओं को पहचानने और वर्णों के साथ मात्रा लगाकर पढ़ने में विशेष दिक्कत होती है। इस तरीके से पहली-दूसरी कक्षाओं को एक साथ मैनेज किया जा सकता है।”

ऐसे में पहली कक्षा के जो बच्चे अभी अपनी समझ पुख्ता करने की कोशिश में हैं उनको कम प्रयास करने का मौका मिलता है। साथ ही साथ शिक्षक पहली कक्षा के हर बच्चे तक नहीं पहुंच पाते, जो इस स्तर के बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। इसी मसले पर मैंने बात की पहली-दूसरी कक्षा के बच्चों को हिंदी भाषा में पढ़ना-लिखना कैसे सिखाया जाए इस मुद्दे पर अच्छी पकड़ रखने वाले जितेंद्र कुमार शर्मा से।
धर्मेंद्र ऐसे में कहते हैं कि वह गांव वालों की जिंदगी बसरकर रहे हैं। धर्मेंद्र के हाथों में थाली है जिसमें सूखी मेथी दिखाई देती है। धर्मेंद्र बताते हैं कि ये सूखी मेथी तोड़ कर सुखाई है। फिर इसके पराठे बनेंगे और दही के साथ खाएंगे। इस वीडियो को देख कर धर्मेंद्र के फैन्स कहते नजर आ रहे हैं कि इस उम्र में भी इतने फिट धर्मेंद्र की सेहत का राज है कि वह प्योर चीजें खातें हैं।
शिक्षकों को तीनों विषयों की पढ़ाई में कमजोर बच्चों को आसान तरीकों से बच्चों का ज्ञान बढ़ाने के लिए कहा गया है। इस दौरान बच्चों को पढ़ाने के लिए विभाग की ओर से अलग स्टडी मैटीरियल भी तैयार किया गया है, जिसे सभी स्कूलों में भेज दिया गया है। इसमें गणित, विज्ञान और अंग्रेजी को रोचक बनाया गया है। एक्स्ट्रा लर्निंग मैटीरियल चित्रों पर आधारित है ताकि बच्चे खेल-खेल में तीनों विषयों के बारे में पूरा ज्ञान प्राप्त कर सकें। जिस विषय में अधिक बच्चे पिछड़ रहे हैं वहा विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद भी ली जाएगी। सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों से भी इस योजना के तहत सहयोग लिया जाएगा। एक्स्ट्रा क्लास समाप्त होने के बाद इन बच्चों का मूल्याकन भी करवाया जाएगा और बौद्धिक क्षमता यदि कक्षा के अनुरूप न हुआ तो फिर से यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी।

मात्रा सिखाते समय ध्यान रखने वाली सबसे जरूरी बात है, “नई मात्रा ऐसे वर्णों के साथ सिखाएं जिसे बच्चे पहले से जानते हों। यह भी ध्यान रखें कि जो मात्रा हम सिखाना चाहते हैं उसके वर्ण प्रतीक और मात्रा प्रतीक को बच्चे पहचानते हों, साथ ही उनकी आवाज़ों को भी जानते हों।”मात्रा सीखना पूरी तरह से सही और नियमित अभ्यास का मामला है। ऐसे में जरूरी है कि नई मात्रा सिखाने के बाद दो-तीन दिन तक लगातार उसके अभ्यास और दोहरान का मौका बच्चों को मिले।


सरकारी स्कूलों के बच्चे इंग्लिश में अपने को पिछड़ा हुआ समझते हैं। बच्चों के लिए इंग्लिश बोलना और लिखना दोनों ही मुश्किल भरा होता है। इंग्लिश के प्रति छात्रों में आत्मविश्वास जगाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में बुधवार से प्राइमरी शिक्षकों के लिए दस दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई है। जिसमें शिक्षकों को बताया जा रहा है कि वह कैसे बच्चों को इंग्लिश बोलना और पढ़ना सिखाएं, ताकि बच्चे आसानी से सीख सकें। कोर्स कोआर्डिनेटर नरेंद्र वालिया ने बताया कि रटने से इंग्लिश नहीं आएगी। इससे बच्चे में और ज्यादा इसका भय बनेगा। बच्चों को इंग्लिश आसान लगे, इसके लिए उन्हें खेल-खेल में अंग्रेजी बोलना और पढ़ना सिखाया जाएगा। छोटे-छोटे प्ले के माध्यम से बच्चों को इंग्लिश में वार्तालाप सिखाई जाएगी। कार्यशाला में शिक्षकों को बताया गया कि कैसे वह बच्चों से एक्टिविटी कराएं। इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर सीमा जैन आदि मौजूद थीं।
यह काम जितना आसान लग रहा है, उतना है नहीं। इसके लिए अभिभावक और अध्यापक को धैर्यवान होना पड़ेगा। आपकी कोई भी गलती बच्चे को पढ़ाई से दूर कर सकती है। साथ ही आपको हर चीज से अपडेट भी रहना होगा क्योंकि हो सकता है कि बच्चा शरारत में आपसे कुछ ऐसे सवाल करे, जिसका जवाब आपको न आता हो। यदि आपने उसके सवालों का सही जवाब दे दिया तो बच्चा आपका मुरीद हो जाएगा। बच्चे से ज्यादा मेहनत आपको करनी होगी।

विटामिन ई शरीर को बाहरी विषाक्त पदार्थों के संपर्क से बचाता है, उदाहरण के लिए, सिगरेट के धुएं से, साथ ही आंतरिक चयापचय प्रक्रियाओं के दौरान कोशिका क्षति। वैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों के लिए विटामिन की दैनिक दर - उम्र के आधार पर, 5 से 10 मिलीग्राम तक। आपको आवश्यकता होगी - मूंगफली, जैतून, मक्का, सूरजमुखी तेल; - यकृत; - अंकुरित गेहूं के दाने; - मेवे। अनुदेश 1 विटामिन ई से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ अपने बच्चे के आहार को समृद्ध करें याद रखें कि यह पदार्थ गर्मी उपचार, ऑक्सीजन और प्रकाश के प्रति बहुत संवेदनशील है। खाना पकाने और तलना उत्पादों, साथ ही जब कमरे के तापमान और ठंड प्रसंस्करण पर संग्रहीत क
सरकारी स्कूलों के बच्चे इंग्लिश में अपने को पिछड़ा हुआ समझते हैं। बच्चों के लिए इंग्लिश बोलना और लिखना दोनों ही मुश्किल भरा होता है। इंग्लिश के प्रति छात्रों में आत्मविश्वास जगाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में बुधवार से प्राइमरी शिक्षकों के लिए दस दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई है। जिसमें शिक्षकों को बताया जा रहा है कि वह कैसे बच्चों को इंग्लिश बोलना और पढ़ना सिखाएं, ताकि बच्चे आसानी से सीख सकें। कोर्स कोआर्डिनेटर नरेंद्र वालिया ने बताया कि रटने से इंग्लिश नहीं आएगी। इससे बच्चे में और ज्यादा इसका भय बनेगा। बच्चों को इंग्लिश आसान लगे, इसके लिए उन्हें खेल-खेल में अंग्रेजी बोलना और पढ़ना सिखाया जाएगा। छोटे-छोटे प्ले के माध्यम से बच्चों को इंग्लिश में वार्तालाप सिखाई जाएगी। कार्यशाला में शिक्षकों को बताया गया कि कैसे वह बच्चों से एक्टिविटी कराएं। इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर सीमा जैन आदि मौजूद थीं।

इन सब चीजों के अलावा हमे अपने बच्चो के टाइम – टेबल पर ध्यान देना चाहिए कि वे कब पढ़े और कब खेले और ये सब माता – पिता ही तय करते है | सुबह का समय अध्यन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है क्यू की यह वह वक़्त होता जब आस पास का वातावरण एकदम शांत होता है और अध्यन के लिए एक शोरगुलरहित तो सुबह जल्दी उठकर पढने से पढ़ी गयी चीजे जल्दी से याद हो जाती है इसलिए हमे अपने बच्चों की सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए  |

हर खंड में लगेगी कक्षाएं, प्रत्येक ग्रुप में होंगे 40 अध्यापक : जिला गणित विशेषज्ञ अशोक कुमार नामवाल ने बताया कि संपर्क फाउंडेशन की ओर से लगने वाले इन एक दिवसीय कैंप में प्राथमिक शिक्षकों को पढ़ाने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा। इन क्लास में कक्षा पहली व दूसरी को गणित पढ़ाने वाले शिक्षकों को मैथ्स किट के बारे में भी बताएंगे। इसमें शिक्षकों के ग्रुप बनाकर पढ़ाए जाएंगे। प्रत्येक ग्रुप में 40 शिक्षक शामिल किए गए हैं। यह अभियान 9 मई से 31 मई तक चलेगा। इस क्लास में पहले पहली कक्षा के शिक्षक को बुलाएंगे और फिर दूसरी कक्षा के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी नोडल अफसर बनाए गए हैं।


ओल्ड येलर या शिलाह के विकल्प के रूप में स्कूल में पढ़ी गई एक और कहानी यहां दी गई है। यह एक युवा लड़के की कहानी है जो अपने पैसे को बचाने और दो कोनहाउंड पिल्ले खरीदने के लिए कड़ी मेहनत करती है। वह उन्हें रेकूनों की तलाश करने के लिए प्रशिक्षित करता है, और कुत्तों के मानार्थ गुणों के साथ, वे ओज़ार्क में सबसे अच्छी शिकार टीम बन जाते हैं। यह एक लड़के और उसके कुत्तों, बढ़ने के बारे में और वफादारी के बारे में एक महान कहानी है। मैं इसे खत्म करने में खराब नहीं होगा, लेकिन अगर आपको अच्छी रोना चाहिए तो यह एक अच्छी किताब है।
छोटे बच्चों को पढ़ाने का तरीका हिंदी में छोटे बच्चों को पढ़ाना क्या वाकई इतना आसान है। शायद नहीं। ये छोटे जरूर होते हैं, लेकिन इन्हें एक जगह बैठाकर पढ़ाना टीचर और पैरेंट्स दोनों के लिए ही एक बड़ा टास्क है। बच्चों की लर्निंग हैबिट्स को लेकर पैरेंट्स और टीचर्स के मन में एक ही सवाल होता है कि आखिर इन्हें पढ़ाया कैसे जाए। आपको बता दें कि बच्चों को कुछ देर भी चुपचाप बैठाकर पढ़ाना काफी टफ है, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने पढ़ाने का तरीका बदल दें। बच्चों को ऐसे अनोखे तरीकों से पढ़ाएं कि उन्हें ये अहसास ही ना हो, कि वो पढ़ाई करने जैसा भारी काम कर रहे हैं।
एक और बात महत्वपूर्ण यह है की प्रतिदिन के पढाई को किसी न किसी माध्यम से खेल से जोड़ने का प्रयास करें | ध्यान रहे की आपके बच्चे वर्ण क के साथ – साथ क से पाँच शब्द भी सीख चुके हैं , उन्हीं पाँच शब्दों को खेल में उतरना है | उदाहरन के लिए – कक्षा में बीस बच्चे हैं तो , पाँच – पाँच बच्चों का समूह बनेगा और हर समूह को एक शब्द दिया जायेगा | जैसे – कटोरी वाले समूह बतायेंगे की वो कटोरी में क्या – क्या खाना पसंद करेंगे | इसी तरह हर समूह अपने – अपने शब्द के बारे में बतायेगा |
रॉबर्ट कभी भी इन सब चीजों को चेक करने नहीं जाता है। इसलिए मुझे पता था कि मुझे अपनी किसी भी दोस्त को ये सब बताने की जरूरत नहीं है। जब भी मुझे रॉबर्ट स्माइल कर देखता था या बाहों में लेता था ,मैं खुद को अपराधी समझने लगती थी और तुरंत उसके साथ बेड पर चली जाती थी। हम दोनों तब किसी जंगली जानवर से कम नहीं होते थे। मैं अपराधबोध में तो रॉबर्ट अपनी पत्नी के साथ आनंदित होता था ।
अगर आप अपने जीवन में सफल होना चाहते है ? और अपने करियर को अच्छा बनाना चाहते है| तो इसके लिए आपको मेहनत करनी होगी, तभी आप एक सफल व्यक्ति बन पायेंगें| और इसके लिए आपको आज का टेक्निकल ज्ञान सीखना होगा जैसे: कंप्यूटर कोर्स, और अंग्रेजी बोलने आना चाहिए| तभी आप अपने सफलता को प्राप्त कर पायेंगें| आप किसी भी देश में रहते हो, कोई फर्क नही पड़ता आपको कंप्यूटर और अंग्रेजी बोलने तो आना ही चाहिए| आज बहुत से एसे व्यक्ति है जो अपने हाथ में अपने पढाई की डिग्री लिए और नौकरी पाने के लिए बहुत परेशान है| अगर आप भी सोचते है कि सिर्फ अपनी पढाई की डिग्री से नौकरी पा लेंगें तो आप बहुत बड़ी गलत फैमि में है क्योंकि दुनिया अब बदल गई है, आदमी से ज्यादा काम तो अब मशीन करती है| फिर आदमी को नौकरी कहाँ से मिलेगा| लेकिन परेशान न होए अभी भी बहुत से नौकरी आपके लिए मौजूद है, लेकिन इस नौकरी को पाने के लिए आपको अपने पढ़ाई के साथ-साथ आपको टेक्निकल ज्ञान और कम्पटीशन की भी तैयारी करनी होगी, क्योंकि आप देख ही रहे है आज हर काम में कम्पटीशन चल रहा है|
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