इसका मतलब यह नहीं है कि, बच्चों को वर्णमाला और कुछ शब्दों को याद रखने की आवश्यकता होनी चाहिए। जबकि स्मृति सीखने में एक भूमिका निभाती है, इसे पढ़ने में संक्षेप में याद रखना और अल्पकालिक और कामकाजी स्मृति के बारे में अधिक जानकारी है। एक पाठक को यह याद रखने में सक्षम होना चाहिए कि वह वाक्य के अंत तक पहुंचने से पहले वाक्य की शुरुआत में क्या पढ़ता है, अंत में पहुंचने से पहले अनुच्छेद की शुरुआत में वह क्या पढ़ता है, और इसी तरह।
जब भी कोई अहिंदी भाषी हिंदी बोलेगा तो उसकी बोली मे मातृभाषा का पुट अक्सर आ ही जाता है. इसी का असर है कि गणेश, कणेश हो जाते हैं खाना, काना हो जाता है और स्कूल, सकूल हो जाते हैं.. शिक्षकों को इनका ध्यान रखना चाहिए और खास जोर देकर ऐसी त्रुटियों का निवारण करना चाहिए. यदि छोटे वय में ऐसा न किया गया, तो बड़े वय में ऐसा करना बहुत ही मुश्किल है. कभी कभी यह असंभव भी हो जाता है - क्योंकि छोटी उम्र में सिखाने के तरीके बड़ी उम्र में अपनाए नहीं जा सकते. यह केवल हिंदी के साथ ही नहीं है. अंग्रेजी का एगेन्स्ट (Against) तेलुगु भाषी के लिए अगेनस्ट हो जाता है. वैसे ही ब्रिज (Bridge) , ब्रिड्ज हो जाता है. खैर इसमें अंग्रेजी के उच्चारण - लुप्तता का असर साफ दिखता है किंतु भारतीय भाषाओँ की खासियत है कि किसी भी वर्ण का उच्चारण लुप्त नहीं होता. यहाँ यह अंग्रेजी से बहुत बेहतर है. उच्चारण की बहुत सी खामियाँ टल जाती हैं. ऐसा नहीं है कि इनके कारण केवल नुकसान ही होता है. ऐसी आदतों के कारण ही दक्षिण भारतीय अच्छे स्टेनोग्राफर साबित हुए हैं. स्टेनोग्राफी एक उच्चारण आधारित लिपि है इसलिए उससे कोई भी भाषा लिखी जा सकती है. यदि भाषा का ज्ञान हो तो आसानी से पुनः लॉन्ग हैंड में भी   सही - सही प्रस्तुत किया जा सकता है.
Brahma Kumaris Hindi Poems hindi poetry Hindi Poetry by Vimal Gandhi http://kmsraj51.com/ http://www.brahmakumaris.org/ https://kmsraj51.com/ kms kmsra KMSRAJ Kmsraj51 poetry in hindi Vimal Gandhi कविताएँ हिंदी में। कविताओं का विशाल संग्रह। कविताओं का संग्रह हिंदी में। गीत-ग़ज़ल-कविता हिंदी में। पढ़ें - विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह। पढ़ें - शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह। पढ़ें सर्वश्रेष्ठ कविताओं का संग्रह हिन्दी में। पढ़ें सर्वश्रेष्ठ कवितायें हिन्दी में। पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह। प्यार-भरी कविताएँ हिंदी में। प्यार-भरी कविताओं का संग्रह हिंदी में। प्रेरणादायक कविता हिंदी में। पढ़ें प्रेरणादायक कविताओं का विशाल संग्रह। पढ़ें शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह हिंदी में। बच्चों के कविता हिंदी में। बच्चों के लिए कविता हिंदी में। बच्चों के लिए नैतिक कविता हिंदी में। लेखिका विमल गांधी जी कि कविताएँ हिंदी में। लेखिका विमल गांधी जी के सकारात्मक विचार हिन्दी में। विमल गांधी जी- कविता विमल गांधी जी - हिन्दी कविताओं का संग्रह। विमल गांधी जी कि कविताएँ हिंदी में। विमल गांधी जी कि कविताएँ। विमल गांधी जी की कवि‍ताएँ हिंदी में। विमल गांधी जी की हिन्दी कविताओं का संग्रह। विमल गांधी जी पोएट्री विमल गांधी जी प्रेरणात्मक कविता हिन्दी में। शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह। शिक्षाप्रद हिंदी कविताओं का विशाल संग्रह। हिन्दी-कविता-हिन्दी साहित्य हिन्दी कविताओं का सबसे बड़ा संग्रह। हिन्दी में शायरी और कविता।
छोटे बच्चों को खेल-खेल में गणित विषय को कैसे रोचक तरीके से पढ़ाया जाए, इसे लेकर अब कक्षा पहली व दूसरी को पढ़ाने वाले मैथ्स के शिक्षकों की प्रत्येक खंड अनुसार एक दिवसीय क्लास लगेगी। इस क्लास में गणित के एक्सपर्ट बताएंगे कि किस तरह बच्चों को गणित के सवाल आसान तरीके से बताएं और उनको स्कूलों में भेजी गई गणित किट के उपयोग करने के बारे में भी बताया जाएगा। यहां बताना जरूरी है कि पहली बार गणित किट को समझाने के लिए इस तरह के कैंप लग रहे हैं। इससे अब बच्चों को गणित विषय को समझने में आसानी रहेगी।
प्रत्‍येक अभिभावक अपने बच्‍चों को शिक्षित कराना चाहते है और उनका पहला विचार यह होता है कि कहॉ से अपने बच्चो की पढ़ाई की शुरुवात जाये ? इस सवाल से हर शिक्षक और अभिभावक का सामना होता है। विभिन्न सरकारें और संस्थाएं  इस सवाल का जवाब खोज रही हैं। या खोजे हुए जवाब को विभिन्न माध्यमों से स्कूलों में लागू करके बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने की प्रक्रिया में सहयोग दे रही हैं।
आजकल तो घर घर में computer है. बच्चे को computer के माध्यम से पढ़ाने, नई चीज़ें सिखाने की कोशिश करें. Computer पर कई तरह games भी आती हैं, जिनमे बच्चों को खेल खेल में पढ़ाया जाता है. उनकी मदद से आप बच्चे को पढ़ा सकते हैं. आजकल ज़्यादातर school के chapters की books में उनकी CD साथ में ही आती है. उस CD को computer के माध्यम से बच्चे को दिखाएँ. देखी गई चीज़ें जल्दी याद होती हैं, और रुचि भी बनी रहती है. आपके बच्चे को इससे निश्चित रूप से फ़ायदा होगा.

लेकिन क्या कुछ ही दिनों में अंग्रेजी बोलना सीखा जा सकता है ? नहीं एसा बिलकुल नहीं है! अपनी मात्र भाषा से अलग कोई भी भाषा सीखने में समय लगता है,कितना समय लगेगा यह कहना मुस्किल है यह तो व्यक्ति पर निर्भर करता है की वह किस तरह सीख रहा है कुछ लोग तो 6 महीने और 1 वर्ष में अच्छी अंग्रेजी बोलना सीख पाते है| क्योंकि किसी भी भाषा को सीखने में जो एक चीज सबसे महत्त्वपूर्ण होती है वो है हमारा environment, हमारा माहौल. आखिर हम अपनी मात्र-भाषा छोटी सी ही उम्र में कैसे बोलने लगते हैं क्योंकि हम ऐसे माहौल में रहते हैं जहाँ वही भाषा बोली , पढ़ी, और सुनी जाती है|

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India has more English speakers than Great Britain and most of them are polyglots and yet India is unable to provide equal education regardless the medium of instruction through transcription,transliteration and translation. Most world languages have modified their alphabets and use most modern alphabet in writings. Vedic Sanskrit alphabet have been modified to Devanagari and to simplest Gujanagari(Gujarati) script and yet Hindi is taught in a very printing ink wasting complex script to millions of children in India. Why not adopt a simple script at national level?
- छठी क्लास की एक लड़की को उसका भाई फिजिकली अब्यूज कर रहा था। लड़की को हमेशा गुम-सुम देखकर टीचर ने उससे पूछा। पहले वह कुछ नहीं बोली। बाद में टीचर के लगातार यह विश्वास दिलाने पर कि तुम्हारा सीक्रेट मेरा सीक्रेट है और कोई तुम पर नहीं हंसेगा, लड़की ने धीरे-धीरे सारी बात बताई। टीचर ने लड़की के पैरंट्स से कॉन्टैट किया और भाई के खिलाफ केस भी कराया। लेकिन, इस कामयाबी में और लड़की का भरोसा जीतने में टीचर को महीनों मेहनत करनी पड़ी।
इससे पहले कि माता-पिता अपने एक साल के बच्चे को विकसित करना शुरू करने का फैसला करें, उन्हें बस यह जानने की जरूरत है कि उनका बच्चा इस उम्र तक क्या कर सकता है, जानना और करना चाहिए। सबसे पहले, आपको इसके शारीरिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जो शिशु के निम्नलिखित कौशल में व्यक्त किया गया है: सहायता के बिना, पैरों पर खड़े रहना, दौड़ना (तीसरे पक्ष की मदद का उपयोग करना), स्वतंत्र रूप से चलना, वयस्कों की नकल करना, उनके कुछ कार्यों की नकल करना, एक कप से पीना वयस्कों की मदद के बिना।
अलास्का हुस्कीखोया एन्जिल्स पशु बचावकुत्तों के लिए हाइड्रोजन पेरोक्साइडकॉकर स्पेनियलछोटे कुत्तों जो दोस्ताना दोस्त हैंपीसी पाउंड पिल्लेतेजी से और सुरक्षित रूप से रक्तस्राव से कुत्ते की नाखून को कैसे रोकेंआपके कुत्ते के राशि चक्र साइन इन उनके बारे में क्या कहते हैं?हार्टब्रोकन सैनिक अपने सैन्य कुत्ते साथी के शरीर पर अमेरिकी ध्वज देता है क्योंकि वह दूर जाता हैमाँ भालू: जीवन से भरा, समय से बाहरखोया कुत्तों लेखक जिम गोरंट वार्ता, पिट बुल्सरालेघ, एनसी ने कुत्ते के लिए यूथनेसिया के बजाय थेरेपी पर विचार किया
ऐसे में पहली कक्षा के जो बच्चे अभी अपनी समझ पुख्ता करने की कोशिश में हैं उनको कम प्रयास करने का मौका मिलता है। साथ ही साथ शिक्षक पहली कक्षा के हर बच्चे तक नहीं पहुंच पाते, जो इस स्तर के बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। इसी मसले पर मैंने बात की पहली-दूसरी कक्षा के बच्चों को हिंदी भाषा में पढ़ना-लिखना कैसे सिखाया जाए इस मुद्दे पर अच्छी पकड़ रखने वाले जितेंद्र कुमार शर्मा से।
इसी तरह तकलीफ होती है जब रमा शब्दोच्चारण को अंग्रेजी में किसी को बताना होता है. अदतन इसे Rama लिखा जाता है और उसे रामा समझा जाता है. रमा अंग्रेजी से होकर हिंदी में लौटने पर रामा हो जाता है. इनसे बचने के उपाय करने होंगे. रम (XXX Rum  नहीं) को लोग Ram लिखते हैं और पढ़ने वाला राम पढ़ता है. देखा. इस तरह रम, राम, रमा और रामा शब्द अंग्रेजी में जाने आने में ऐसे घुल जाते हैं कि सही शब्द का पता ही नहीं चलता. यदि एक से अधिक बार   जा – आ लिए, तो शब्द ही बदल जाता है.
बड़ी क्लासेस में यह काम स्टूडेंट्स के टेंपरामेंट (मिजाज) को समझकर आसानी से किया जा सकता है। स्टूडेंट्स के मिजाज को भांपने और उसके मुताबिक बदलने में टीचर को गुरेज नहीं करना चाहिए। दिक्कत तब पैदा होती है जब टीचर अपने सामने पढ़ने आए स्टूडेंट्स पर कोई राय कायम किए बिना कोर्स को सिर्फ पढ़ाने की गरज से पढ़ा कर क्लास का समय बिता देते हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स इंगेज नहीं हो पाते और क्लास में शोर करने के अलावा वैसी अनुशासनहीनता भी करते हैं जो उनकी फाउंडेशन को कमजोर करता है। यूनिवर्सिटी में जाकर यही स्टूडेंट्स पढ़ने की बजाय क्लास को कैसे बाधित किया जाए, इसमें एक्सपर्ट हो जाते हैं।
दान। कई व्यक्तिगत वित्त गुरु तनाव देते हैं कि यह कितना महत्वपूर्ण है। और शोध खुशी को बनाने के एक तरीके के रूप में इस प्राथमिकता का समर्थन कर रहा है। यह कुछ ऐसा है जो हम अपने बच्चों को सिखााना चाहते थे: कि जीवन में उनकी सफलता सिर्फ खुद की तुलना में अधिक है। हम इस बारे में बात करते हैं कि हमें कितनी भाग्यशाली चीजें हैं जिनकी हमें आवश्यकता है, और हम बताते हैं कि जब दूसरों को इतना विशेषाधिकार नहीं मिलता है। गेविन पहले से ही जानता है कि हम थ्रिफ्ट स्टोर्स को दान करके दूसरों की मदद कर सकते हैं, जिसे हम नियमित रूप से करते हैं। और जब हमने अपनी तीन लिफाफा प्रणाली शुरू की, तो उसने जरूरतमंदों की मदद करने के प्रयासों के लिए हमारे चर्च को दान देना शुरू कर दिया।
गर्मी शुरू होती है, समुद्र के लिए एक रोमांचक यात्रा आगे बढ़ती है, और कई माता-पिता इस सवाल में रुचि रखते हैं कि कब एक बच्चे को तैरना सिखाना है और क्या नहीं। अनुभवी प्रशिक्षकों के अनुसार, बच्चों को 4 से 6 साल की उम्र से पहले तैराकी नहीं सिखाई जा सकती है, और तब भी, यदि आप अच्छी तरह से जानते हैं कि यह कैसे करना है। छोटे बच्चे बल्कि विभिन्न प्रकार के inflatable समर्थन साधनों का उपयोग करके सरल पानी के खेल। सबसे महत्वपूर्ण बात, पानी ने एक बच्चे में केवल सकारात्मक भावनाओं का कारण बना। तैराकी सिखाने का एक अयोग्य प्रयास इस तथ्य को जन्म दे सकता है कि बच्चा भयभीत हो जाएगा, और बाद में उसे तैराकी सिखाना असंभ
लौह युक्त खाद्य पदार्थ: आहार में लोहे की कमी से रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। लोहे की कमी की वजह से कई अन्य समस्याएं जैसे एकाग्रता खराब हो जाना, ऊर्जा में कमी एवं थकान इत्यादि समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसलिए इसको खुराक मिलना जरूरी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपको अपने बच्चों को प्रचूरता से लौह युक्त खाद्य पदार्थ खिलाना चाहिए।
आदरणीय, नमस्कार! मैंने मातृ भाषाओं के हक़ में एक दस्तावेज लिखा है जो हिंदी, पंजाबी, डोगरी, तामिल, तेलुगु, कन्नड़, मैथिलि, उर्दु, और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है. इस दस्तावेज का नाम 'भाषा नीति के बारे में अंतरराष्ट्रीय खोज: मातृ भाषा खोलती है शिक्षा, ज्ञान और अंग्रेजी सीखने के दरवाज़े' है. आप इसे हिंदी, पंजाबी, मैथिली, तामिळ, तेलुगू, कन्नड़, उर्दू, और अंग्रेजी में http://punjabiuniversity.academia.edu/JogaSingh/papers अंतरजाल पते से पढ़ सकते हैं. पीडीएफ प्रति चाहें तो मुझे अपना विद्युत पता भेज कर मंगवा सकते हैं. कुछ प्रतियां संलगित हैं. इस दस्तावेज में भाषा के मामलों सम्बन्धी दुनिया भर की खोज, समझ और व्यवहार का सार दिया गया है और दिखाया गया है कि मातृ भाषाओं की अनदेखी से भारत को कितने ज़्यादा शैक्षिक, विकासपरक और वाणिज्यपरक नुकसान हो चुके हैं और हो रहे हैं. उपरोक्त पते पर भाषा सम्बन्धी कुछ और लेख भी पड़े हैं. कोई दस्तावेज अच्छा लगे तो आगे बांटियेगा. सधन्यवाद!,

अपने बच्चे के लिए कपड़े चुनते समय, उन कपड़ों पर ध्यान केंद्रित करना बंद कर दें, जो इस्तेमाल करने में आरामदायक हों, ताकि उन्हें आसानी से बच्चे पर लगाया जा सके और आसानी से हटाया जा सके। अंडरशर्ट और ब्लाउज को संबंधों के साथ या बटनों के साथ चुनें (ताकि सिर के माध्यम से शूट न करें)। कपड़े अधिक मुफ्त खरीदें, ताकि बच्चे के आंदोलन में बाधा न आए। जिस कपड़े से कपड़े सिलने हैं, वह सांस से साफ होना चाहिए। बच्चे के कपड़े धोने के लिए आसान होना चाहिए।
इस तरह का अभ्यास लगातार होना चाहिए ताकि बच्चों का इतना अभ्यास हो जाए कि वर्ण के साथ मात्रा के प्रतीक को देखते ही वे झट से अनुमान लगा लें कि इसको कैसे बोला जाएगा। वे कहते हैं कि यहां तक आने में बच्चों को समय लगता है, जो बच्चे रटकर यहां तक पहुंचते हैं वे थोड़ी देर ठहरते तो हैं मगर समझकर पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में उनके पढ़ने की रफ़्तार (रीडिंग स्पीड) कम होती है।
यह निर्भर करता है कि बच्चा किस कक्षा में है। यदि छोटा है तो वह जरा से प्यार से समझाने पर पढ़ने बैठ जाएगा। यदि बच्चा 2 से लेकर 8वीं कक्षा में है तो उसे ज़बरदस्ती पढ़ने के लिए बैठाना मुश्किल है। ऐसे में उससे बात करना अच्छा रहेगा। ध्यान रखें कि आपकी बातें सीधे पढ़ाई पर केंद्रित न हो। उसे कार्टून पसंद है तो कार्टून की बात ही करें। मान लीजिये, उसे बेन टेन या डोरेमॉन पसंद है। उससे किसी भी एपिसोड के बारे में बात करें कि बेन टेन कैसे एलियन बन जाता है या डोरेमॉन के गैजेट्स कैसे काम करते हैं। बच्चा बड़ी दिलचस्पी से आपको सब समझाने लग जायेगा। आप प्रतिप्रश्न करते रहें। इस बार आपके प्रश्न कुछ इस तरह से होने चाहिए कि बात धीरे धीरे कार्टून से हटकर उसकी किताबों की ओर बढ़ जाये। जब बच्चा इन सवालों के जवाब नहीं दे पाएगा तो उसे प्रेरित करें कि ये सिद्धांत तो तुम्हारी गणित या विज्ञान की किताब में मिल जाएगा। आप देखेंगे कि बच्चा स्वयं ही पढ़ने बैठ जाएगा।
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वर्ष के समय को देखते हुए, आउटरवियर चुनें। एक ठंड की अवधि के लिए, गर्म ऊन कंबल पर या फर के साथ एक लिफाफे पर रोकें, गर्म टोपी को मत भूलना। एक कंबल के लिए, एक सुंदर duvet कवर या एक कोने खरीदें, वे निर्वहन के लिए एक सेट में लालित्य जोड़ देंगे। गुलाबी या नीली रिबन या एक विशेष पिन लें। शरद ऋतु और वसंत के लिए, एक गद्दी पॉलिएस्टर, चौग़ा और एक कंबल पर एक लिफाफे के बीच चुनें।
इस वर्ण संरचना के बाद हिंदी के एक वर्ण के लिए, अंग्रेजी की एक तरह की ही वर्ण संरचना होगी और किसी प्रकार का संशय नहीं रह जाएगा. हालाँकि यह काफी कठिन है. हमारे पूर्व राष्ट्रपति  व विशिव प्रसिद्ध दार्शनिक डॉ. सर्वेपल्लि राधाकृष्णन की अंग्रेजी में लिखी गई श्रीमद्भगवत्गीता में हिंदी उच्चारणों के जो संकेत दिए हैं, वे सटीक हैं. किसी कम्प्यूटर या टाईपराईटर पर, वैसे संकेत मैंने तो आज तक नहीं देखा.
किसी वर्ण के साथ मात्रा लगने पर उसकी आवाज़ में बदलाव होता है, अगर इस बात को समझने का मौका बच्चों को मिले तो वे बहुत आसानी से मात्राओं के कांसेप्ट को समझ सकते हैं। उदाहरण के लिए इसके लिए जिन वर्णों को बच्चे पहले से जान रहे थे, उसमें ‘ई’ की मात्रा लगाने के बाद बच्चों को पढ़कर बताया कि उसकी आवाज़ कैसे बदल रही है। (जैसे क+ी=की, र+ ी= री)। इसके बाद वर्णों और मात्रा लगे वर्णों को लिखना शुरु किया, इसके जरिए बच्चों को यह बताना था कि कौन सा वर्ण लिखा जा रहा है। या मात्रा लगे वर्णों को पढ़कर बताने का मौका बच्चों को मिले।
कुछ गणित करो बड़े बच्चे यौगिक ब्याज जैसी चीजों के वास्तविक गणित के बारे में सीखना शुरू करने के लिए काफी बड़े हैं। एक अच्छा यौगिक ब्याज कैलक्यूलेटर देखें, और कुछ परिदृश्य चलाएं। देखें कि वे 20 साल में कितनी बचत कर सकते हैं केवल एक महीने में $ 50 बचाते हैं। फिर देखें कि यदि वे कार ऋण या छात्र ऋण पर न्यूनतम भुगतान करते हैं तो वे कितना भुगतान करेंगे। रखे गए नंबरों को देखना अधिकांश बच्चों के लिए सहायक हो सकता है।
8 आइए प्राचीन समय के एक परिवार के अनुभव पर गौर करें जिससे आज माता-पिताओं को मदद मिल सकती है। (प्रेषि. 16:25-33) ईसवी सन्‌ 50 के आस-पास पौलुस अपने दूसरे मिशनरी दौरे में फिलिप्पी शहर गया। वहाँ उस पर और सीलास पर झूठा इलज़ाम लगाया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया। रात के वक्‍त एक ज़बरदस्त भूकंप आया जिससे जेल के सभी दरवाज़े खुल गए। जेलर ने सोचा कि सारे कैदी भाग गए। वह अपनी जान लेने ही वाला था कि तभी पौलुस ने उसे ऐसा करने से रोका। इसके बाद पौलुस और सीलास ने जेलर और उसके परिवार को यीशु के बारे में सच्चाई सिखायी। उन्होंने उन बातों पर यकीन किया और यह जाना कि यीशु की आज्ञा मानना कितना ज़रूरी है। फिर उन्होंने बिना देर किए बपतिस्मा लिया। इस अनुभव से हम क्या सीखते हैं?

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