ऐसे में पहली कक्षा के जो बच्चे अभी अपनी समझ पुख्ता करने की कोशिश में हैं उनको कम प्रयास करने का मौका मिलता है। साथ ही साथ शिक्षक पहली कक्षा के हर बच्चे तक नहीं पहुंच पाते, जो इस स्तर के बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। इसी मसले पर मैंने बात की पहली-दूसरी कक्षा के बच्चों को हिंदी भाषा में पढ़ना-लिखना कैसे सिखाया जाए इस मुद्दे पर अच्छी पकड़ रखने वाले जितेंद्र कुमार शर्मा से।
एक शब्द है रबर. इसका उच्चारण कहीं रबड़ होता है कहीं रबर. आज दोनों उच्चारण सही मान लिए गए हैं पर कौन सा मूल रूप है, इसकी खबर शायद ही किसी को हो. मलयालम व तमिल भाषाओं में ऐसे कई शब्द हैं जिन्हें उच्चरित करना अन्यों के लिए बहुत ही मुश्किल यानी असंभव समान है. उस उच्चारण को सही ढंग से हिंदी (देवनागरी) लिपि में लिखा भी नहीं जा सकता. ऐसे मे हिंदी भाषी गलती तो करेगा ही. उसी तरह हिंदी में अन्य गलती करते हैं. यह किसी भी दूसरी भाषा - भाषियों के बारे में कहा जा सकता है.
इस तरह का अभ्यास लगातार होना चाहिए ताकि बच्चों का इतना अभ्यास हो जाए कि वर्ण के साथ मात्रा के प्रतीक को देखते ही वे झट से अनुमान लगा लें कि इसको कैसे बोला जाएगा। वे कहते हैं कि यहां तक आने में बच्चों को समय लगता है, जो बच्चे रटकर यहां तक पहुंचते हैं वे थोड़ी देर ठहरते तो हैं मगर समझकर पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में उनके पढ़ने की रफ़्तार (रीडिंग स्पीड) कम होती है।
कॉम्पिटिशन के इस दौर में आजकल हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा सबसे तेज बने। इसके लिए वे बच्चे को 2-3 साल में ही प्ले स्कूल में डाल देते हैं। इसके बाद पैरेंट्स की हसरत होती है कि उनका बच्चा जल्द से जल्द लिखना व पढ़ना सीखे। लिखना पढ़ाई की सबसे पहली कड़ी है और जरूरी नहीं कि हर बच्चा आसानी से लिखना सीख जाए। ऐसी स्थिति में कई बार अभिभावक बच्चे पर दबाव भी डालते हैं, लेकिन इसका परिणाम सकारात्मक नहीं आता। आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप अपने लाडले को लिखना सिखा सकते हैं।
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