अब आप सोच रहे होंगे,ये मुद्दा क्या है,कहना क्या चाहती हो,ये क्या हॉस्टल और घर से पढ़ने वालों के बीच कोई comparison है? ....नहीं !! उदाहरण में चाहे मैंने अपने बेचारे भोले भाले पतिदेव को खींच लिया हो और केवल हॉस्टल और घर से पढ़ाई का ही तुलनात्मक विश्लेषण किया हो लेकिन सीधे सीधे शब्दों में बात है स्वावलंबन की। हाँ!! वो गुण जो हमारे बच्चों में हमें सबसे पहले डालना चाहये चाहे वो हमारे पास रहते हो या नहीं। खुद पर भरोसा करने का काम जिस दिन उन्हें आ जायेगा,उनके पंखों को फैलने से कोई नहीं रोक पायेगा। Self Dependence,Decision making power,Compromise ,Adjustments वो छोटे छोटे बीज है जो बच्चों के मूल्यों की जड़ों को मजबूत बनाती है।
11 याद रखिए कि यह दुनिया और इसकी चीज़ें, यहोवा की सोच और उसके मकसद से मेल नहीं खातीं। (याकू. 4:7, 8; 1 यूह. 2:15-17; 5:19) यहोवा के साथ एक करीबी रिश्‍ता ही एक बच्चे को शैतान, दुष्ट दुनिया और दुनिया की बुरी  सोच से हिफाज़त दे सकता है। इससे बढ़िया हिफाज़त कोई और चीज़ नहीं दे सकती! अगर माता-पिता पढ़ाई और अच्छी नौकरी को पहली जगह देंगे, तो बच्चे को यही लगेगा कि दुनिया की चीज़ें ज़्यादा अहमियत रखती हैं, न कि यहोवा के साथ एक करीबी रिश्‍ता। यह बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। माता-पिताओ, क्या आप चाहते हैं कि यह दुनिया आपके प्यारे बच्चों को सिखाए कि क्या बात ज़िंदगी में खुशी देगी? सच्ची खुशी और कामयाबी पाने का सिर्फ एक ही रास्ता है, यहोवा को अपनी ज़िंदगी में पहली जगह देना।​—भजन 1:2, 3 पढ़िए।
लौह युक्त खाद्य पदार्थ: आहार में लोहे की कमी से रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है जिससे मस्तिष्क तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। लोहे की कमी की वजह से कई अन्य समस्याएं जैसे एकाग्रता खराब हो जाना, ऊर्जा में कमी एवं थकान इत्यादि समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और इसलिए इसको खुराक मिलना जरूरी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपको अपने बच्चों को प्रचूरता से लौह युक्त खाद्य पदार्थ खिलाना चाहिए।

 2 कुछ सर्किट निगरानों ने गौर किया है कि 18 से 22 की उम्र के कई नौजवानों ने अभी तक बपतिस्मा नहीं लिया है, जबकि उनकी परवरिश सच्चाई में हुई है। इनमें से ज़्यादातर नौजवान सभाओं में आते हैं, प्रचार में जाते हैं और खुद को यहोवा का साक्षी मानते हैं। फिर भी, किसी वजह से उन्होंने यहोवा को अपना जीवन समर्पित नहीं किया और बपतिस्मा नहीं लिया। कुछ मामलों में देखा गया है कि माता-पिताओं को लगता है कि उनके बच्चे अभी बपतिस्मा लेने के लिए तैयार नहीं। इस लेख में हम उन चार चिंताओं पर गौर करेंगे जिनकी वजह से कुछ माता-पिता अपने बच्चों को बपतिस्मा लेने का बढ़ावा नहीं देते।

बच्चे को प्रोत्साहित करें – अगर आप चाहते हैं कि बच्चा कोई भी काम अच्छे से करे, तो उसके लिए उसे प्रोत्साहित करना सबसे ज्यादा जरूरी है। लिखने की कला सिखाने में भी यह जरूरी है। अगर बच्चा जरा सा भी पेन चलाए, कुछ बनाए तो उसे प्रोत्साहित करें। दूसरे बच्चों का नाम लेकर उसकी तुलना करते हुए अपने बच्चे को जीनियस बताएं। इससे वह और अच्छा करेगा। उसे कभी भी हतोत्साहित न करें, ये बातें न कहें कि तुम्हें तो कुछ नहीं आता।
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