राज्य ब्यूरो, शिमला : प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं तक के विज्ञान, गणित व अंग्रेजी विषयों में कमजोर विद्यार्थियों को अब पढ़ाने के तरीके में बदलाव किया गया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि इन तीनों विषयों में कमजोर बच्चों की छंटनी कर उन्हें सुबह या शाम स्कूल की छुट्टी के बाद एक्स्ट्रा क्लास लेकर पढ़ाएं।
शबनम के बेटे को बुलंदशहर के रहने वाले पत्रकार उस्मान सैफी और उनकी पत्नी वंदना ने गोद ले लिया था। अमरोहा की बाल कल्याण समिति वहां जाकर उनके बच्चे का हाल-चाल लेती है। उस्मान ने कहा कि एक बार उसने शबनम और सलीम की तस्वीर देखी तो पूछा कि मां के साथ कौन है। उन्होंने उससे कहा कि वह उसके अंकल है। उन्होंने बताया कि वे लोग बच्चे के कुछ नहीं बताते हैं लेकिन पता नहीं कब तक सच छिपा पाएंगे।
दुनिया में कोई भी पैरंट्स परफेक्ट नहीं होते। कभी यह न सोचें कि हम परफेक्टली बच्चों को हैंडल करेंगे तो वे गलती नहीं करेंगे। बच्चे ही नहीं, बड़े लोग भी गलती करते हैं। अगर बच्चे को कुछ सिखा नहीं पा रहे हैं या कुछ दे नहीं पा रहे हैं तो यह न सोचें कि एक टीचर या प्रवाइडर के रूप में हम फेल हो गए हैं। बच्चों के फ्रेंड्स बनने की कोशिश न करें क्योंकि वे उनके पास काफी होते हैं। उन्हें आपकी जरूरत पैरंट्स के तौर पर है।
आजकल तो घर घर में computer है. बच्चे को computer के माध्यम से पढ़ाने, नई चीज़ें सिखाने की कोशिश करें. Computer पर कई तरह games भी आती हैं, जिनमे बच्चों को खेल खेल में पढ़ाया जाता है. उनकी मदद से आप बच्चे को पढ़ा सकते हैं. आजकल ज़्यादातर school के chapters की books में उनकी CD साथ में ही आती है. उस CD को computer के माध्यम से बच्चे को दिखाएँ. देखी गई चीज़ें जल्दी याद होती हैं, और रुचि भी बनी रहती है. आपके बच्चे को इससे निश्चित रूप से फ़ायदा होगा.
पहली-दूसरी कक्षा को एक साथ में बैठाकर पढ़ाया जाता है। मगर दोनों कक्षाओं के सीखने के स्तर में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। ऐसे में दोनों कक्षाओं को कैसे मैनेज किया जाये? इस सवाल के जवाब में जितेंद्र कहते हैं, “सबसे पहली प्राथमिकता तो पहली कक्षा को अलग पढ़ाने की होनी चाहिए। ताकि पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों के ऊपर ध्यान दिया जा सके। हर बच्चे के सीखने की स्थिति की सटीक जानकारी हमारे पास रहे। उनको कहां सपोर्ट देना है, इसकी भी जानकारी बच्चों के करीबी आब्जर्वेशन से मिलेगी।”

वर्ष के समय को देखते हुए, आउटरवियर चुनें। एक ठंड की अवधि के लिए, गर्म ऊन कंबल पर या फर के साथ एक लिफाफे पर रोकें, गर्म टोपी को मत भूलना। एक कंबल के लिए, एक सुंदर duvet कवर या एक कोने खरीदें, वे निर्वहन के लिए एक सेट में लालित्य जोड़ देंगे। गुलाबी या नीली रिबन या एक विशेष पिन लें। शरद ऋतु और वसंत के लिए, एक गद्दी पॉलिएस्टर, चौग़ा और एक कंबल पर एक लिफाफे के बीच चुनें।

लौह युक्त खाद्य पदार्थ: आहार में लोहे की कमी से रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। लोहे की कमी की वजह से कई अन्य समस्याएं जैसे एकाग्रता खराब हो जाना, ऊर्जा में कमी एवं थकान इत्यादि समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसलिए इसको खुराक मिलना जरूरी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपको अपने बच्चों को प्रचूरता से लौह युक्त खाद्य पदार्थ खिलाना चाहिए।
• Self Dependence : अपने कपड़े खुद धोना,बालों में तेल लगाना,अपनी फीस का काम बैंक में जाकर खुद करना,अपनी खाने पीने की व्यवस्थाओं का ध्यान रखना,साफ सफाई यहां तक कि नए नए दौर में जब आपके ज़्यादा दोस्त नहीं बने होते तब अपनी तबियत का ख्याल भी खुद ही रखना होता था। अपना काम खुद करने की एक बुरी सी आदत डाल दी थी होस्टल नें जो आज भी कमबख्त पीछा नहीं छोड़ती। सही सोचा अपने...पतिदेव बिल्कुल विपरीत... अपने हर छोटे मोटे काम के लिए हम पर निर्भर। पहले माँ और अब मैं। अगर मैं रात को बाथरूम में उनके कपड़े रखना भूल जाऊँ तो आफिस के लिए लेट होने का इल्ज़ाम मुझ पर। मेरे बहुत कोशिश करने पर अब उनमे थोड़े बहुत बदलाव आए हैं पर फिर भी हर छोटी ज़रूरत के लिए किसी को पूछना पड़ता है... कारण...आदत। जी बचपन से बिना कहे ही जब काम हो जाये तो बात ही क्या और इसका पूरा श्रेय मेरी सासु माँ को जाता है।
 2 कुछ सर्किट निगरानों ने गौर किया है कि 18 से 22 की उम्र के कई नौजवानों ने अभी तक बपतिस्मा नहीं लिया है, जबकि उनकी परवरिश सच्चाई में हुई है। इनमें से ज़्यादातर नौजवान सभाओं में आते हैं, प्रचार में जाते हैं और खुद को यहोवा का साक्षी मानते हैं। फिर भी, किसी वजह से उन्होंने यहोवा को अपना जीवन समर्पित नहीं किया और बपतिस्मा नहीं लिया। कुछ मामलों में देखा गया है कि माता-पिताओं को लगता है कि उनके बच्चे अभी बपतिस्मा लेने के लिए तैयार नहीं। इस लेख में हम उन चार चिंताओं पर गौर करेंगे जिनकी वजह से कुछ माता-पिता अपने बच्चों को बपतिस्मा लेने का बढ़ावा नहीं देते।
- छठी क्लास की एक लड़की को उसका भाई फिजिकली अब्यूज कर रहा था। लड़की को हमेशा गुम-सुम देखकर टीचर ने उससे पूछा। पहले वह कुछ नहीं बोली। बाद में टीचर के लगातार यह विश्वास दिलाने पर कि तुम्हारा सीक्रेट मेरा सीक्रेट है और कोई तुम पर नहीं हंसेगा, लड़की ने धीरे-धीरे सारी बात बताई। टीचर ने लड़की के पैरंट्स से कॉन्टैट किया और भाई के खिलाफ केस भी कराया। लेकिन, इस कामयाबी में और लड़की का भरोसा जीतने में टीचर को महीनों मेहनत करनी पड़ी।
आपके बच्चे में अच्छी आदतों का होना बहुत जरुरी है, क्योंकि ये आपके बच्चे को एक बेहतर इंसान बनने में मदद करता है। हमारे बड़े-बुजुर्ग हमें बचपन में कई अच्छी आदतें सिखाते हैं और हमारी जिम्मेदारी बनती हैं की हम अपनी उन अच्छी आदतों को अपने बच्चों को भी दें। कुछ आदतें ऐसी होती हैं जिनको आपको अपने बच्चे को बचपन में ही सिखा देनी चाहिए, ये वैसी आदतें होती हैं जो हमेशा और हर उम्र में आपके बच्चे के साथ रहती हैं। कुछ आदतें बच्चों के अंदर बचपन में ही पनपने लगते हैं और इसीलिए माता-पिता की यह जिम्मेदारी बनती है की वह अपने बच्चे को छोटी-छोटी बातें सिखाना शुरू कर दें। जानें वह कौन सी आदतें हैं जो आपको अपने बच्चे को जरूर सिखानी चाहिए।

अमूमन ढाई से तीन साल तक का बच्चा सोचना और समझना शुरू कर देता है। यही नहीं वे आकार भी समझने लगते हैं। इसलिए उनको अल्फाबेट वाले खिलौने खेलने के लिए दें। इसमें बने शब्दों से उनको परिचित करवाएं। इस तरह सिखाने से बच्चे में एकाग्रता एवं सहभागिता का विकास होता है। स्वाभाविक तरीके से सिखाई गई ये चीजें उसके मन पर सीधा असर डालेंगी और बिना तनाव के वह खेल-खेल में शब्दों से भी खेलना सीख जाएगा।
ओल्ड येलर या शिलाह के विकल्प के रूप में स्कूल में पढ़ी गई एक और कहानी यहां दी गई है। यह एक युवा लड़के की कहानी है जो अपने पैसे को बचाने और दो कोनहाउंड पिल्ले खरीदने के लिए कड़ी मेहनत करती है। वह उन्हें रेकूनों की तलाश करने के लिए प्रशिक्षित करता है, और कुत्तों के मानार्थ गुणों के साथ, वे ओज़ार्क में सबसे अच्छी शिकार टीम बन जाते हैं। यह एक लड़के और उसके कुत्तों, बढ़ने के बारे में और वफादारी के बारे में एक महान कहानी है। मैं इसे खत्म करने में खराब नहीं होगा, लेकिन अगर आपको अच्छी रोना चाहिए तो यह एक अच्छी किताब है।

जी! मैं एक छोटे कस्बे से तालुक्क रखती हूं तो मुझे स्कूल खत्म करते ही आगे की पढ़ाई के लिए घर छोड़कर बाहर हॉस्टल में रहना पड़ा। बहुत मुश्किल था वो समय मेरे लिए। खास तौर पर माँ के बिना रहना। मेरी उन् आदतों का क्या होगा जो कभी उसने सुधारी ही नहीं,मेरे बाल बनाना,रोज़ की मेरी स्कूल के किस्से सुनना, आते ही निम्बू पानी देना,बालों में तेल डालना और ना जाने क्या क्या। ये सब तो मुझे उससे जोड़े रखता है,वहां हॉस्टल में कौन करेगा ये सब। शुरू में कठिन था लेकिन आज सोचती हूँ तो लगता है, उन 7 सालों में ली कितनी सीख आज मेरे जीवन को कितना सरल और सुलझी हुई बनाती है।
अगर आप कोई किताब पढ़ रहे हैं तो कई बार ऐसा होता है कि आपके साथी कहते हैं कि इस किताब में क्या है? पढ़ने के बाद मेरे साथ शेयर कर दीजिएगा। दूसरा तरीका कि जदो किताब आप पढ़ रहे हैं, उसके ऊपर पीपीटी बना दीजिएगा ताकि बाकी लोगों को भी किताब पढ़ने का लाभ मिल सके। तीसरा तरीका किताब पढ़ने की क्या जरूरत है, मेरे साथ के लोग तो मुझे किताब पढ़कर बता ही देते हैं कि किताब में मुख्य-मुख्य बात क्या कही गई है। टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल खूब होता है जैसे किताब की समीक्षा गूगल सर्च करो और पढ़ लो।
शेडमोन्स्टर | कुत्ते और बिल्लियों के लिए डी शेडिंग उपकरण एक वरिष्ठ लैब के साथ जो टॉम जोन्स की तुलना में तेजी से झुकाव करता है, धनुष (या उपयोग किया जाता है), मुझे किसी भी उत्पाद का परीक्षण करने में प्रसन्नता हो रही है जो मेरे फर से प्रभावित फ्लैट से राहत का वादा करता है! "टीवी पर देखा गया" उत्पादों के साथ मेरे अनुभव अधिकतर सुखद लोग हैं जो 70 के दशक में सुनते हैं जब मेरी बहन और मैंने मातृ दिवस के लिए हमारी माँ को रोन्को वेग-ओ-मैटिक खरीदने के लिए एक साथ हमारे भत्ते को पूल किया। एक नीचे की ओर घूमने के साथ कि पिल्ला एक आलू को सबसे पूरी तरह से बनाई गई फ्रेंच फ्राइज़ में बदल सकती है जिसे आपन
यह काम जितना आसान लग रहा है, उतना है नहीं। इसके लिए अभिभावक और अध्यापक को धैर्यवान होना पड़ेगा। आपकी कोई भी गलती बच्चे को पढ़ाई से दूर कर सकती है। साथ ही आपको हर चीज से अपडेट भी रहना होगा क्योंकि हो सकता है कि बच्चा शरारत में आपसे कुछ ऐसे सवाल करे, जिसका जवाब आपको न आता हो। यदि आपने उसके सवालों का सही जवाब दे दिया तो बच्चा आपका मुरीद हो जाएगा। बच्चे से ज्यादा मेहनत आपको करनी होगी।
यह निर्भर करता है कि बच्चा किस कक्षा में है। यदि छोटा है तो वह जरा से प्यार से समझाने पर पढ़ने बैठ जाएगा। यदि बच्चा 2 से लेकर 8वीं कक्षा में है तो उसे ज़बरदस्ती पढ़ने के लिए बैठाना मुश्किल है। ऐसे में उससे बात करना अच्छा रहेगा। ध्यान रखें कि आपकी बातें सीधे पढ़ाई पर केंद्रित न हो। उसे कार्टून पसंद है तो कार्टून की बात ही करें। मान लीजिये, उसे बेन टेन या डोरेमॉन पसंद है। उससे किसी भी एपिसोड के बारे में बात करें कि बेन टेन कैसे एलियन बन जाता है या डोरेमॉन के गैजेट्स कैसे काम करते हैं। बच्चा बड़ी दिलचस्पी से आपको सब समझाने लग जायेगा। आप प्रतिप्रश्न करते रहें। इस बार आपके प्रश्न कुछ इस तरह से होने चाहिए कि बात धीरे धीरे कार्टून से हटकर उसकी किताबों की ओर बढ़ जाये। जब बच्चा इन सवालों के जवाब नहीं दे पाएगा तो उसे प्रेरित करें कि ये सिद्धांत तो तुम्हारी गणित या विज्ञान की किताब में मिल जाएगा। आप देखेंगे कि बच्चा स्वयं ही पढ़ने बैठ जाएगा।

किसी वर्ण के साथ मात्रा लगने पर उसकी आवाज़ में बदलाव होता है, अगर इस बात को समझने का मौका बच्चों को मिले तो वे बहुत आसानी से मात्राओं के कांसेप्ट को समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए इसके लिए जिन वर्णों को बच्चे पहले से जान रहे थे, उसमें ‘ई’ की मात्रा लगाने के बाद बच्चों को पढ़कर बताया कि उसकी आवाज़ कैसे बदल रही है। (जैसे क+ी=की, र+ ी= री)। इसके बाद वर्णों और मात्रा लगे वर्णों को लिखना शुरु किया, इसके जरिए बच्चों को यह बताना था कि कौन सा वर्ण लिखा जा रहा है। या मात्रा लगे वर्णों को पढ़कर बताने का मौका बच्चों को मिले।
यदि रेड फर्न ग्रोथ जैसी किताबें आपको बहुत दुखी बनाती हैं, तो शायद इस पुस्तक में मुख्य पात्र वाले वैलेस वैलेस के साथ आप बहुत आम हैं। जब वह वर्ग के लिए एक पुस्तक रिपोर्ट लिखता है तो वह परेशानी में पड़ता है कि वह किताबों से नफरत करता है जहां कुत्ते अंत में मर जाता है। सजा के रूप में, उसे स्कूल के खेल में भाग लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है जहां एक कुत्ता अंत में मर जाता है, लेकिन वह अपनी सजा को झूठ नहीं बोलता है। वह नाटक को रोलरब्लैड्स और मोपेड के साथ एक रॉक एन 'रोल ओपेरा में बदल देता है। इस पुस्तक के लेखक गॉर्डन कॉर्मन ने मेरे मध्य विद्यालय में बात की जब मैं एक बच्चा था, और मैं आपको बता सकता हूं कि वह एक उल्लसित, शानदार कहानीकार है। वह हमारे सभी छात्र, शिक्षक, और यहां तक ​​कि खुद भी हँसते थे। यह पुस्तक निश्चित रूप से मृत कुत्ते के ब्लूज़ को खुश करेगी।

पानी पीना: मानव मस्तिष्क में लगभग 75 प्रतिशत पानी होता है, इसलिए इसकी कार्यक्षमता इसे अच्छी मात्रा में पानी मिलने पर निर्भर करता है। पानी मस्तिष्क को सभी कार्यों जिसमें स्मरण शक्ति एवं विचार प्रक्रिया भी शामिल है, के लिए मस्तिष्क को विद्युत ऊर्जा प्रदान करता है। पानी की कमी की वजह से कई समस्याएं पैदा हो सकती है जैसे कि ध्यान केंद्रित करने में समस्या, याददाश्त में कमी, मस्तिष्क में थकान और साथ ही सरदर्द, नींद से संबंधित समस्याएं, गुस्सा एवं अवसाद इत्यादि। साथ ही, यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए आप अपने बच्चों को खूब पानी पिलाएं। साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि पानी की कमी की वजह से मस्तिष्क की कार्याक्षमता पर बुरा असर ना पड़े। बच्चों को ऐसा भोजन दें जिसमें संतृप्त वसा की मात्रा कम हो एवं सब्जियां व रेशे की मात्रा ज्यादा हो। इससे उनके मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियां, जिनकी वजह से स्मरण शक्ति खराब होती है, होने की संभावना कम हो जाती है।
इन सब चीजों के अलावा हमे अपने बच्चो के टाइम – टेबल पर ध्यान देना चाहिए कि वे कब पढ़े और कब खेले और ये सब माता – पिता ही तय करते है | सुबह का समय अध्यन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है क्यू की यह वह वक़्त होता जब आस पास का वातावरण एकदम शांत होता है और अध्यन के लिए एक शोरगुलरहित तो सुबह जल्दी उठकर पढने से पढ़ी गयी चीजे जल्दी से याद हो जाती है इसलिए हमे अपने बच्चों की सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए  |
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निर्माता सात महीने से तीन साल तक के बच्चों के लिए एक खुले शरीर के साथ गर्मियों के घुमक्कड़ की एक विस्तृत चयन प्रदान करते हैं। उनकी विशिष्ट विशेषताएं - छोटे व्यास के पहिये (सबसे), वजन और कॉम्पैक्टनेस। अनुदेश 1 सही मॉडल चुनें। यदि आप एक सपाट सड़क पर अपने बच्चे के साथ चलते हैं, तो "बेंत" खरीदने के लिए स्वतंत्र महसूस करें। ऐसे घुमक्कड़ों में पीठ का कोण 160-180 डिग्री है, जो बच्चे को डाल देगा। सेट में एक गद्दा, एक आरामदायक हुड शामिल हो सकता है जो सूरज, एक रेनकोट और एक बैग से बचाता है। क्या आप अक्सर खरीदारी करने जाते हैं? वाहन उठाओ, जिसमें माल के लिए एक बड़ा ग्रिड है। 2 संरचना की स्थिरता की
परिवारKindergartnerगर्भावस्थावांछित बच्चेबच्चागर्भावस्था और प्रसवबच्चे की सुरक्षाअन्यखेल और मनोरंजनलोकप्रियलोकप्रियबच्चे का विकासशिशु की देख - रेखदत्तक ग्रहणशिक्षा और प्रशिक्षण बच्चेबच्चे का स्वास्थ्यगर्भावस्था और प्रसवबच्चे की सुरक्षाअन्यखेल और मनोरंजनलोकप्रियलोकप्रियबच्चे का विकासशिशु की देख - रेखदत्तक ग्रहणशिक्षा और प्रशिक्षण बच्चेबच्चे का स्वास्थ्य
एक अच्छी किताब के साथ कर्लिंग की तरह कुछ भी नहीं है, और यह तब भी बेहतर होता है जब आप कुत्तों के बारे में पढ़ते समय गले लगाने के लिए एक अच्छे पिल्ला के साथ घुमा सकते हैं। कुत्तों के मालिकों के लिए बहुत सारी अच्छी किताबें हैं जो ऐसी कहानियों से भरी हुई हैं जो वास्तव में किसी भी व्यक्ति के लिए घर पर आती हैं, जिसने कभी गहरे भावनात्मक संबंध को महसूस किया है जिसे आप केवल कुत्ते से प्यार करते हैं। कुत्तों के बारे में मेरी कुछ पसंदीदा किताबें यहां दी गई हैं कि प्रत्येक कुत्ते के मालिक को पढ़ना और आनंद लेना चाहिए।
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हर मा बाप अपने बच्चो से दिलो जानसे प्यार करते है और हर मा बाप अपने बच्चे को पढ़ाई में होशियार होते हुए देखना चाहते है । इसलिए हर मा बाप को अपने बच्चों को सबसे पहले पढ़ना सीखना ही होगा। इसके लिए जब आपका बच्चा छोटा होता है तो आप अपने बच्चे के सामने किसी बुक को जोर से पढ़े ताकि उसके दिल मे आपके जैसे पढ़ने की उत्सुकता बन जाएं। इसके अलावा भी अपने बच्चों को पढ़ना सिखाने के लिए हम आपके लिए बढिया तरीके लाये है जिन्हें आजमाकर आप आसानी से अपने बच्चो को पढ़ना सीखा सकते है।
प्रत्‍येक अभिभावक अपने बच्‍चों को शिक्षित कराना चाहते है और उनका पहला विचार यह होता है कि कहॉ से अपने बच्चो की पढ़ाई की शुरुवात जाये ? इस सवाल से हर शिक्षक और अभिभावक का सामना होता है। विभिन्न सरकारें और संस्थाएं  इस सवाल का जवाब खोज रही हैं। या खोजे हुए जवाब को विभिन्न माध्यमों से स्कूलों में लागू करके बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने की प्रक्रिया में सहयोग दे रही हैं।
डाईट पंचकूला से आए विषय विशेषज्ञों ने शिक्षकों को नए-नए गुर सिखाएं। ताकि बच्चों को और अधिक रोचक विधि से पढ़ाया जाए। वर्कशॉप के दौरान सभी स्कूल अध्यापकों ने भी पढ़ाई को रोचक बनाने के अपने-अपने गुर एक दूसरे से सांझा किए। इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी अंजू ग्रोवर ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। शिविर में शिक्षक राजेश भंवरा, बलदेव, ब्रीज किशोर, गोपीचंद, अमरनाथ, रवि दत्त आदि अध्यापकों ने अपने विचार भी सांझा किए।
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भाषा कालांश के अपने अनुभवों में भी मैंने इस बात को देखा है कि जो बच्चे बारहखड़ी के माध्यम से किसी लिखित सामग्री को पढ़ने की कोशिश करते हैं, उनकी रफ्तार बाकी बच्चों से कम होती है जो मात्रा को समझकर पढ़ते हैं। एक बच्चे को प्रवाह के साथ किताब पढ़ने वाली स्थिति तक पहुंचने के लिए कई महीनों जूझना पड़ा। इसके लिए पुस्तकालय की किताबों से काफी मदद मिली। अगर इस तरह का सपोर्ट नहीं होता तो बच्चे के लिए अटक-अटक कर पढ़ने वाली स्थिति से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो जाता।
सबसे पहले इंग्लिश पढ़ने आना चाहिए| उसके बाद उसकी मीनिंग आपको पता होना चाहिए| यहाँ पर आपको इंग्लिश सीखने का पहला स्टेप, अग्रेजी वर्णमाला के 26 अक्षर सीखनी होगी, क्योंकि अंग्रेजी की शुरुआत यही से शुरू होती है| "A" से "Z" तक यह अंग्रेजी वर्णमाला को अच्छी तरह से याद कर लीजिये|इन अंग्रेजी के वर्णमाला को अंग्रेजी में Alphabet कहते है|यहाँ पर आपको अंग्रेजी वर्णमाला का चार्ट और विडियो टुटोरिअल दिया गया है| इस विडियो को देख कर आप अंग्रेजी वर्णमाला सीख सकते है| इस चार्ट को आप डाउनलोड भी कर सकते है इस डाउनलोड करने के लिए डाउनलोड पर क्लिक करें|
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