छोटे बच्चों की दुनिया काफी रंगीन होती है। किड्स को पढ़ाने के तरीके में ब्लैक एंड व्हाइट के लिए कोई स्पेस ही नहीं है। शायद यही वजह है कि बच्चे ऐसी किताबों से पढ़ना नहीं चाहते, जिनमें चित्र कम हों या फिर ब्लैक एंड व्हाइट हों। इसलिए कोशिश करें कि जिन किताबों से आप बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वो ज्यादा से ज्यादा कलरफुल हों। इससे बच्चों को पढ़ी हुई चीजें लंबे समय तक आसानी से याद रह सकती हैं।
आस पास रखें किताबें: अगर आप कामकाजी महिला है तो ऐसे में आपके बच्चे के पास दिनभर किताब नहीं रह सकती है और वह सिर्फ रात में ही सोते समय किताबें पढ़ सकता है। जबकि यह ज़रूरी है कि बच्चे का जब किताबों से खेलने या उन्हें पढने का मन करे तो वह उसके आस पास होनी चाहिए। इसलिए बच्चे की पहुँच में कुछ उसके लायक किताबें घर में ज़रूर रखें जिसे वो खुद कभी भी निकाल कर पढ़ सके।

महाराष्ट्र में खासकर उन शब्दों में जहाँ अँग्रेजी के Z सा उच्चारण होता है, ज अक्षर पर जोर देकर झ बोला जाता है, इसीलिए वे जबरन नहीं झबरन बोलेंगे भी और लिखेंगे भी. वे जेड को झेड कहेंगे. यह त्रुटि उनके भाषा - ज्ञान में उच्चारण के कारण है न कि इसलिए कि वे हिंदी ठीक लिखना नहीं जानते. ऐसे ही महीन शब्द को अक्सर महिन लिखते हैं. यह उच्चारण की गलतियाँ हैं. इस तरह की क्षेत्रीय उच्चरणों का विभिन्न भाषा के ज्ञान पर असर होता है और वह बहुत सारी गलतियों का कारण बन जाता है. इन जैसी परिस्थितियों के कारण बंगाली दादा ब एवं व में गफलत कर जाता है. उनके अपनी भाषा में एक ही अक्षर से काम चलता है इसलिए यहाँ के दो अक्षरो में कौन सा प्रयोग करें, इसके निर्णय में कठिनाई होती है. अक्सर व की जगह भी ब का प्रयोग हो जाता है.
कॉम्पिटिशन के इस दौर में आजकल हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा सबसे तेज बने। इसके लिए वे बच्चे को 2-3 साल में ही प्ले स्कूल में डाल देते हैं। इसके बाद पैरेंट्स की हसरत होती है कि उनका बच्चा जल्द से जल्द लिखना व पढ़ना सीखे। लिखना पढ़ाई की सबसे पहली कड़ी है और जरूरी नहीं कि हर बच्चा आसानी से लिखना सीख जाए। ऐसी स्थिति में कई बार अभिभावक बच्चे पर दबाव भी डालते हैं, लेकिन इसका परिणाम सकारात्मक नहीं आता। आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे तरीके जिनकी मदद से आप अपने लाडले को लिखना सिखा सकते हैं।
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