यह काम जितना आसान लग रहा है, उतना है नहीं। इसके लिए अभिभावक और अध्यापक को धैर्यवान होना पड़ेगा। आपकी कोई भी गलती बच्चे को पढ़ाई से दूर कर सकती है। साथ ही आपको हर चीज से अपडेट भी रहना होगा क्योंकि हो सकता है कि बच्चा शरारत में आपसे कुछ ऐसे सवाल करे, जिसका जवाब आपको न आता हो। यदि आपने उसके सवालों का सही जवाब दे दिया तो बच्चा आपका मुरीद हो जाएगा। बच्चे से ज्यादा मेहनत आपको करनी होगी।
बंगाल - बिहार बॉर्डर (सीमारेखा) पर ऐसे कई शब्द मिलेंगे जिनका उच्चारण दो रूपों में किया जाता है. जैसे विश्वास – बिस्वास, खरा – खड़ा, बरा – बड़ा, यामिनी – जामिनी, यश- जश इत्यादि. कुछ र को ड़ और कुछ ड़ को र उच्चरित करते हैं. मैंने हिंदी भाषियों को भी कहते सुना है – “ मेरेको तेरेको पाँच रुपए देना है “ लेकिन आज तक समझ नहीं पाया कि वह कहना क्या चाहता है – कोन किसके पाँच रुपए देगा. मैने कई बार सोचा कि सबसे बढ़िया होगा कि पाँच रुपए उसे दिए जाएं जो मुझे इसका सही अर्थ समझा देगा. ऐसे ही कुछ वाक्य प्रचलन में है, जहाँ विराम चिन्हों की कमी के कारण अर्थ का अनर्थ हो जाता है. उनमें से एक है – रोको मत जाने दो. उसने उसकी बीवी को मारा – किसने किसकी बीवी को मारा. ऐसे संशयात्मक वक्तव्यों से बचना चाहिए. ज्यादातर इनका (संशयात्मक वक्तव्य़ों का) प्रयोग नेताओं द्वारा राजनीति में ही होता है.
15 दूसरे भाई-बहन भी बच्चों की मदद कर सकते हैं। कैसे? वे बच्चों को नज़रअंदाज़ नहीं करेंगे बल्कि उनकी अच्छी बातों पर ध्यान देंगे। वे ऐसी बातों पर गौर करेंगे जिनसे पता चलता है कि एक  बच्चा यहोवा के करीब जा रहा है। जैसे, क्या उसने सभा में कोई अच्छा जवाब दिया है या विद्यार्थी भाग पेश किया है? क्या उसने स्कूल में किसी को प्रचार किया है या गलत काम के लिए लुभाए जाने पर सही काम किया है? अगर हाँ, तो उसे तुरंत शाबाशी दीजिए। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हम सभा से पहले और बाद में मंडली के बच्चों से बात करें। जब हम ऐसा करेंगे तो बच्चे महसूस कर पाएँगे कि वे यहोवा की “बड़ी मंडली” का हिस्सा हैं।​—भज. 35:18.
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5 तीमुथियुस, मसीह का ऐसा चेला था जिसने कम उम्र में ही यहोवा की सेवा करने का फैसला किया था। प्रेषित पौलुस ने उसके बारे में कहा कि ‘जब वह एक शिशु ही था’ तभी से परमेश्‍वर के वचन में दी सच्चाइयाँ सीखने लगा था। तीमुथियुस का पिता यहोवा का उपासक नहीं था, इसलिए उसकी माँ और नानी ने उसके दिल में परमेश्‍वर के वचन के लिए प्यार बढ़ाया। नतीजा, उसका विश्‍वास मज़बूत होता गया। (2 तीमु. 1:5; 3:14, 15) फिर जब वह करीब 20-22 साल का था, तब वह मंडली में खास ज़िम्मेदारियाँ लेने के योग्य बना।​—प्रेषि. 16:1-3.
बच्चों की गलतियों की ओर ध्यान खींचने जितना ही अहम है उसकी अच्छाइयों की ओर लगातार ध्यान दिलाना। इससे बच्चे भटकेंगे नहीं। जहां कहीं भटकाव दिखे, उसे वहीं मार्क करना और बच्चों को सही रास्ते पर लाने के लिए टीचर को समझदारी से वापसी के उन रास्तों को तलाशना चाहिए जिससे बच्चे फिर से राह पर आ सकें। मिसाल के तौर पर, एक टीचर ने जब किसी लड़के को लड़कियों में जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी लेते देखा तो वह खुद उसके पास गए और कहा कि मैं तुम्हारे घरवालों से बात करूंगा कि वे तुम्हारी शादी कर दें। यहां आकर पैसा और वक्त बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। लड़का घबरा गया। इसके बाद टीचर ने उसे समझाया कि तुम्हारी उम्र में पढ़ाई सबसे जरूरी है। इन कामों का वक्त अभी नहीं आया है। लड़के ने पढ़ाई में मन लगाना शुरू कर दिया।
बच्चों को दिलचस्प तरीके से पढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि आप को यह पता होना चाहिए कि बच्चों की दिलचस्पी किस चीज में है। कुछ बच्चे कार्टून देखते हैं। उसमें भी निंजा हथौड़ी, डोरेमॉन, शिनचैन, छोटा भीम से लेकर बेन टेन, पॉकेमोन और बेब्लेड जैसे विविधताओं से भरे कार्टून होते हैं। कुछ बच्चों को सुपरहीरो वाली फिल्में पसन्द आती है तो कुछ को धूम और रोबोट वाली। कुछ बच्चे क्रिकेट देखना/खेलना पसंद करते हैं तो कुछ फुटबॉल या कोई अन्य खेल। वहीं कुछ बच्चे रचनात्मक होते हैं और कुछ न कुछ बनाते रहते हैं। बच्चों की अलग अलग पसन्द का ज्ञान होना अभिभावक और अध्यापक दोनों के लिए आवश्यक है।
पीएम – अभी जो कर रही हो वो भी देश की सेवा है। कुछ लोगों को लगता है कि सेना में जाने या कुछ बहुत बड़ा न करने से देश की सेवा नहीं होती। एक बालक अगर बिजली बचाता है, या खाना बर्बाद नहीं करता, जितना खाना है उतना ही खाए, या स्कूटर का तेल बचाए, तो वो भी देश की सेवा है। कभी कपड़े धोने वाली महिला को पढ़ना सिखाओ, ये भी देश सेवा कि हिस्सा है। छोटे-छोटे काम हैं, इससे बड़ी देश की सेवा नहीं हो सकती।
12 एक माँ समझाती है कि वह क्यों नहीं चाहती थी कि उसकी बेटी बपतिस्मा ले। वह बताती है, “मुझे यह कहते हुए शर्म आ रही है, लेकिन मैं डरती थी कि कहीं उसका बहिष्कार न हो जाए।” इस बहन की तरह कुछ माता-पिताओं को लगता है कि उनका बच्चा कोई नादानी कर बैठेगा, इसलिए जब तक वह समझदार नहीं हो जाता उसे बपतिस्मा नहीं लेना चाहिए। (उत्प. 8:21; नीति. 22:15) उन्हें शायद लगे कि अगर उनका बच्चा बपतिस्मा नहीं लेगा, तो उसका बहिष्कार भी नहीं होगा। ऐसी सोच क्यों गलत है?​—याकू. 1:22.
अब आप सोच रहे होंगे,ये मुद्दा क्या है,कहना क्या चाहती हो,ये क्या हॉस्टल और घर से पढ़ने वालों के बीच कोई comparison है? ....नहीं !! उदाहरण में चाहे मैंने अपने बेचारे भोले भाले पतिदेव को खींच लिया हो और केवल हॉस्टल और घर से पढ़ाई का ही तुलनात्मक विश्लेषण किया हो लेकिन सीधे सीधे शब्दों में बात है स्वावलंबन की। हाँ!! वो गुण जो हमारे बच्चों में हमें सबसे पहले डालना चाहये चाहे वो हमारे पास रहते हो या नहीं। खुद पर भरोसा करने का काम जिस दिन उन्हें आ जायेगा,उनके पंखों को फैलने से कोई नहीं रोक पायेगा। Self Dependence,Decision making power,Compromise ,Adjustments वो छोटे छोटे बीज है जो बच्चों के मूल्यों की जड़ों को मजबूत बनाती है।

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इस बात पर निर्भर करता है कि आपका बच्चा उपरोक्त सभी कार्य करता है या नहीं, इसके विकास पर आपका आगे का काम भी आकार लेगा। इस मामले पर विचार करें जब एक बच्चा यह नहीं जानता कि इस सूची से कुछ कैसे करना है, उदाहरण के लिए, एक बर्तन के लिए नहीं पूछता है। ऐसा करने के लिए उसे सिखाने के लिए, सबसे पहले, आरामदायक और पूरी तरह से अवशोषित डायपर से छुटकारा पाना आवश्यक है। पंपर्स में, बच्चे को यह महसूस नहीं होता है कि वह गीला है। वह विज्ञापन में ऐसा महसूस करता है: "सूखा और आरामदायक।" यही कारण है कि जब वह सब कुछ बहुत अच्छा होता है, तो वह बर्तन पर "अपना व्यवसाय" करने की आवश्यकता नहीं समझता है। दूसरा चरण बच्चे को हर आधे घंटे में बर्तन पर "रोपण" करना होगा। इस स्तर पर, मुख्य बात - आलसी मत बनो। दो या तीन दिन, और बच्चे को पहले से ही बर्तन मांगने की आदत पड़ जाती है।
- छठी क्लास की एक लड़की को उसका भाई फिजिकली अब्यूज कर रहा था। लड़की को हमेशा गुम-सुम देखकर टीचर ने उससे पूछा। पहले वह कुछ नहीं बोली। बाद में टीचर के लगातार यह विश्वास दिलाने पर कि तुम्हारा सीक्रेट मेरा सीक्रेट है और कोई तुम पर नहीं हंसेगा, लड़की ने धीरे-धीरे सारी बात बताई। टीचर ने लड़की के पैरंट्स से कॉन्टैट किया और भाई के खिलाफ केस भी कराया। लेकिन, इस कामयाबी में और लड़की का भरोसा जीतने में टीचर को महीनों मेहनत करनी पड़ी।

स्टर एजुकेशन संस्था की अगुवाई में  युगांडा से आई टीम ने एजुकेशन लीडर डॉ.रश्मि तिवारी के विद्यालय उच्च प्राथमिक स्कूल मूलंजानगर पहुंची और उनके द्वारा कक्षा में लागू किये गये नवाचारों और छात्रों के सीखने पर उनके प्रभावों को समझने की कोशिश की। इसके बाद यह टीम एजुकेशन लीडर श्रुति सिंह एवं सविता सैनी द्वारा आयोजित की गई बैठक में क्वालिटीपरक शिक्षा बच्चों को कैसे मिले, पर चर्चा की गई। इसके बाद टीम ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कौस्तुभ कुमार सिंह एवं समस्त ब्लॉक के खण्ड शिक्षा अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत की। स्टर एजुकेशन की यूगांडा टीम से रेन (एम. एंड ई. लीड) एवं ब्रेंडा(एम. एंड ई. अधिकारी)  एवं भारतीय टीम से परविंदर सिंह एवं तनुश्री (एम. एंड ई.), आशीष शर्मा, श्वेता त्रिपाठी एवं विशाल कश्यप (एससीईआरटी एवं स्टर एजुकेशन) उपस्थित रहे |
एक स्कूल में भाषा के कालांश के दौरान सीवी (की, के, को इत्यादि) व वर्णों (क, ख, ग इत्यादि) के पठन वाली गतिविधि में बच्चों के ‘सेल्फ करेक्शन’ वाले पहलू को देखने का मौका मिला। बच्चे अगर किसी सीवी को गलत पढ़ रहे थे तो उसमें तेज़ी से खुद सुधार भी कर रहे थे। कई बार यह सुधार बाकी बच्चों को देखकर भी हो रहा था। इससे उन्हें मात्राओं की समझ के साथ किसी सीवी को पढ़ने का मौका मिल रहा था।
आदरणीय, नमस्कार! मैंने मातृ भाषाओं के हक़ में एक दस्तावेज लिखा है जो हिंदी, पंजाबी, डोगरी, तामिल, तेलुगु, कन्नड़, मैथिलि, उर्दु, और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है. इस दस्तावेज का नाम 'भाषा नीति के बारे में अंतरराष्ट्रीय खोज: मातृ भाषा खोलती है शिक्षा, ज्ञान और अंग्रेजी सीखने के दरवाज़े' है. आप इसे हिंदी, पंजाबी, मैथिली, तामिळ, तेलुगू, कन्नड़, उर्दू, और अंग्रेजी में http://punjabiuniversity.academia.edu/JogaSingh/papers अंतरजाल पते से पढ़ सकते हैं. पीडीएफ प्रति चाहें तो मुझे अपना विद्युत पता भेज कर मंगवा सकते हैं. कुछ प्रतियां संलगित हैं. इस दस्तावेज में भाषा के मामलों सम्बन्धी दुनिया भर की खोज, समझ और व्यवहार का सार दिया गया है और दिखाया गया है कि मातृ भाषाओं की अनदेखी से भारत को कितने ज़्यादा शैक्षिक, विकासपरक और वाणिज्यपरक नुकसान हो चुके हैं और हो रहे हैं. उपरोक्त पते पर भाषा सम्बन्धी कुछ और लेख भी पड़े हैं. कोई दस्तावेज अच्छा लगे तो आगे बांटियेगा. सधन्यवाद!,
बच्चों को दिलचस्प तरीके से पढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि आप को यह पता होना चाहिए कि बच्चों की दिलचस्पी किस चीज में है। कुछ बच्चे कार्टून देखते हैं। उसमें भी निंजा हथौड़ी, डोरेमॉन, शिनचैन, छोटा भीम से लेकर बेन टेन, पॉकेमोन और बेब्लेड जैसे विविधताओं से भरे कार्टून होते हैं। कुछ बच्चों को सुपरहीरो वाली फिल्में पसन्द आती है तो कुछ को धूम और रोबोट वाली। कुछ बच्चे क्रिकेट देखना/खेलना पसंद करते हैं तो कुछ फुटबॉल या कोई अन्य खेल। वहीं कुछ बच्चे रचनात्मक होते हैं और कुछ न कुछ बनाते रहते हैं। बच्चों की अलग अलग पसन्द का ज्ञान होना अभिभावक और अध्यापक दोनों के लिए आवश्यक है।

एक पुरानी चाइनीज कहावत है : You tell me, I will forget, you show me, I may remember, you involve me, I will understand. टीचर को सबसे ज्यादा इस कहावत के आखिरी हिस्से पर अमल करना चाहिए। उसे हर तरह से स्टूडेंट को इंवॉल्व करने का हुनर आना चाहिए। खासकर एक ऐसे वक्त में जब स्टूडेंट्स के पास सूचना और जानकारी पाने के स्त्रोत बढ़ गए हैं, टीचर को इसे अपने लिए एक चुनौती की तरह लेना चाहिए। वह यह देखें कि कैसे टेक्नीकल एंडवांसमेंट के साथ अपने टीचिंग मेथड का तालमेल बिठा सकते हैं।
- छठी क्लास की एक लड़की को उसका भाई फिजिकली अब्यूज कर रहा था। लड़की को हमेशा गुम-सुम देखकर टीचर ने उससे पूछा। पहले वह कुछ नहीं बोली। बाद में टीचर के लगातार यह विश्वास दिलाने पर कि तुम्हारा सीक्रेट मेरा सीक्रेट है और कोई तुम पर नहीं हंसेगा, लड़की ने धीरे-धीरे सारी बात बताई। टीचर ने लड़की के पैरंट्स से कॉन्टैट किया और भाई के खिलाफ केस भी कराया। लेकिन, इस कामयाबी में और लड़की का भरोसा जीतने में टीचर को महीनों मेहनत करनी पड़ी।

(स्पोइलर्स अहमद) हैरी पॉटर श्रृंखला अब तक की सबसे प्यारी फंतासी पुस्तक श्रृंखला में से एक है, और वयस्क और बच्चे जादूगर बोर्डिंग स्कूल में जादूगर लड़के और उनके रोमांच की कहानी का आनंद ले सकते हैं। लेकिन कुत्ते प्रेमियों के लिए तीसरी किश्त का एक महत्वपूर्ण संदेश है। कहानी के दौरान, हैरी एक काले कुत्ते से मुठभेड़ करती है और चेतावनी दी जाती है कि यह मौत का संकेत है और आने वाली भयानक चीजें हैं। दुर्भाग्यवश, ये किंवदंतियों हमारी असली दुनिया में मौजूद हैं, और यह बहुत से काले कुत्तों और यहां तक ​​कि काले बिल्लियों को अपनाए जाने से रोकती है। कहानी में, हैरी को यह पता चला कि यह काला कुत्ता वास्तव में अपने चाचा को छिपाने में है, और वह पूरे समय हैरी के जीवन को बचा रहा है। जेके रोउलिंग, अपने जादुई तरीके से, दिखाता है कि काले कुत्तों को सिर्फ गलत समझा जाता है और प्यार के लायक हैं।
अगर आप यह सोचते हैं कि आपकी डांट और मार से बच्चा फटाफट पढ़ाई करने लग जाएगा तो आप बिल्कुल गलत सोचते हैं क्योंकि आपके डर से बच्चा पढ़ाई करने पर मजबूर तो हो जाएगा लेकिन आपकी नजर हटते ही वह पढ़ाई को बोझ समझने लग जाएगा। बच्चों को इस तरह से समझाएं कि वह पढ़ाई को बोझ या डर न समझें और एन्जॉय करें। इसके लिए आप में धैर्य होना बहुत ही जरूरी है। वह आपसे एक सवाल कई बार पूछेगा और आपको उसे ढंग से समझाना भी होगा। 
आस पास रखें किताबें: अगर आप कामकाजी महिला है तो ऐसे में आपके बच्चे के पास दिनभर किताब नहीं रह सकती है और वह सिर्फ रात में ही सोते समय किताबें पढ़ सकता है। जबकि यह ज़रूरी है कि बच्चे का जब किताबों से खेलने या उन्हें पढने का मन करे तो वह उसके आस पास होनी चाहिए। इसलिए बच्चे की पहुँच में कुछ उसके लायक किताबें घर में ज़रूर रखें जिसे वो खुद कभी भी निकाल कर पढ़ सके।
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